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Siddharthnagar News: पिता के अत्याचार भी नहीं डिगा सके प्रह्लाद की भक्ति
Mon, 26 Oct 2026 11:06 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Mon, 26 Oct 2026 11:06 PM IST
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- खंभे से प्रकट हुए भगवान नृसिंह, हिरण्यकश्यप का किया अंत
डुमरियागंज। क्षेत्र के बहेरिया गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में रविवार रात कथावाचक आचार्य सतीश मिश्र ने भक्त प्रह्लाद और भगवान नृसिंह के प्राकट्य की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि भगवान के प्रति अटूट विश्वास रखने वाले भक्त की हमेशा रक्षा होती है।
कथा व्यास ने बताया कि दैत्यराज हिरण्यकश्यप चाहता था कि सभी लोग उसकी पूजा करें लेकिन उसके पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु के परम भक्त थे। इससे नाराज होकर हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद को कई तरह की यातनाएं दीं, लेकिन उनकी भक्ति नहीं डिगी।
कथा के अनुसार, हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद से पूछा कि क्या भगवान विष्णु खंभे में भी हैं। प्रह्लाद ने कहा कि भगवान सर्वत्र हैं। इसके बाद हिरण्यकश्यप ने खंभे पर प्रहार किया तो भगवान नृसिंह प्रकट हुए। उन्होंने संध्या के समय देहरी पर हिरण्यकश्यप का वध कर भक्त प्रह्लाद की रक्षा की।
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आचार्य सतीश मिश्र ने कहा कि यह कथा सिखाती है कि अहंकार और अत्याचार का अंत निश्चित है, जबकि सत्य और श्रद्धा की सदैव विजय होती है। उन्होंने श्रद्धालुओं से सदाचार अपनाने और भगवान के प्रति विश्वास बनाए रखने का संदेश दिया।
इस दौरान ज्ञानदास प्रजापति, डॉ. रजनीश, दिलीप पांडेय, चिनमुन यादव, सुरेश गुप्ता और प्रदीप सहित अन्य श्रद्धालु मौजूद रहे।
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डुमरियागंज। क्षेत्र के बहेरिया गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में रविवार रात कथावाचक आचार्य सतीश मिश्र ने भक्त प्रह्लाद और भगवान नृसिंह के प्राकट्य की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि भगवान के प्रति अटूट विश्वास रखने वाले भक्त की हमेशा रक्षा होती है।
कथा व्यास ने बताया कि दैत्यराज हिरण्यकश्यप चाहता था कि सभी लोग उसकी पूजा करें लेकिन उसके पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु के परम भक्त थे। इससे नाराज होकर हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद को कई तरह की यातनाएं दीं, लेकिन उनकी भक्ति नहीं डिगी।
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कथा के अनुसार, हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद से पूछा कि क्या भगवान विष्णु खंभे में भी हैं। प्रह्लाद ने कहा कि भगवान सर्वत्र हैं। इसके बाद हिरण्यकश्यप ने खंभे पर प्रहार किया तो भगवान नृसिंह प्रकट हुए। उन्होंने संध्या के समय देहरी पर हिरण्यकश्यप का वध कर भक्त प्रह्लाद की रक्षा की।
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आचार्य सतीश मिश्र ने कहा कि यह कथा सिखाती है कि अहंकार और अत्याचार का अंत निश्चित है, जबकि सत्य और श्रद्धा की सदैव विजय होती है। उन्होंने श्रद्धालुओं से सदाचार अपनाने और भगवान के प्रति विश्वास बनाए रखने का संदेश दिया।
इस दौरान ज्ञानदास प्रजापति, डॉ. रजनीश, दिलीप पांडेय, चिनमुन यादव, सुरेश गुप्ता और प्रदीप सहित अन्य श्रद्धालु मौजूद रहे।