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Siddharthnagar News: आठ नवंबर को कार्तिक अमावस्या पर मनेगी दिवाली, तैयारियां तेज

Fri, 06 Nov 2026 11:28 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Fri, 06 Nov 2026 11:28 PM IST
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Siddharthnagar News: Diwali to be celebrated on November 8
- गृहस्थों के लिए प्रदोष काल और वृषभ लग्न में पूजन का विशेष योग
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- व्यापारियों के लिए अलग शुभ लग्न, साधकों के लिए महानिशीथ काल में आराधना का विधान
सिद्धार्थनगर। कार्तिक अमावस्या पर आठ नवंबर को दिवाली मनाई जाएगी। मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा के लिए प्रदोष काल को विशेष महत्व दिया गया है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, गृहस्थों के लिए स्थिर वृषभ लग्न में पूजन शुभ माना जाता है। वहीं, व्यापारियों और विशेष साधना करने वाले श्रद्धालुओं के लिए अलग-अलग पूजा काल का महत्व बताया गया है।
ज्योतिषाचार्य पंडित सुशील के अनुसार, कार्तिक अमावस्या आठ नवंबर को सुबह 11:29 बजे शुरू होकर नौ नवंबर को दोपहर 12:31 बजे तक रहेगी। दिवाली पर शाम को प्रदोष काल में मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाएगी। विभिन्न पंचांगों में स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त के अंतर के कारण मुहूर्त में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है। पंचांग की एक गणना के अनुसार, लक्ष्मी पूजन का समय शाम 5:34 से रात 7:30 बजे तक रहेगा।
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स्थिर लग्न में पूजा का विशेष महत्व
ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, वृषभ स्थिर राशि है। इसी कारण प्रदोष काल में वृषभ लग्न के दौरान लक्ष्मी पूजन को गृहस्थों के लिए विशेष शुभ माना जाता है। इस दौरान परिवार के सदस्य एक साथ बैठकर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करते हैं। दीप जलाकर घर में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की जाती है।
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व्यापारियों के लिए अलग पूजा काल
दिवाली पर व्यापारिक प्रतिष्ठानों में भी विशेष पूजा की परंपरा है। व्यापारी मां लक्ष्मी और भगवान गणेश के साथ बहीखातों, तिजोरी और धन रखने के स्थान की पूजा करते हैं। ज्योतिषीय गणना में व्यापारिक प्रतिष्ठानों के लिए कुंभ लग्न का भी उल्लेख मिलता है। इसे कारोबार में उन्नति और आर्थिक स्थिरता की कामना से जोड़ा जाता है।
महानिशीथ काल में साधना का विधान
दिवाली की रात महानिशीथ काल भी विशेष महत्व रखता है। यह समय विशेष रूप से तांत्रिक साधना, मंत्र जाप और रात्रि उपासना करने वाले साधकों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दौरान स्थिर सिंह लग्न में विशेष साधनाओं का विधान बताया गया है। हालांकि, सामान्य गृहस्थों के लिए प्रदोष काल में लक्ष्मी पूजन को प्रमुख माना जाता है।

पूजन सामग्री की खरीदारी तेज
दिवाली नजदीक आते ही बाजारों में पूजन सामग्री की खरीदारी बढ़ गई है। लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमाओं, मिट्टी के दीयों, रूई की बाती, घी, धूप, अगरबत्ती, कमल के फूल, माला और सजावटी सामान की दुकानें सज गई हैं। घरों और प्रतिष्ठानों में साफ-सफाई के साथ पूजा की तैयारियां भी शुरू हो गई हैं।

दिवाली पर इन बातों का रखें ध्यान
पूजा से पहले घर और पूजा स्थल की अच्छी तरह साफ-सफाई करें।
लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमाएं स्थापित कर विधि-विधान से पूजन करें।
पूजा में कमल का फूल, खील-बताशे, धूप, दीप और मिष्ठान शामिल करें।
घर के मुख्य द्वार और आंगन में दीप जलाएं।
दीपक जलाते समय बच्चों को सुरक्षित दूरी पर रखें।
बिजली की झालर और सजावटी लाइट लगाते समय तारों की गुणवत्ता जांचें।
पटाखे जलाने के लिए खुले स्थान का चयन करें और पानी की व्यवस्था रखें।
पूजा के दौरान स्थानीय पंचांग में निर्धारित शुभ मुहूर्त का ध्यान रखें।
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