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Siddharthnagar News: दिवाली पर मिट्टी के दीयों से रोशन करें घर, कुम्हारों को भी मिलेगा संबल

Thu, 05 Nov 2026 11:16 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Thu, 05 Nov 2026 11:16 PM IST
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Siddharthnagar News: Illuminate your home with earthen lamps this Diwali; it will also provide support to potters
- पारंपरिक दीयों से जुड़ी है आस्था और संस्कृति, लोगों ने स्वदेशी उत्पादों को अपनाने की अपील की
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तुलसियापुर। दिवाली पर मिट्टी के दीये जलाने की परंपरा आज भी लोगों के दिलों में खास स्थान रखती है। इलेक्ट्रॉनिक झालरों और आधुनिक सजावटी सामान के बीच मिट्टी के दीयों की टिमटिमाती रोशनी पर्व की परंपरा और आस्था का एहसास कराती है। क्षेत्र के लोगों ने दिवाली पर मिट्टी के दीयों का अधिक से अधिक प्रयोग करने की अपील की है। इससे जहां परंपरा को बढ़ावा मिलेगा, वहीं कुम्हारों के पुश्तैनी कारोबार को भी संबल मिलेगा।
तुलसियापुर निवासी पं. संकटा प्रसाद पांडेय का कहना है कि दिवाली की असली पहचान मिट्टी के दीयों से है। मिट्टी से बने दीये हमारी परंपरा और आस्था से जुड़े हैं। इलेक्ट्रॉनिक झालरों के साथ घरों में मिट्टी के दीये जलाने से पर्व की पारंपरिक रौनक बनी रहती है। अहिरौला निवासी प्रेमचंद पासवान ने कहा कि पूजा-पाठ के बाद घर के कोने-कोने में मिट्टी के दीये जलाने की परंपरा मन को सुकून देती है। इनकी टिमटिमाती रोशनी दिवाली के उल्लास को और बढ़ा देती है।
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क्षेत्र के वरिष्ठ शिक्षाविद् नंदकिशोर चौधरी का कहना है कि आधुनिकता के दौर में भी पारंपरिक मिट्टी के दीयों का महत्व बनाए रखना जरूरी है। वहीं, औदही कलां निवासी पं. गंगाराम तिवारी ने लोगों से दिवाली पर मिट्टी के दीयों की खरीदारी करने की अपील की। उन्होंने कहा कि इससे कुम्हारों को आर्थिक लाभ मिलेगा और पारंपरिक कला एवं विरासत भी सुरक्षित रहेगी।
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दीये बनाने वाले तीजू, भोलेनाथ, शिवशंकर और रविकांत का कहना है कि त्योहारों पर मिट्टी के दीयों और बर्तनों की मांग बनी रहती है। लोगों का सहयोग मिले तो इस पुश्तैनी व्यवसाय को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि दिवाली पर लोग मिट्टी के दीये खरीदकर स्थानीय कारीगरों की मेहनत को प्रोत्साहित करेंगे।
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