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Siddharthnagar News: आयुर्वेदिक-यूनानी पंजीकरण पर कैसे हुआ ऑपरेशन, स्वास्थ्य विभाग कराएगा जांच
Tue, 06 Oct 2026 11:33 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Tue, 06 Oct 2026 11:33 PM IST
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रॉयल अस्पताल में प्रसव के बाद नवजात की मौत का मामला, सीएमओ ने पंजीकरण की जांच कराने की कही बात
डुमरियागंज। बेवा चौराहे स्थित रॉयल अस्पताल में प्रसव के बाद नवजात की मौत के मामले ने अस्पताल के पंजीकरण और वहां किए जा रहे उपचार पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच में अस्पताल का पंजीकरण आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सा पद्धति के तहत होने की बात सामने आई है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि इस पंजीकरण के आधार पर अस्पताल में प्रसव और ऑपरेशन कैसे किया जा रहा था। सीएमओ डॉ. संजय कुमार दोहरे ने मामले की जानकारी लेकर पंजीकरण की जांच कराने की बात कही है।
दो अक्तूबर को प्रसव के बाद नवजात की मौत हो गई थी। परिजनों ने अस्पताल संचालक एवं चिकित्सक डॉ. अल्ताफ खान पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए शिकायत की थी। इसके बाद सीएचसी बेवा के अधीक्षक डॉ. विकास चौधरी के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अस्पताल का निरीक्षण किया था। जांच के दौरान अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर को सील कर दिया गया था।
परिजन का आरोप है कि प्रसव के बाद नवजात की हालत बिगड़ गई थी और अस्पताल में आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं। उनका कहना है कि समय पर उचित उपचार नहीं मिलने के कारण बच्चे की हालत गंभीर हुई।
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वहीं अस्पताल संचालक डॉ. अल्ताफ खान ने आरोपों से इन्कार करते हुए बताया कि नवजात की हालत गंभीर होने पर उसे मेडिकल कॉलेज सिद्धार्थनगर रेफर किया गया था। बच्चे को ऑक्सीजन लगाकर अस्पताल की गाड़ी से ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में उसकी मौत हो गई।
पंजीकरण पर उठे सवाल
सीएमओ डॉ. संजय कुमार दोहरे ने बताया कि आयुर्वेद एवं यूनानी चिकित्सा पद्धति के पंजीकरण के आधार पर अस्पताल में ऑपरेशन की अनुमति नहीं है। उन्होंने कहा कि अस्पताल के पंजीकरण की स्थिति और वहां संचालित चिकित्सा सेवाओं की जांच कराई जाएगी। नवजात की मौत से संबंधित शिकायत की भी जानकारी लेकर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
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डुमरियागंज। बेवा चौराहे स्थित रॉयल अस्पताल में प्रसव के बाद नवजात की मौत के मामले ने अस्पताल के पंजीकरण और वहां किए जा रहे उपचार पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच में अस्पताल का पंजीकरण आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सा पद्धति के तहत होने की बात सामने आई है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि इस पंजीकरण के आधार पर अस्पताल में प्रसव और ऑपरेशन कैसे किया जा रहा था। सीएमओ डॉ. संजय कुमार दोहरे ने मामले की जानकारी लेकर पंजीकरण की जांच कराने की बात कही है।
दो अक्तूबर को प्रसव के बाद नवजात की मौत हो गई थी। परिजनों ने अस्पताल संचालक एवं चिकित्सक डॉ. अल्ताफ खान पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए शिकायत की थी। इसके बाद सीएचसी बेवा के अधीक्षक डॉ. विकास चौधरी के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अस्पताल का निरीक्षण किया था। जांच के दौरान अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर को सील कर दिया गया था।
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परिजन का आरोप है कि प्रसव के बाद नवजात की हालत बिगड़ गई थी और अस्पताल में आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं। उनका कहना है कि समय पर उचित उपचार नहीं मिलने के कारण बच्चे की हालत गंभीर हुई।
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वहीं अस्पताल संचालक डॉ. अल्ताफ खान ने आरोपों से इन्कार करते हुए बताया कि नवजात की हालत गंभीर होने पर उसे मेडिकल कॉलेज सिद्धार्थनगर रेफर किया गया था। बच्चे को ऑक्सीजन लगाकर अस्पताल की गाड़ी से ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में उसकी मौत हो गई।
पंजीकरण पर उठे सवाल
सीएमओ डॉ. संजय कुमार दोहरे ने बताया कि आयुर्वेद एवं यूनानी चिकित्सा पद्धति के पंजीकरण के आधार पर अस्पताल में ऑपरेशन की अनुमति नहीं है। उन्होंने कहा कि अस्पताल के पंजीकरण की स्थिति और वहां संचालित चिकित्सा सेवाओं की जांच कराई जाएगी। नवजात की मौत से संबंधित शिकायत की भी जानकारी लेकर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।