{"_id":"6ae8d254f882c40fff043f88","slug":"siddharthnagar-news-it-is-through-satsang-that-one-is-liberated-from-worldly-attachments-and-develops-devotion-for-the-feet-of-the-lord-siddharthnagar-news-c-227-1-sgkp1033-167520-2026-11-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"Siddharthnagar News: सत्संग से ही होती है मोह की निवृत्ति और भगवान के चरणों में अनुराग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Siddharthnagar News: सत्संग से ही होती है मोह की निवृत्ति और भगवान के चरणों में अनुराग
Mon, 02 Nov 2026 11:41 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Mon, 02 Nov 2026 11:41 PM IST
विज्ञापन
- हनुमान जयंती पर श्रीराम कथा का हुआ आयोजन
पकड़ी बाजार। क्षेत्र के डफरा स्थित हनुमान मंदिर परिसर में हनुमान जयंती के अवसर पर आयोजित श्रीराम कथा के पहले दिन रविवार रात कथा वाचक पं. चंद्रशेखर रामायणी ने सत्संग की महिमा का वर्णन किया। कथा सुनकर पंडाल में मौजूद श्रद्धालु भावविभोर हो गए।
कथा वाचक ने कहा कि अनंत जन्मों का पुण्य उदय होने पर ही जीव को संतों के दर्शन और भगवान की कथा सुनने का सौभाग्य प्राप्त होता है। सत्संग से ही मोह की निवृत्ति होती है और भगवान के चरणों में अनुराग उत्पन्न होता है। उन्होंने रामचरितमानस की चौपाई ''मिलहिं न रघुपति बिनु अनुरागा। किए जोग तप ज्ञान बिरागा॥'' का उल्लेख करते हुए कहा कि योग, तप, ज्ञान और वैराग्य जैसे साधन करने के बाद भी यदि भगवान के चरणों में प्रेम नहीं है तो उनकी प्राप्ति संभव नहीं है।
उन्होंने कहा कि सत्संग के माध्यम से ही विवेक जागृत होता है। इसके बाद भगवान के प्रति अनुराग उत्पन्न होता है और जीव को ईश्वर की प्राप्ति होती है। कथा के अगले प्रसंग में उन्होंने तीर्थराज प्रयाग में भरद्वाज मुनि को याज्ञवल्क्य द्वारा भगवान श्रीराम की कथा सुनाए जाने का वर्णन किया।
विज्ञापन
इस दौरान नरेंद्र मिश्र, जितेंद्र त्यागी, अमरेश चौधरी और अवधेश मिश्र सहित अन्य श्रद्धालु मौजूद रहे।
विज्ञापन
पकड़ी बाजार। क्षेत्र के डफरा स्थित हनुमान मंदिर परिसर में हनुमान जयंती के अवसर पर आयोजित श्रीराम कथा के पहले दिन रविवार रात कथा वाचक पं. चंद्रशेखर रामायणी ने सत्संग की महिमा का वर्णन किया। कथा सुनकर पंडाल में मौजूद श्रद्धालु भावविभोर हो गए।
कथा वाचक ने कहा कि अनंत जन्मों का पुण्य उदय होने पर ही जीव को संतों के दर्शन और भगवान की कथा सुनने का सौभाग्य प्राप्त होता है। सत्संग से ही मोह की निवृत्ति होती है और भगवान के चरणों में अनुराग उत्पन्न होता है। उन्होंने रामचरितमानस की चौपाई ''मिलहिं न रघुपति बिनु अनुरागा। किए जोग तप ज्ञान बिरागा॥'' का उल्लेख करते हुए कहा कि योग, तप, ज्ञान और वैराग्य जैसे साधन करने के बाद भी यदि भगवान के चरणों में प्रेम नहीं है तो उनकी प्राप्ति संभव नहीं है।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि सत्संग के माध्यम से ही विवेक जागृत होता है। इसके बाद भगवान के प्रति अनुराग उत्पन्न होता है और जीव को ईश्वर की प्राप्ति होती है। कथा के अगले प्रसंग में उन्होंने तीर्थराज प्रयाग में भरद्वाज मुनि को याज्ञवल्क्य द्वारा भगवान श्रीराम की कथा सुनाए जाने का वर्णन किया।
विज्ञापन
इस दौरान नरेंद्र मिश्र, जितेंद्र त्यागी, अमरेश चौधरी और अवधेश मिश्र सहित अन्य श्रद्धालु मौजूद रहे।