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दुर्गा पूजा में भगदड़ से सबक: काली और जगधात्री पूजा के लिए सुरक्षा निर्देश जारी; क्या होंगे नए नियम?
Sun, 01 Nov 2026 10:32 PM IST
निर्मल कांत
आईएएनएस, कोलकाता।
आईएएनएस, कोलकाता।
Published by: निर्मल कांत
Updated Sun, 01 Nov 2026 10:32 PM IST
सार
चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में भगदड़ के बाद पश्चिम बंगाल प्रशासन ने काली पूजा और जगधात्री पूजा के लिए नए निर्देश जारी किए हैं। पंडालों में रोशनी, चौड़े रास्ते, स्वयंसेवक और अग्निशामक यंत्र अनिवार्य किए गए हैं। भीड़ और आग से बचाव के लिए क्या-क्या बदलेगा? पढ़िए इस रिपोर्ट में।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
विस्तार
पश्चिम बंगाल में काली पूजा और जगधात्री पूजा के आयोजनों को लेकर प्रशासन ने नए दिशानिर्देश जारी किए हैं। ये निर्देश उत्तरी कोलकाता के चोरबागान सार्वजनिक दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भगदड़ के बाद जारी किए गए हैं। इनमें आग से सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन और रोशनी की व्यवस्था पर खास ध्यान दिया गया है।
क्या निर्देश दिए गए?
राज्य प्रशासन ने मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की है। इसमें तीन मुख्य बातों पर ध्यान दिया गया है। ये हैं- आग से सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन और पंडाल में रोशनी की व्यवस्था।
राज्य सरकार के एक अधिकारी ने बताया कि चोरबागान के पंडाल में पूजा की थीम के कारण कम रोशनी रखी गई थी। इससे पंडाल के अंदर भीड़ को संभालने में परेशानी हुई थी। इसी को ध्यान में रखते हुए नए निर्देश दिए गए हैं। सामुदायिक काली पूजा और जगधात्री पूजा समितियों को पंडाल में पर्याप्त रोशनी रखने को कहा गया है।
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समितियों को एक और निर्देश दिया गया है। उन्हें पंडाल के प्रवेश और निकास द्वारों पर भी पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था करनी होगी।
ये भी पढ़ें: सिद्धारमैया स्टिंग केस: पुलिस का खुलासा- दिल्ली के करोल बाग से खरीदा गया फोन; कुमारस्वामी के घर कैसे पहुंचा?
प्रवेश और निकास द्वार कैसे होने चाहिए?
अधिकारियों ने बताया कि पंडालों के प्रवेश और निकास द्वार पर्याप्त चौड़े होने चाहिए। इससे वहां आने वाले श्रद्धालुओं को परेशानी नहीं होगी। एसओपी में भीड़ को नियंत्रित करने पर भी खास ध्यान दिया गया है। पूजा समितियों को श्रद्धालुओं की अनुमानित संख्या के हिसाब से पर्याप्त स्वयंसेवक तैनात करने होंगे।
राज्य सरकार के एक अधिकारी ने बताया कि पंडाल के अंदर बहुत ज्यादा भीड़ नहीं होने देनी चाहिए। इसके लिए बाहर इंतजार कर रहे श्रद्धालुओं को तभी अंदर जाने दिया जाना चाहिए, जब अंदर मौजूद श्रद्धालु बाहर निकल जाएं। इससे पंडाल के अंदर भीड़ को बेकाबू होने से रोका जा सकेगा।
स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर क्या निर्देश हैं?
प्रमुख पूजा आयोजनों में एंबुलेंस की व्यवस्था करनी होगी। हर पंडाल में प्राथमिक उपचार की सुविधा भी उपलब्ध करानी होगी।
एसओपी में आग लगने की घटनाओं को रोकने पर भी खास ध्यान दिया गया है। पूजा समितियों को पंडाल के अंदर अग्निशामक यंत्र रखने होंगे। इसके अलावा, आग लगने की स्थिति में अग्निशमन विभाग को भी निर्देश दिए गए हैं। विभाग को यह सुनिश्चित करना होगा कि सूचना मिलने के 15 मिनट के भीतर दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंच जाएं।
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क्या निर्देश दिए गए?
राज्य प्रशासन ने मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की है। इसमें तीन मुख्य बातों पर ध्यान दिया गया है। ये हैं- आग से सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन और पंडाल में रोशनी की व्यवस्था।
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राज्य सरकार के एक अधिकारी ने बताया कि चोरबागान के पंडाल में पूजा की थीम के कारण कम रोशनी रखी गई थी। इससे पंडाल के अंदर भीड़ को संभालने में परेशानी हुई थी। इसी को ध्यान में रखते हुए नए निर्देश दिए गए हैं। सामुदायिक काली पूजा और जगधात्री पूजा समितियों को पंडाल में पर्याप्त रोशनी रखने को कहा गया है।
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समितियों को एक और निर्देश दिया गया है। उन्हें पंडाल के प्रवेश और निकास द्वारों पर भी पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था करनी होगी।
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प्रवेश और निकास द्वार कैसे होने चाहिए?
अधिकारियों ने बताया कि पंडालों के प्रवेश और निकास द्वार पर्याप्त चौड़े होने चाहिए। इससे वहां आने वाले श्रद्धालुओं को परेशानी नहीं होगी। एसओपी में भीड़ को नियंत्रित करने पर भी खास ध्यान दिया गया है। पूजा समितियों को श्रद्धालुओं की अनुमानित संख्या के हिसाब से पर्याप्त स्वयंसेवक तैनात करने होंगे।
राज्य सरकार के एक अधिकारी ने बताया कि पंडाल के अंदर बहुत ज्यादा भीड़ नहीं होने देनी चाहिए। इसके लिए बाहर इंतजार कर रहे श्रद्धालुओं को तभी अंदर जाने दिया जाना चाहिए, जब अंदर मौजूद श्रद्धालु बाहर निकल जाएं। इससे पंडाल के अंदर भीड़ को बेकाबू होने से रोका जा सकेगा।
स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर क्या निर्देश हैं?
प्रमुख पूजा आयोजनों में एंबुलेंस की व्यवस्था करनी होगी। हर पंडाल में प्राथमिक उपचार की सुविधा भी उपलब्ध करानी होगी।
एसओपी में आग लगने की घटनाओं को रोकने पर भी खास ध्यान दिया गया है। पूजा समितियों को पंडाल के अंदर अग्निशामक यंत्र रखने होंगे। इसके अलावा, आग लगने की स्थिति में अग्निशमन विभाग को भी निर्देश दिए गए हैं। विभाग को यह सुनिश्चित करना होगा कि सूचना मिलने के 15 मिनट के भीतर दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंच जाएं।