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Siddharthnagar News: फॉरेंसिक विज्ञान से निष्पक्ष जांच और न्याय प्रक्रिया को मिलेगी मजबूती
Sun, 01 Nov 2026 11:04 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sun, 01 Nov 2026 11:04 PM IST
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- जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से लोहिया कला भवन में आयोजित हुई कार्यशाला
- विशेषज्ञों ने नए आपराधिक कानूनों में वैज्ञानिक साक्ष्यों की भूमिका और उनके महत्व की दी जानकारी
सिद्धार्थनगर। आपराधिक मामलों की जांच और न्यायिक प्रक्रिया में फॉरेंसिक विज्ञान की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। वैज्ञानिक साक्ष्यों से विवेचना को अधिक निष्पक्ष और विश्वसनीय बनाया जा सकता है। इसी विषय पर रविवार को लोहिया कला भवन में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से कार्यशाला और सेमिनार का आयोजन किया गया।
जनपद न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष अजय कुमार श्रीवास्तव तृतीय की अध्यक्षता में आयोजित कार्यशाला में विशेषज्ञों ने फॉरेंसिक विज्ञान के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि फॉरेंसिक विज्ञान केवल अपराध की जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि निर्दोष लोगों के अधिकारों की रक्षा और दोषियों को सजा दिलाने में भी इसकी अहम भूमिका है। इसके लिए पुलिस, अभियोजन, चिकित्सा और न्यायिक तंत्र के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है।
कार्यशाला के प्रथम सत्र में निदेशक प्रो. आदर्श कुमार ने तीन नए आपराधिक कानूनों और आपराधिक न्याय प्रणाली में फॉरेंसिक चिकित्सा एवं विज्ञान की बढ़ती भूमिका पर व्याख्यान दिया। उन्होंने भारतीय न्याय संहिता, 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 के महत्वपूर्ण प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि गंभीर अपराधों की जांच में वैज्ञानिक साक्ष्यों का सही तरीके से संकलन, परीक्षण और विश्लेषण विवेचना को विश्वसनीय बनाने में सहायक होता है।
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दूसरे सत्र में उप निदेशक डॉ. अजय कुमार श्रीवास्तव ने फॉरेंसिक बैलिस्टिक्स, आग्नेयास्त्रों से जुड़े साक्ष्यों के वैज्ञानिक परीक्षण और घटनास्थल के प्रबंधन की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि घटना के बाद घटनास्थल को सुरक्षित रखना और साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ रोकना जरूरी है। साक्ष्यों का सही तरीके से संकलन और सुरक्षित संरक्षण भी महत्वपूर्ण है।
तीसरे सत्र में वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. उदय प्रताप सिंह ने दम घुटने से होने वाली मृत्यु के प्रकार, चिकित्सकीय परीक्षण और पोस्टमार्टम के दौरान सामने आने वाले तथ्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मृत्यु के वास्तविक कारण का पता लगाने के लिए चिकित्सकीय परीक्षण, परिस्थितिजन्य साक्ष्य और वैज्ञानिक विश्लेषण का समन्वय जरूरी है।
विशेषज्ञों ने कहा कि नए आपराधिक कानूनों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए विभिन्न विभागों के अधिकारियों का प्रशिक्षण और क्षमता विकास भी जरूरी है। इससे जांच में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित होगा और न्यायालय में साक्ष्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने में मदद मिलेगी। कार्यशाला में न्यायिक, प्रशासनिक, अभियोजन, पुलिस, लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम और चिकित्सा विभाग के अधिकारी शामिल हुए।
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- विशेषज्ञों ने नए आपराधिक कानूनों में वैज्ञानिक साक्ष्यों की भूमिका और उनके महत्व की दी जानकारी
सिद्धार्थनगर। आपराधिक मामलों की जांच और न्यायिक प्रक्रिया में फॉरेंसिक विज्ञान की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। वैज्ञानिक साक्ष्यों से विवेचना को अधिक निष्पक्ष और विश्वसनीय बनाया जा सकता है। इसी विषय पर रविवार को लोहिया कला भवन में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से कार्यशाला और सेमिनार का आयोजन किया गया।
जनपद न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष अजय कुमार श्रीवास्तव तृतीय की अध्यक्षता में आयोजित कार्यशाला में विशेषज्ञों ने फॉरेंसिक विज्ञान के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि फॉरेंसिक विज्ञान केवल अपराध की जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि निर्दोष लोगों के अधिकारों की रक्षा और दोषियों को सजा दिलाने में भी इसकी अहम भूमिका है। इसके लिए पुलिस, अभियोजन, चिकित्सा और न्यायिक तंत्र के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है।
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कार्यशाला के प्रथम सत्र में निदेशक प्रो. आदर्श कुमार ने तीन नए आपराधिक कानूनों और आपराधिक न्याय प्रणाली में फॉरेंसिक चिकित्सा एवं विज्ञान की बढ़ती भूमिका पर व्याख्यान दिया। उन्होंने भारतीय न्याय संहिता, 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 के महत्वपूर्ण प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि गंभीर अपराधों की जांच में वैज्ञानिक साक्ष्यों का सही तरीके से संकलन, परीक्षण और विश्लेषण विवेचना को विश्वसनीय बनाने में सहायक होता है।
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दूसरे सत्र में उप निदेशक डॉ. अजय कुमार श्रीवास्तव ने फॉरेंसिक बैलिस्टिक्स, आग्नेयास्त्रों से जुड़े साक्ष्यों के वैज्ञानिक परीक्षण और घटनास्थल के प्रबंधन की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि घटना के बाद घटनास्थल को सुरक्षित रखना और साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ रोकना जरूरी है। साक्ष्यों का सही तरीके से संकलन और सुरक्षित संरक्षण भी महत्वपूर्ण है।
तीसरे सत्र में वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. उदय प्रताप सिंह ने दम घुटने से होने वाली मृत्यु के प्रकार, चिकित्सकीय परीक्षण और पोस्टमार्टम के दौरान सामने आने वाले तथ्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मृत्यु के वास्तविक कारण का पता लगाने के लिए चिकित्सकीय परीक्षण, परिस्थितिजन्य साक्ष्य और वैज्ञानिक विश्लेषण का समन्वय जरूरी है।
विशेषज्ञों ने कहा कि नए आपराधिक कानूनों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए विभिन्न विभागों के अधिकारियों का प्रशिक्षण और क्षमता विकास भी जरूरी है। इससे जांच में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित होगा और न्यायालय में साक्ष्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने में मदद मिलेगी। कार्यशाला में न्यायिक, प्रशासनिक, अभियोजन, पुलिस, लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम और चिकित्सा विभाग के अधिकारी शामिल हुए।