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Siddharthnagar News: कृष्ण-सुदामा की मित्रता का मंचन देखकर भाव विभोर हुए श्रद्धालु
Thu, 17 Sep 2026 11:06 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Thu, 17 Sep 2026 11:06 PM IST
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डुमरियागंज। तहसील क्षेत्र के भड़रिया स्थित श्री सिद्धेश्वरी देवी शक्तिपीठ मंदिर परिसर में नवयुवक रामलीला समिति के तत्वावधान में 14 से 21 सितंबर तक चल रहे गणेश पूजा समारोह में बुधवार रात कृष्ण-सुदामा की मित्रता का मंचन किया गया। कार्यक्रम शाम 8:30 बजे शुरू हुआ। कलाकारों के जीवंत अभिनय ने करीब तीन सौ दर्शकों को भाव विभोर कर दिया।
मंचन में कृष्ण और सुदामा के बचपन की मित्रता, सुदामा की आर्थिक स्थिति खराब होने, पत्नी द्वारा उन्हें बाल सखा श्रीकृष्ण के पास जाने के लिए प्रेरित करने और भेंट में चावल की पोटली देने का प्रसंग प्रस्तुत किया गया। सुदामा पोटली लेकर द्वारका पहुंचे, जहां श्रीकृष्ण के दरबारियों ने उनकी दयनीय स्थिति देखकर उन्हें रोक दिया।
इसकी जानकारी होने पर श्रीकृष्ण स्वयं सुदामा को लेने के लिए दौड़ पड़े और उन्हें गले लगाकर महल में ले आए। श्रीकृष्ण ने सुदामा की चावल की पोटली प्रेमपूर्वक स्वीकार की। इसके बाद सुदामा के घर लौटने और श्रीकृष्ण की कृपा से उनके जीवन में आए बदलाव का प्रसंग भी मंचन किया गया। इस दौरान पंडाल तालियों और जयकारों से गूंज उठा।
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कलाकारों ने मंचन के माध्यम से संदेश दिया कि सच्ची मित्रता धन-दौलत की मोहताज नहीं होती। कृष्ण-सुदामा की मित्रता निस्वार्थ प्रेम, त्याग और समर्पण की मिसाल है। समिति के प्रबंधक डॉ. राजेश गुप्ता ने बताया कि समारोह में प्रतिदिन शाम आठ बजे कार्यक्रम शुरू होता है और करीब तीन सौ दर्शक पहुंच रहे हैं।
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मंचन में कृष्ण और सुदामा के बचपन की मित्रता, सुदामा की आर्थिक स्थिति खराब होने, पत्नी द्वारा उन्हें बाल सखा श्रीकृष्ण के पास जाने के लिए प्रेरित करने और भेंट में चावल की पोटली देने का प्रसंग प्रस्तुत किया गया। सुदामा पोटली लेकर द्वारका पहुंचे, जहां श्रीकृष्ण के दरबारियों ने उनकी दयनीय स्थिति देखकर उन्हें रोक दिया।
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इसकी जानकारी होने पर श्रीकृष्ण स्वयं सुदामा को लेने के लिए दौड़ पड़े और उन्हें गले लगाकर महल में ले आए। श्रीकृष्ण ने सुदामा की चावल की पोटली प्रेमपूर्वक स्वीकार की। इसके बाद सुदामा के घर लौटने और श्रीकृष्ण की कृपा से उनके जीवन में आए बदलाव का प्रसंग भी मंचन किया गया। इस दौरान पंडाल तालियों और जयकारों से गूंज उठा।
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कलाकारों ने मंचन के माध्यम से संदेश दिया कि सच्ची मित्रता धन-दौलत की मोहताज नहीं होती। कृष्ण-सुदामा की मित्रता निस्वार्थ प्रेम, त्याग और समर्पण की मिसाल है। समिति के प्रबंधक डॉ. राजेश गुप्ता ने बताया कि समारोह में प्रतिदिन शाम आठ बजे कार्यक्रम शुरू होता है और करीब तीन सौ दर्शक पहुंच रहे हैं।