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Siddharthnagar News: आग लगी तो अस्पतालों की बदइंतजामी ले लेगी जान

Tue, 07 Oct 2025 11:06 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Tue, 07 Oct 2025 11:06 PM IST
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Siddharthnagar News: If a fire breaks out, the mismanagement of hospitals will take lives
डुमरियागंज के वेवां में एक गली में स्थित निजी अस्पताल जहां फायर ब्रिगेड की गाड़ी नहीं पहुंच सकत
सिद्धार्थनगर। राजस्थान के जयपुर में स्थित सरकारी अस्पताल के ट्राॅमा सेंटर में आग लगने से छह लोगों की मौत हो गई। आग लगने की वजह शार्ट- सर्किट बताई जा रही है। जिले में भी जिला अस्पताल में केएमसीयू वार्ड और बांसी सीएचसी में आगलगी की घटनाएं हो चुकी हैं।
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मेडिकल कॉलेज और प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की पड़ताल की गई तो मेडिकल कॉलेज में फायर सिलिंडर और पाइपलाइन लगी मिली जबकि सीएचसी और पीएचसी पर केवल सिलिंडर ही मिला है। वह भी पर्याप्त संख्या में नहीं है। हाईड्रेंट होने का दावा किया जा रहा है, लेकिन दिखा नहीं। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि आग लगी तो बड़ी तबाही मचेगी। इससे इन्कार नहीं किया जा सकता है।
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जिले में निजी अस्पताल तेजी से खुल रहे हैं। सारे मानक को पूरा करके लाइसेंस और संचालन का दावा किया जाता है। लेकिन निजी अस्पताल की पड़ताल की गई तो मुख्यालय से लेकर ग्रामीण क्षेत्र के चौराहों और तहसील मुख्यालय पर संचालित हो रहे हैं। यहां फायर सिलिंडर की भी प्रर्याप्त व्यवस्था नहीं है। इससे बड़ी चुनौती सकरा गली होने के कारण आग लगने पर फायर सर्विस की गाड़ी भी नहीं पहुंच सकती है।
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जनपद मुख्यालय और कई स्थानों पर संचालित अस्पताल की पड़ताल की गई तो चिंताजनक स्थिति सामने आई। शोहरतगढ़ प्रतिनिधि के अनुसार स्थानीय कस्बे में भी कुछ ऐसे निजी अस्पताल हैं, जहां अग्निशमन की गाड़ी पहुंच ही नहीं पाएगी। अगर इन अस्पतालों किन्हीं कारणों से आग लग जाए तो आग पर काबू पाना बड़ा मुश्किल है। जहां का सड़क पूरी तह सकरा है। इस सड़को पर लोगो का पैदल चलना मुश्किल है तो यहां गाड़ी आना बहुत दूर की बात है। शोहरतगढ़ कस्बे में जामा मस्जिद के पास एक निजी अस्पताल, रमजान गली में एक निजी अस्पताल और पुरानी सिनेमा हाॅल की गली में एक निजी अस्पताल चल रहा है।
इन अस्पतालों में अगर आग लग जाए। तो बहुत मुश्किल हो जाएगी। क्योंकि यहां अग्निशमन की गाड़ी ही नहीं पहुंच पाएगी। यह अस्पताल गली में है। सड़कें बहुत संकरी हैं। सिलिंडर के भरोसे आगे बुझाना चुनौती : आग से बचाव की हकीकत जानने के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर चुनौती सामने आई। इसमें भनवापुर के सीएचसी सिरसिया में फायर नियंत्रण सिलिंडर का काफी अभाव है। अस्पताल परिसर में कुल पांच सिलिंडर ही लगा है, जहां नीचे किसी भी वार्ड में एक भी सिलिंडर नहीं है।
पहले मंजिल पर जहां बीसीपीएम और बीएएम ऑफिस के पास सिलिंडर लगा है, जिससे अगलगी के घटना से निपटना आसान नहीं होगा। इसी तरह सीएचसी बेंवा में कुल नौ अग्निशमन सिलिंडर लगे हैं जो वार्ड के साथ आने वाले मरीजों की संख्या के लिहाज से नाकाफी है। अस्पताल में लगे कुल नौ सिलिंडर से आपात स्थिति में कैसे निपटा जाएगा, यह आने वाला समय बताएगा। इतना ही नहीं बेवां सीएचसी के पास एक निजी अस्पताल गली में बना है, जहां अगलगी के घटना के दौरान फायर ब्रिगेड की गाड़ी पहुंच पाना मुश्किल है।
सरकारी अस्पताल पर नहीं है पर्याप्त इंतजाम : शोहरतगढ़। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शोहरतगढ़ पर प्रतिदिन लगभग 500 मरीज ओपीडी के लिए आते हैं। लगभग 10 से 15 मरीज भर्ती भी रहते हैं। चिकित्सक, फार्मासिस्ट सहित अन्य कर्मचारियों की संख्या करीब 100 है। अगर यहां किसी कारण से आग लग जाए तो आपात काल में आग पर काबू पाने के लिए पर्याप्त मात्रा में अग्निशमन यंत्र नही हैं। यहां पर केवल 10 अग्निशमन यंत्र लगाए गए हैं। इनमें से दो एक्सपायर हो चुके हैं। अस्पताल में एमरजेंसी वार्ड से लेकर तीन ओपीडी कक्ष है।

प्रसूता कक्ष, तीन रूम का जनरल वार्ड, ऑपरेशन कक्ष, लगभग 50 बेड वार्ड रूम, हाल, एक्सरे रूम, पैथालॉजी, औषधि भंडार रूम और अन्य स्वास्थ्य संबंधित कार्यालय है। यहां प्रतिदिन 500 से 600 से मरीज ओपीडी लिए आते हैं। उसके बाद यहां केवल 10 अग्निशमन यंत्र लगाए गए हैं। इन अग्निशमन यंत्र के भरोसे आग पर काबू नहीं पाया जा सकता है जो लापरवाही को दर्शाता है।

डुमरियागंज के वेवां में एक गली में स्थित निजी अस्पताल जहां फायर ब्रिगेड की गाड़ी नहीं पहुंच सकत

डुमरियागंज के वेवां में एक गली में स्थित निजी अस्पताल जहां फायर ब्रिगेड की गाड़ी नहीं पहुंच सकत

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