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Siddharthnagar News: नौगढ़ में गंदा पानी... डुमरियागंज में छह करोड़ पानी में
Wed, 07 Jan 2026 12:09 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Wed, 07 Jan 2026 12:09 AM IST
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शहर के सिसहनिया मोहल्ले में नाली के पास लगा हुआ वाटर सप्लाई कनेक्शन। संवाद
- फोटो : 1
- नगर पालिका और नगर पंचायत में वाॅटर सप्लाई में गड़बड़ी, नीचे पाइपलाइन, ऊपर से नाली बीच से होती है सप्लाई
- बारिश के सीजन में बढ़ जाती है मुसीबत, जगह-जगह पाइपलाइन टूटने से नाली का पानी आता है टोटी में
- शोहरतगढ़, डुमरियागंज, बांसी, बढ़नी और उसका बाजार में भी शुद्ध पेयजल का संकट
सिद्धार्थनगर। इंदौर में सप्लाई की दूषित पानी के पीने से कई लोगों की जान चली गई। वहीं, कई लोग बीमारी की जद में आ गए हैं। जिले में ऐसा होने से इन्कार नहीं किया जा सकता है। नगर पालिका सिद्धार्थनगर के कुछ मोहल्लों के साथ बांसी और शोहरतगढ़ में पानी की टाेटियों में गंदा पानी आने की शिकायत है। कहीं गंदगी के बीच से गुजरे पाइप लाइन से आपूर्ति की जा रही है। वहीं, डुमरियागंज में लोग देसी हैंडपंप पर ही पीने का पानी के लिए निर्भर हैं। छह करोड़ रुपये से अधिक की लागत से टैंक बना, पाइप बिछाई गई, लेकिन वह टूट गई, जिसके 17 साल बाद भी आपूर्ति नहीं शुरू नहीं हो पाई।
जलापूर्ति की हकीकत परखने के लिए संवाद न्यूज एजेंसी ने पड़ताल की तो चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई। जिले में पीने के पानी की सप्लाई व्यवस्था रामभरोसे है। कुछ स्थानों पर लोगों ने कहा कि कई बाल्टी पानी गिराने के बाद साफ पानी आता है। पहले का पानी गंदा होने के कारण पी नहीं सकते हैं। मटमैला होने के कारण जार का पानी खरीदना पड़ता है। कमोबेश ऐसे हालात शोहरतगढ़, बांसी और नौगढ़ नगर पालिका में सामने आया।
शहरी क्षेत्र में शुद्ध पेयजल मुहैया कराने के दावे की यह संवेदनहीन सच है। यह हाल तब है, जब नगर में बारिश के सीजन में दूषित पानी के सेवन से कई लोग डायरिया आदि की जद में आकर कई दिनों तक बीमार रहे। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि अगर समय रहते चेता नहीं गया तो घटनाओं दौर शुरू हो सकता है। पेयजल की लापरवाही सीधे जनस्वास्थ्य पर हमला है। सवाल यह है कि समस्या बढ़ने पर ही क्यों जागते हैं। जिम्मेदार, जरूरत है समय रहते ठोस और स्थायी कदम उठाने की ताकि पानी जीवन दे, बीमारी नहीं।
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जहां बीमार पड़े थे लोग, वहां भी नहीं सुधरी व्यवस्था
नगर पालिका सिद्धार्थनगर में पेयजल व्यवस्था की हकीकत जानने के लिए ऑफिसर्स कॉलोनी में पहुंचे। यहां कांशीराम शहरी आवास योजना में एक हजार से अधिक परिवार निवास करते हैं, लेकिन यहां पानी सप्लाई के हालात बहुत ही खराब है। काॅलोनी में चारों तरफ नालियां बजबजा रही हैं, उसी के बीच से सप्लाई के लिए टोटी निकली हुई है। स्थानीय निवासी रमेश ने जब बात की गई तो उन्होंने बताया कि यह पानी बहुत ही गंदा आता है, दुर्गंध भी रहती है। पीने के लिए पानी खरीदना पड़ता है। कई परिवार तो वही पानी पीने को मजबूर हैं। वहींं, दीनानाथ ने कहा कि पिछले साल कई लोग एकाएक बीमार पड़ गए थे। पेट दर्द और उल्टी, दस्त होने लगा। जब डॉक्टर ने देखा तो कहा कि गंदा पानी के पीने से समस्या हुई है। तबसे कई परिवार के लोग जार का पानी लेना लगा। इसके लिए परिवार के हिसाब से किसी को एक से दो जार लेना पड़ रहा है। हर परिवार पानी के लिए 900 से 1800 रुपये प्रतिमाह खर्च कर रहा है। मोहल्ले के अधिकांश लोगों का यही दर्द रहा।
इसके बाद शहर के सिसहलिया मोहल्ले में पहुंचे। यहां आकाश गौड़ ने बताया कि पानी की सप्लाई बहुत ही गंदा आता है। कई बार आपूर्ति ठप होने के बाद शिकायत हुई, जांच की गई, लेकिन आज भी समस्या का समाधान नहीं कराया जा सका। वहीं, सप्लाई की चेन देखी गई तो चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई। बजबजाती नालियों के बीच टोटी लगी हुई, जिससे लोग पानी लेते हुए नजर आए। ऐसे में आप अंदाजा लगा सकते हैं कि क्या हाल होगा।
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पांच बाल्टी निकलने के बाद आता है साफ पानी
शोहरतगढ़। नगर पंचायत शोहरतगढ़ में कई मुहल्ले हैं। मुहल्लों में पाइपलाइन के माध्यम से पानी आपूर्ति होती है। पाइपलाइन मुहल्ले में बनाए गए नालियों व अन्य गंदे स्थानों से होकर गुजरती है। अगर पाइप लाइन कहीं लीक है तो लोगों के घरों में गंदा पानी पहुंच रहा है। इस पानी के इस्तेमाल से बीमारी फैलने का लोगों डर सता रहा है। मंगलवार को नगर के कई मुहल्ले की पड़ताल में यह सामने आया कि जो पानी पाइपलाइन के जरिये आ रहा है वह शुरू में बहुत बदबू करता है। चार से पांच बाल्टी निकालने के बाद साफ पानी आना शुरू होता है। वह पीने के लायक तब भी नहीं रहता है। यह पानी लोगों कपड़ा धोने सहित आदि कार्यों इस्तेमाल करते हैं। विकास, मनोज, कौशल, चंद्रशेखर आदि ने बताया कि शुद्ध पानी के अलग से बोर करवाया गया है। सप्लाई वाला पानी बहुत गंदा आता है। क्योंकि पाइपलाइन नालियों व गंदे स्थानों से होकर लगाई गई है। पाइपलाइन लीक बहुत जगह है। इसकी वजह से गंदा और बदबूदार पानी टोटी से निकलता है।
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शुद्धता का दावा, पीने योग्य नहीं है पानी
बांसी। कस्बे के अधिकांश हिस्से में दूषित पेयजल आपूर्ति हो रहा है। काफी लोग पीने के लिए इस पानी का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं। कस्बे के सर्राफा मंडी अकबरनगर, शंकरनगर, श्यामनगर, टेकधर नगर, राजेंद्रनगर आदि वार्डों में पानी का कनेक्शन नाली से होकर गुजरा है, जिससे किसी भी कनेक्शन में लीकेज होने पर नाली का गंदे पानी की आपूर्ति होती है। शंकरनगर वार्ड निवासी लल्ला वर्मा ने बताया कि मेरे घर के बगल में सार्वजनिक टोटी लगी है। गंदा पानी आने के कारण इसका प्रयोग नहीं किया जाता है। बार-बार नगर पालिका के जिम्मेदारों से कहने के बाद भी कोई सुधार नहीं हुआ है। अकबरनगर वार्ड में सर्राफा की दुकान करने वाले गोपाल ने बताया कि उनके मकान मालिक ने पानी का कनेक्शन लिया है। उन्होंने कहा कि पानी आपूर्ति शुरू होने पर पहले आधे घंटे गंदा पानी आता है। उसके बाद पानी साफ होता है, इसलिए इसका प्रयोग सिर्फ साफ-सफाई के लिए किया जाता है।
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छह करोड़ खर्च होने के बाद भी नसीब नहीं शुद्ध पेयजल
डुमरियागंज। नगर के लोगों को नगर पंचायत की स्थापना के लगभग 17 वर्षों बाद भी शहरों की तर्ज पर घरों में शुद्ध पेयजल की आपूर्ति शुरू नहीं हो पाई है। पेयजल की इस परियोजना पर करीब छह करोड़ 31 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। संबंधित विभाग के अधिकारी हर बार प्रभावी कदम उठाने और ओवरहेड टैंक से पानी की सुविधा उपलब्ध कराने का वादा करते हैं, मगर फिलहाल अभी तक पेयजल परियोजना पूरी नहीं हो पाई है।
डुमरियागंज नगर के नगर के सुनील कुमार, तुफैल अहमद, संदीप जायसवाल, अमित कुमार आदि ने कहा कि नगर में कई साल पहले ही वाॅटर हेड टैंक (पानी की टंकी) बनकर तैयार हो गई थी। पंप हाउस निर्माण के बाद अगर उन जगहों पर पेयजल योजना सुदृढ़ कर दी जाती तो आधे नगर पंचायत क्षेत्र के पेयजल की समस्या का निस्तारण कर दिया जाता। अधूरी पाइपलाइन को पूरा करके जल्द वाटर सप्लाई शुरू कराई जाए।
ईओ डुमरियागंज सचिन कुमार पटेल ने बताया कि पेयजल परियोजना पूर्व में शुरू हुई थी। मामले में जानकारी ले रहे हैं। अभी तक जल निगम ने वाॅटर सप्लाई परियोजना को नगर पंचायत के हैंडओवर नहीं किया है। मामले में जल निगम को पत्र लिखकर अधूरी पाइपलाइन बिछाने की योजना को पूरा करा कर जल्द नगर में वाटर सप्लाई शुरू कराने के लिए निर्देशित किया जाएगा।
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बोले विशेषज्ञ
अगर नालियों से पाइपलाइन जा रही है तो बहुत ही चिंताजनक है। नालियों का पानी जब पाइपलाइन में मिल जाता है तो उसमें बैक्टीरिया, वायरस और परजीवी तेजी से पनपते हैं। लंबे समय तक ऐसा पानी पीने से बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों में खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इससे डायरिया और पेचिश, टाइफाइड, हैजा (कॉलरा), हेपेटाइटिस ए और ई (पीलिया), त्वचा रोग और पेट के संक्रमण हो सकता है। बच्चों में कुपोषण और विकास में बाधा हो सकती है।
- डॉ. एसके राव, एमडी मेडिसिन
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आम लोगों के लिए सावधानी
विशेषज्ञों के अनुसार
पानी उबालकर या आरओ/फिल्टर से ही पिएं
टंकी और नल की नियमित सफाई करें
गंदे पानी की शिकायत तुरंत नगर निकाय में दर्ज कराएं
बच्चों और बुजुर्गों पर विशेष ध्यान दें
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शहरी क्षेत्रों में शुद्ध जल मुहैया कराने के लिए वाॅटरहेड टैंक निर्माण व सप्लाई पाइप बिछाने का कार्य पूर्ण करने के बाद संबंधित नगर निकाय को हैंडओवर कर दिया जाता है। इसके बाद उस परियोजना के संचालन एवं पानी की गुणवत्ता जांच की जिम्मेदारी संबंधित नगर निकाय की होती है।
- रेहान फारूखी, अधिशासी अभियंता, जल निगम शहरी
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- बारिश के सीजन में बढ़ जाती है मुसीबत, जगह-जगह पाइपलाइन टूटने से नाली का पानी आता है टोटी में
- शोहरतगढ़, डुमरियागंज, बांसी, बढ़नी और उसका बाजार में भी शुद्ध पेयजल का संकट
सिद्धार्थनगर। इंदौर में सप्लाई की दूषित पानी के पीने से कई लोगों की जान चली गई। वहीं, कई लोग बीमारी की जद में आ गए हैं। जिले में ऐसा होने से इन्कार नहीं किया जा सकता है। नगर पालिका सिद्धार्थनगर के कुछ मोहल्लों के साथ बांसी और शोहरतगढ़ में पानी की टाेटियों में गंदा पानी आने की शिकायत है। कहीं गंदगी के बीच से गुजरे पाइप लाइन से आपूर्ति की जा रही है। वहीं, डुमरियागंज में लोग देसी हैंडपंप पर ही पीने का पानी के लिए निर्भर हैं। छह करोड़ रुपये से अधिक की लागत से टैंक बना, पाइप बिछाई गई, लेकिन वह टूट गई, जिसके 17 साल बाद भी आपूर्ति नहीं शुरू नहीं हो पाई।
जलापूर्ति की हकीकत परखने के लिए संवाद न्यूज एजेंसी ने पड़ताल की तो चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई। जिले में पीने के पानी की सप्लाई व्यवस्था रामभरोसे है। कुछ स्थानों पर लोगों ने कहा कि कई बाल्टी पानी गिराने के बाद साफ पानी आता है। पहले का पानी गंदा होने के कारण पी नहीं सकते हैं। मटमैला होने के कारण जार का पानी खरीदना पड़ता है। कमोबेश ऐसे हालात शोहरतगढ़, बांसी और नौगढ़ नगर पालिका में सामने आया।
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शहरी क्षेत्र में शुद्ध पेयजल मुहैया कराने के दावे की यह संवेदनहीन सच है। यह हाल तब है, जब नगर में बारिश के सीजन में दूषित पानी के सेवन से कई लोग डायरिया आदि की जद में आकर कई दिनों तक बीमार रहे। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि अगर समय रहते चेता नहीं गया तो घटनाओं दौर शुरू हो सकता है। पेयजल की लापरवाही सीधे जनस्वास्थ्य पर हमला है। सवाल यह है कि समस्या बढ़ने पर ही क्यों जागते हैं। जिम्मेदार, जरूरत है समय रहते ठोस और स्थायी कदम उठाने की ताकि पानी जीवन दे, बीमारी नहीं।
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नगर पालिका सिद्धार्थनगर में पेयजल व्यवस्था की हकीकत जानने के लिए ऑफिसर्स कॉलोनी में पहुंचे। यहां कांशीराम शहरी आवास योजना में एक हजार से अधिक परिवार निवास करते हैं, लेकिन यहां पानी सप्लाई के हालात बहुत ही खराब है। काॅलोनी में चारों तरफ नालियां बजबजा रही हैं, उसी के बीच से सप्लाई के लिए टोटी निकली हुई है। स्थानीय निवासी रमेश ने जब बात की गई तो उन्होंने बताया कि यह पानी बहुत ही गंदा आता है, दुर्गंध भी रहती है। पीने के लिए पानी खरीदना पड़ता है। कई परिवार तो वही पानी पीने को मजबूर हैं। वहींं, दीनानाथ ने कहा कि पिछले साल कई लोग एकाएक बीमार पड़ गए थे। पेट दर्द और उल्टी, दस्त होने लगा। जब डॉक्टर ने देखा तो कहा कि गंदा पानी के पीने से समस्या हुई है। तबसे कई परिवार के लोग जार का पानी लेना लगा। इसके लिए परिवार के हिसाब से किसी को एक से दो जार लेना पड़ रहा है। हर परिवार पानी के लिए 900 से 1800 रुपये प्रतिमाह खर्च कर रहा है। मोहल्ले के अधिकांश लोगों का यही दर्द रहा।
इसके बाद शहर के सिसहलिया मोहल्ले में पहुंचे। यहां आकाश गौड़ ने बताया कि पानी की सप्लाई बहुत ही गंदा आता है। कई बार आपूर्ति ठप होने के बाद शिकायत हुई, जांच की गई, लेकिन आज भी समस्या का समाधान नहीं कराया जा सका। वहीं, सप्लाई की चेन देखी गई तो चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई। बजबजाती नालियों के बीच टोटी लगी हुई, जिससे लोग पानी लेते हुए नजर आए। ऐसे में आप अंदाजा लगा सकते हैं कि क्या हाल होगा।
पांच बाल्टी निकलने के बाद आता है साफ पानी
शोहरतगढ़। नगर पंचायत शोहरतगढ़ में कई मुहल्ले हैं। मुहल्लों में पाइपलाइन के माध्यम से पानी आपूर्ति होती है। पाइपलाइन मुहल्ले में बनाए गए नालियों व अन्य गंदे स्थानों से होकर गुजरती है। अगर पाइप लाइन कहीं लीक है तो लोगों के घरों में गंदा पानी पहुंच रहा है। इस पानी के इस्तेमाल से बीमारी फैलने का लोगों डर सता रहा है। मंगलवार को नगर के कई मुहल्ले की पड़ताल में यह सामने आया कि जो पानी पाइपलाइन के जरिये आ रहा है वह शुरू में बहुत बदबू करता है। चार से पांच बाल्टी निकालने के बाद साफ पानी आना शुरू होता है। वह पीने के लायक तब भी नहीं रहता है। यह पानी लोगों कपड़ा धोने सहित आदि कार्यों इस्तेमाल करते हैं। विकास, मनोज, कौशल, चंद्रशेखर आदि ने बताया कि शुद्ध पानी के अलग से बोर करवाया गया है। सप्लाई वाला पानी बहुत गंदा आता है। क्योंकि पाइपलाइन नालियों व गंदे स्थानों से होकर लगाई गई है। पाइपलाइन लीक बहुत जगह है। इसकी वजह से गंदा और बदबूदार पानी टोटी से निकलता है।
शुद्धता का दावा, पीने योग्य नहीं है पानी
बांसी। कस्बे के अधिकांश हिस्से में दूषित पेयजल आपूर्ति हो रहा है। काफी लोग पीने के लिए इस पानी का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं। कस्बे के सर्राफा मंडी अकबरनगर, शंकरनगर, श्यामनगर, टेकधर नगर, राजेंद्रनगर आदि वार्डों में पानी का कनेक्शन नाली से होकर गुजरा है, जिससे किसी भी कनेक्शन में लीकेज होने पर नाली का गंदे पानी की आपूर्ति होती है। शंकरनगर वार्ड निवासी लल्ला वर्मा ने बताया कि मेरे घर के बगल में सार्वजनिक टोटी लगी है। गंदा पानी आने के कारण इसका प्रयोग नहीं किया जाता है। बार-बार नगर पालिका के जिम्मेदारों से कहने के बाद भी कोई सुधार नहीं हुआ है। अकबरनगर वार्ड में सर्राफा की दुकान करने वाले गोपाल ने बताया कि उनके मकान मालिक ने पानी का कनेक्शन लिया है। उन्होंने कहा कि पानी आपूर्ति शुरू होने पर पहले आधे घंटे गंदा पानी आता है। उसके बाद पानी साफ होता है, इसलिए इसका प्रयोग सिर्फ साफ-सफाई के लिए किया जाता है।
छह करोड़ खर्च होने के बाद भी नसीब नहीं शुद्ध पेयजल
डुमरियागंज। नगर के लोगों को नगर पंचायत की स्थापना के लगभग 17 वर्षों बाद भी शहरों की तर्ज पर घरों में शुद्ध पेयजल की आपूर्ति शुरू नहीं हो पाई है। पेयजल की इस परियोजना पर करीब छह करोड़ 31 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। संबंधित विभाग के अधिकारी हर बार प्रभावी कदम उठाने और ओवरहेड टैंक से पानी की सुविधा उपलब्ध कराने का वादा करते हैं, मगर फिलहाल अभी तक पेयजल परियोजना पूरी नहीं हो पाई है।
डुमरियागंज नगर के नगर के सुनील कुमार, तुफैल अहमद, संदीप जायसवाल, अमित कुमार आदि ने कहा कि नगर में कई साल पहले ही वाॅटर हेड टैंक (पानी की टंकी) बनकर तैयार हो गई थी। पंप हाउस निर्माण के बाद अगर उन जगहों पर पेयजल योजना सुदृढ़ कर दी जाती तो आधे नगर पंचायत क्षेत्र के पेयजल की समस्या का निस्तारण कर दिया जाता। अधूरी पाइपलाइन को पूरा करके जल्द वाटर सप्लाई शुरू कराई जाए।
ईओ डुमरियागंज सचिन कुमार पटेल ने बताया कि पेयजल परियोजना पूर्व में शुरू हुई थी। मामले में जानकारी ले रहे हैं। अभी तक जल निगम ने वाॅटर सप्लाई परियोजना को नगर पंचायत के हैंडओवर नहीं किया है। मामले में जल निगम को पत्र लिखकर अधूरी पाइपलाइन बिछाने की योजना को पूरा करा कर जल्द नगर में वाटर सप्लाई शुरू कराने के लिए निर्देशित किया जाएगा।
बोले विशेषज्ञ
अगर नालियों से पाइपलाइन जा रही है तो बहुत ही चिंताजनक है। नालियों का पानी जब पाइपलाइन में मिल जाता है तो उसमें बैक्टीरिया, वायरस और परजीवी तेजी से पनपते हैं। लंबे समय तक ऐसा पानी पीने से बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों में खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इससे डायरिया और पेचिश, टाइफाइड, हैजा (कॉलरा), हेपेटाइटिस ए और ई (पीलिया), त्वचा रोग और पेट के संक्रमण हो सकता है। बच्चों में कुपोषण और विकास में बाधा हो सकती है।
- डॉ. एसके राव, एमडी मेडिसिन
आम लोगों के लिए सावधानी
विशेषज्ञों के अनुसार
पानी उबालकर या आरओ/फिल्टर से ही पिएं
टंकी और नल की नियमित सफाई करें
गंदे पानी की शिकायत तुरंत नगर निकाय में दर्ज कराएं
बच्चों और बुजुर्गों पर विशेष ध्यान दें
शहरी क्षेत्रों में शुद्ध जल मुहैया कराने के लिए वाॅटरहेड टैंक निर्माण व सप्लाई पाइप बिछाने का कार्य पूर्ण करने के बाद संबंधित नगर निकाय को हैंडओवर कर दिया जाता है। इसके बाद उस परियोजना के संचालन एवं पानी की गुणवत्ता जांच की जिम्मेदारी संबंधित नगर निकाय की होती है।
- रेहान फारूखी, अधिशासी अभियंता, जल निगम शहरी