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Siddharthnagar News: रुक्मिणी विवाह प्रसंग सुन भाव विभोर हुए श्रद्धालु
Thu, 10 Sep 2026 11:13 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Thu, 10 Sep 2026 11:13 PM IST
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- श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन आचार्य संतोष शुक्ल ने उद्धव संवाद और रुक्मिणी विवाह प्रसंग का किया वर्णन
चिल्हिया। भीमापार के विवेकानंद नगर स्थित आईटीआई कॉलेज परिसर के राधा-कृष्ण मंदिर प्रांगण में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन बृहस्पतिवार शाम कथा वाचक आचार्य संतोष शुक्ल ने उद्धव संवाद और रुक्मिणी विवाह प्रसंग का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने पृथ्वी पर धर्म की स्थापना और मानव कल्याण के लिए अनेक बार अवतार लिया।
कथा के दौरान आचार्य ने बताया कि राजा भीष्मक के घर रुक्मिणी का जन्म हुआ था। बाल्यावस्था से ही वह भगवान श्रीकृष्ण को सच्चे हृदय से अपना पति मानती थीं। हालांकि, भाई उनका विवाह राजा शिशुपाल से कराना चाहते थे। इसकी जानकारी होने पर रुक्मिणी दुखी हो गईं।
आचार्य ने बताया कि रुक्मिणी ने सुदेव नामक ब्राह्मण के माध्यम से श्रीकृष्ण को संदेश भेजा। उन्होंने पत्र में श्रीकृष्ण से उन्हें स्वीकार करने और पार्वती मंदिर में पूजा के लिए आने के समय वहां से ले जाने का आग्रह किया। रुक्मिणी ने कहा कि वह किसी अन्य पुरुष से विवाह नहीं करना चाहतीं और श्रीकृष्ण को ही अपना पति मानती हैं।
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कथा के अनुसार, रुक्मिणी जब पार्वती पूजन के लिए मंदिर पहुंचीं, उसी समय भगवान श्रीकृष्ण उन्हें अपने साथ ले गए। इसके बाद रीति-रिवाज के साथ रुक्मिणी और श्रीकृष्ण का विवाह संपन्न हुआ। रुक्मिणी विवाह का प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भाव विभोर हो गए। भक्तों ने जयकारे लगाए, जिससे कथा स्थल का वातावरण भक्तिमय हो गया।
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चिल्हिया। भीमापार के विवेकानंद नगर स्थित आईटीआई कॉलेज परिसर के राधा-कृष्ण मंदिर प्रांगण में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन बृहस्पतिवार शाम कथा वाचक आचार्य संतोष शुक्ल ने उद्धव संवाद और रुक्मिणी विवाह प्रसंग का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने पृथ्वी पर धर्म की स्थापना और मानव कल्याण के लिए अनेक बार अवतार लिया।
कथा के दौरान आचार्य ने बताया कि राजा भीष्मक के घर रुक्मिणी का जन्म हुआ था। बाल्यावस्था से ही वह भगवान श्रीकृष्ण को सच्चे हृदय से अपना पति मानती थीं। हालांकि, भाई उनका विवाह राजा शिशुपाल से कराना चाहते थे। इसकी जानकारी होने पर रुक्मिणी दुखी हो गईं।
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आचार्य ने बताया कि रुक्मिणी ने सुदेव नामक ब्राह्मण के माध्यम से श्रीकृष्ण को संदेश भेजा। उन्होंने पत्र में श्रीकृष्ण से उन्हें स्वीकार करने और पार्वती मंदिर में पूजा के लिए आने के समय वहां से ले जाने का आग्रह किया। रुक्मिणी ने कहा कि वह किसी अन्य पुरुष से विवाह नहीं करना चाहतीं और श्रीकृष्ण को ही अपना पति मानती हैं।
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कथा के अनुसार, रुक्मिणी जब पार्वती पूजन के लिए मंदिर पहुंचीं, उसी समय भगवान श्रीकृष्ण उन्हें अपने साथ ले गए। इसके बाद रीति-रिवाज के साथ रुक्मिणी और श्रीकृष्ण का विवाह संपन्न हुआ। रुक्मिणी विवाह का प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भाव विभोर हो गए। भक्तों ने जयकारे लगाए, जिससे कथा स्थल का वातावरण भक्तिमय हो गया।