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Siddharthnagar News: किसानों को दी गई उत्पादकता में सुधार की जानकारी
Sun, 12 Oct 2025 12:00 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sun, 12 Oct 2025 12:00 AM IST
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भनवापुर के कृषि विज्ञान केंद्र सोहना में आयोजित कार्यक्रम में जानकारी देते कृषि वैज्ञानिक। स्रो
- भनवापुर के कृषि विज्ञान केंद्र सोहना में प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना और दलहन आत्मनिर्भर मिशन के शुभारंभ का हुआ संजीव प्रसारण
भनवापुर। ब्लाॅक क्षेत्र के कृषि विज्ञान केंद्र सोहना में शनिवार को प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना और दलहन आत्मनिर्भर मिशन के शुभारंभ का सजीव प्रसारण का कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में कृषि उत्पादकता में सुधार, फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए किसानों को जानकारी दी गई।
मुख्य अतिथि जिला पंचायत सदस्य प्रदीप कसौधन ने किसानों को सरकार की ओर से चलाई गई योजनाओं और किसानों को कृषि विज्ञान केंद्र से जुड़कर लाभ लेने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि किसान केवीके से जुड़ कर तकनीकी खेती से बेहतर आय अर्जित कर सकते हैं। केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. प्रदीप कुमार ने खरीफ में उगाई जाने वाली फसलों में लगने वाले रोगों एवं कीट प्रबंधन के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि यदि धान में हल्दिया रोग के प्रबंधन के लिए प्रोपीकोनाजोल एक मिली प्रति लीटर पानी में घोल बना कर छिड़काव करें। प्रसार वैज्ञानिक डॉ. शेष नारायण सिंह ने धान फसल अवशेष प्रबंधन के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि मल्चर के प्रयोग से अवशेष को छोटे टुकड़ों में काट कर खेत में सड़ा सकते हैं। डॉ. सर्वजीत ने सरसों एवं गेहूं की उन्नत फसलों की जानकारी देते हुए बुवाई समय पर करने को कहा। मृदा वैज्ञानिक डॉ. प्रवेश कुमार ने प्राकृतिक खेती के बारे में विस्तार से बताया। केंद्र के उद्यान वैज्ञानिक डॉ. प्रवीण कुमार मिश्र ने पोषण वाटिका के माध्यम से पोषण सुरक्षा की जानकारी दी।
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भनवापुर। ब्लाॅक क्षेत्र के कृषि विज्ञान केंद्र सोहना में शनिवार को प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना और दलहन आत्मनिर्भर मिशन के शुभारंभ का सजीव प्रसारण का कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में कृषि उत्पादकता में सुधार, फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए किसानों को जानकारी दी गई।
मुख्य अतिथि जिला पंचायत सदस्य प्रदीप कसौधन ने किसानों को सरकार की ओर से चलाई गई योजनाओं और किसानों को कृषि विज्ञान केंद्र से जुड़कर लाभ लेने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि किसान केवीके से जुड़ कर तकनीकी खेती से बेहतर आय अर्जित कर सकते हैं। केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. प्रदीप कुमार ने खरीफ में उगाई जाने वाली फसलों में लगने वाले रोगों एवं कीट प्रबंधन के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि यदि धान में हल्दिया रोग के प्रबंधन के लिए प्रोपीकोनाजोल एक मिली प्रति लीटर पानी में घोल बना कर छिड़काव करें। प्रसार वैज्ञानिक डॉ. शेष नारायण सिंह ने धान फसल अवशेष प्रबंधन के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि मल्चर के प्रयोग से अवशेष को छोटे टुकड़ों में काट कर खेत में सड़ा सकते हैं। डॉ. सर्वजीत ने सरसों एवं गेहूं की उन्नत फसलों की जानकारी देते हुए बुवाई समय पर करने को कहा। मृदा वैज्ञानिक डॉ. प्रवेश कुमार ने प्राकृतिक खेती के बारे में विस्तार से बताया। केंद्र के उद्यान वैज्ञानिक डॉ. प्रवीण कुमार मिश्र ने पोषण वाटिका के माध्यम से पोषण सुरक्षा की जानकारी दी।
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