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Siddharthnagar News: श्रीकृष्ण की लीलाओं से भाव विभोर हुए श्रद्धालु
Sat, 07 Feb 2026 11:34 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sat, 07 Feb 2026 11:34 PM IST
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औराताल। डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के भलूवाही में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन कथा वाचक विनोद शास्त्री ने श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन किया। कहा धनवान व्यक्ति वही है जो अपने तन, मन, धन से ईश्वर की भक्ति करे। परमात्मा की प्राप्ति सच्चे प्रेम के द्वारा ही संभव हो सकती है। श्रीकृष्ण बाल लीलाओं का वर्णन सुनकर श्रद्धालु भाव विभोर हो गए।
पूतना चरित्र का वर्णन करते हुए कथा वाचक ने बताया कि पूतना राक्षसी ने मारने के लिए बाल कृष्ण को उठा लिया और स्तनपान कराने लगी। श्रीकृष्ण ने स्तनपान करते-करते ही पूतना का वध कर उसका कल्याण किया। माता यशोदा जब भगवान श्रीकृष्ण को पूतना के वक्षस्थल से उठाकर लाती है उसके बाद पंचगव्य, गोमूत्र से भगवान को स्नान कराती है। उन्होंने कहा सभी को गोमाता की सेवा, गायत्री का जाप और गीता का पाठ अवश्य करना चाहिए। गोप बालकों ने जाकर यशोदा माता से शिकायत कर दी। मां तेरे लाला ने माटी खाई है यशोदा माता हाथ में छड़ी लेकर दौड़ी आईं। अच्छा खोल मुख, माता के ऐसा कहने पर श्रीकृष्ण ने अपना मुख खोल दिया। श्रीकृष्ण के मुख खोलते ही मां यशोदा ने देखा कि मुख में चर-अचर संपूर्ण जगत विद्यमान है।
श्रीकृष्ण ने सोचा यदि मैया को यह ज्ञान बना रहता है तो बाललीला हो चुकी। वह मेरी नारायण के रूप में पूजा करेगी। न तो अपनी गोद में बैठाएगी और न ही दूध पिलाएगी और न मारेगी। जिस उद्देश्य के लिए मैं बालक बना, वह तो पूरा ही नहीं होगा। प्रभु कृपा से यशोदा माता तुरंत उस घटना को भूल गईं। कथा के दौरान भक्त भाव विभोर होकर नाचने लगे।
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इस अवसर पर शशि प्रकाश, बाबूराम, दीपक, सिद्धार्थ, आयुषी, प्राची, रुचि, खुशी उपस्थित रहे।
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पूतना चरित्र का वर्णन करते हुए कथा वाचक ने बताया कि पूतना राक्षसी ने मारने के लिए बाल कृष्ण को उठा लिया और स्तनपान कराने लगी। श्रीकृष्ण ने स्तनपान करते-करते ही पूतना का वध कर उसका कल्याण किया। माता यशोदा जब भगवान श्रीकृष्ण को पूतना के वक्षस्थल से उठाकर लाती है उसके बाद पंचगव्य, गोमूत्र से भगवान को स्नान कराती है। उन्होंने कहा सभी को गोमाता की सेवा, गायत्री का जाप और गीता का पाठ अवश्य करना चाहिए। गोप बालकों ने जाकर यशोदा माता से शिकायत कर दी। मां तेरे लाला ने माटी खाई है यशोदा माता हाथ में छड़ी लेकर दौड़ी आईं। अच्छा खोल मुख, माता के ऐसा कहने पर श्रीकृष्ण ने अपना मुख खोल दिया। श्रीकृष्ण के मुख खोलते ही मां यशोदा ने देखा कि मुख में चर-अचर संपूर्ण जगत विद्यमान है।
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श्रीकृष्ण ने सोचा यदि मैया को यह ज्ञान बना रहता है तो बाललीला हो चुकी। वह मेरी नारायण के रूप में पूजा करेगी। न तो अपनी गोद में बैठाएगी और न ही दूध पिलाएगी और न मारेगी। जिस उद्देश्य के लिए मैं बालक बना, वह तो पूरा ही नहीं होगा। प्रभु कृपा से यशोदा माता तुरंत उस घटना को भूल गईं। कथा के दौरान भक्त भाव विभोर होकर नाचने लगे।
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इस अवसर पर शशि प्रकाश, बाबूराम, दीपक, सिद्धार्थ, आयुषी, प्राची, रुचि, खुशी उपस्थित रहे।