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Siddharthnagar News: खाद के धंधेबाजों की जड़ें तलाश रही खुफिया नजर

Sun, 24 Aug 2025 11:08 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Sun, 24 Aug 2025 11:08 PM IST
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Siddharthnagar News : Intelligence eye is looking for the roots of fertilizer traders
इटवा चनदी चौराहा पर  बीज भंडार पर देर रात जांच करती टीम। 
सिद्धार्थनगर। जिले में यूरिया के लिए जारी मारामारी और सामने आई कालाबाजारी के पीछे का सच जानने के लिए शासन की ओर से जांच के लिए टीम भेजी गई है। इसके अलावा एक खुफिया टीम भी वितरण से जुड़ी जानकारी एकत्र कर रही है। वितरण में बड़े पैमाने पर अनियमितता की बात सामने आ रही है।
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सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, सीमावर्ती इलाके की दुकानों में सबसे अधिक गोलमाल किया गया है। मशीन न चलने का बहाना बनाकर खाद ठिकाने लगा दी गई है। इसमें उठान से लेकर बिक्री और रिपोर्ट में भी अनियमितता की बात सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि दो जगह रिपोर्ट जानी है। ऐसे में बड़ी कार्रवाई होने की उम्मीद है। इसमें न सिर्फ दुकानदार जद में आएंगे, बल्कि विभाग से जुड़े लोग भी लपेटे में आ सकते हैं।
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धान की रोपाई के बीच खाद की मांग बढ़ी तो किसान परेशान हो उठे। समितियों पर लंबी कतार लगने लगी। इसके बाद भी किसानों को यूरिया व डीएपी नहीं मिल पा रहा था। जब किसानों में हाहाकर मचा और किल्लत होने लगी तो जिलाधिकारी डॉ. राजा गणपति आर ने खुद दुकानों की जांच शुरु की। धड़ाधड़ निजी दुकानों की हुई जांच में सारे नियम-कायदे हवा में मिले। स्टाॅक रजिस्टर में कुछ और मौके पर कुछ और रिकॉर्ड दर्ज पाए गए। कागजों में असमानता, रजिस्टर और मशीन के कार्य में अंतर सहित कई खामियां उजागर हुईं। इसके बाद एक-एक करके 12 निजी दुकानदारों पर आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत केस दर्ज करवाया। त्रिलोकपुर क्षेत्र में पांच हजार बोरी से अधिक खाद पकड़ी गई। बाॅर्डर इलाके में शोहरगढ़ और लोटन क्षेत्र में कुल 1500 बोरी से अधिक खाद बरामद हुई, जिसे कालाबाजारी के लिए दुकानदारों ने रखा था। वहीं, बाॅर्डर पर तस्करी जगह जाहिर है। इसके बाद एक्शन शुरु किया गया ताे कालाबाजारी का खेल सामने आया।
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रजिस्टर के खेल से होती है गड़बड़ी: सरकार ने भले ही डिजिटल व्यवस्था कर दी है, लेकिन चोरी करने वालों ने उसका तोड़ निकाल लिया है। सूत्रों की मानें तो ऑनलाइन अपडेट करने के साथ ही रजिस्टर में भी खेल करते हैं। एक किसान को एक बोरी खाद देते हैं, जबकि उसके नाम पर कई बोरी खारिज कर लेते हैं। इसके बाद उसे बिना आधार या फिर कालाबाजारी करने वालों को 100-150 रुपये प्रति बोरी मुनाफा लेकर बेच देते हैं।

बताया यह भी जा रहा है जांच टीम के लिए अलग और किसानों के लिए अलग रजिस्टर रखे जाते हैं। इस चोरी में पारंगत बनाने का काम भी सिस्टम में बैठे लोग सिखाते हैं, जिससे जांच में वह पकड़े न आएं। सहयोग के लिए उन्हें भी हिस्सा मिल जाता है।
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