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समाज के लिए अनुकरणीय है भारत का चरित्र : बलराम
Sun, 18 Oct 2026 11:46 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sun, 18 Oct 2026 11:46 PM IST
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भनवापुर। भनवापुर ब्लॉक क्षेत्र के बिजौरा स्थित शिव मंदिर परिसर में चल रही संगीतमय श्रीराम कथा के सातवें दिन शनिवार को कथा वाचक संत बलराम दास ने भगवान श्रीराम के अनुज भरत के चरित्र का भावपूर्ण वर्णन किया।
कथावाचक ने कहा कि भरत का चरित्र समाज के लिए अनुकरणीय है। उनका जीवन भाई के प्रति प्रेम, त्याग, समर्पण और आदर्श का अनुपम उदाहरण है। कथा को आगे बढ़ाते हुए संत बलराम दास ने कहा कि भगवान श्रीराम के वन गमन के बाद राजा दशरथ का निधन हो गया। इसकी सूचना मिलने पर ननिहाल से अयोध्या पहुंचे भरत को जब श्रीराम के वनवास की जानकारी हुई तो वह बेहद दुखी हुए। उन्होंने माता कैकेयी और दासी मंथरा के प्रति नाराजगी जताई।
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कथावाचक ने कहा कि भरत का चरित्र समाज के लिए अनुकरणीय है। उनका जीवन भाई के प्रति प्रेम, त्याग, समर्पण और आदर्श का अनुपम उदाहरण है। कथा को आगे बढ़ाते हुए संत बलराम दास ने कहा कि भगवान श्रीराम के वन गमन के बाद राजा दशरथ का निधन हो गया। इसकी सूचना मिलने पर ननिहाल से अयोध्या पहुंचे भरत को जब श्रीराम के वनवास की जानकारी हुई तो वह बेहद दुखी हुए। उन्होंने माता कैकेयी और दासी मंथरा के प्रति नाराजगी जताई।
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