{"_id":"6aca7fbddbdf02f27e0ba034","slug":"siddharthnagar-news-childrens-eyesight-weakening-due-to-mobile-phone-addiction-siddharthnagar-news-c-227-1-sdn1035-166218-2026-10-10","type":"story","status":"publish","title_hn":"Siddharthnagar News: मोबाइल की लत से बच्चों की नजर कमजोर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Siddharthnagar News: मोबाइल की लत से बच्चों की नजर कमजोर
Sat, 10 Oct 2026 11:41 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sat, 10 Oct 2026 11:41 PM IST
विज्ञापन
- चिकित्सकों के पास रोज पहुंच रहे 10 से 15 बच्चे, आठ से 10 साल के बच्चों में अधिक शिकायतें
घोसियारी। बच्चों में मोबाइल के बढ़ते इस्तेमाल के बीच कम उम्र में नजर कमजोर होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। घोसियारी में नेत्र रोग विशेषज्ञों की ओपीडी में रोजाना 10 से 15 बच्चे दृष्टिदोष की समस्या लेकर पहुंच रहे हैं। इनमें छह से 18 वर्ष तक के बच्चे शामिल हैं। चिकित्सक के अनुसार, आठ से 10 वर्ष की उम्र के बच्चों में मायोपिया यानी निकट दृष्टि दोष के मामले अधिक मिल रहे हैं।
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. आरएस शुक्ला ने बताया कि उनकी ओपीडी में प्रतिदिन 100 से अधिक मरीज आते हैं। इनमें 10 से 15 बच्चे ऐसे होते हैं, जिन्हें नजर कमजोर होने के कारण चश्मा लगाना पड़ रहा है। लंबे समय तक मोबाइल और अन्य स्क्रीन देखने तथा बाहर खेलने का समय कम होने से बच्चों की आंखों पर असर पड़ सकता है।
अभिभावकों को सावधानी बरतने की जरूरत
डॉ. शुक्ला के अनुसार, कई अभिभावक बच्चों को व्यस्त रखने के लिए मोबाइल दे देते हैं। इससे बच्चे लंबे समय तक स्क्रीन देखते रहते हैं। आंखों से पानी आना, सिरदर्द, आंखों में भारीपन और दूर की वस्तुएं स्पष्ट नहीं दिखना जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में नेत्र विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए। बच्चों के स्क्रीन टाइम को सीमित करने, बीच-बीच में आराम देने और बाहर खेलने के लिए प्रोत्साहित करने की जरूरत है।
विज्ञापन
विज्ञापन
घोसियारी। बच्चों में मोबाइल के बढ़ते इस्तेमाल के बीच कम उम्र में नजर कमजोर होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। घोसियारी में नेत्र रोग विशेषज्ञों की ओपीडी में रोजाना 10 से 15 बच्चे दृष्टिदोष की समस्या लेकर पहुंच रहे हैं। इनमें छह से 18 वर्ष तक के बच्चे शामिल हैं। चिकित्सक के अनुसार, आठ से 10 वर्ष की उम्र के बच्चों में मायोपिया यानी निकट दृष्टि दोष के मामले अधिक मिल रहे हैं।
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. आरएस शुक्ला ने बताया कि उनकी ओपीडी में प्रतिदिन 100 से अधिक मरीज आते हैं। इनमें 10 से 15 बच्चे ऐसे होते हैं, जिन्हें नजर कमजोर होने के कारण चश्मा लगाना पड़ रहा है। लंबे समय तक मोबाइल और अन्य स्क्रीन देखने तथा बाहर खेलने का समय कम होने से बच्चों की आंखों पर असर पड़ सकता है।
विज्ञापन
अभिभावकों को सावधानी बरतने की जरूरत
डॉ. शुक्ला के अनुसार, कई अभिभावक बच्चों को व्यस्त रखने के लिए मोबाइल दे देते हैं। इससे बच्चे लंबे समय तक स्क्रीन देखते रहते हैं। आंखों से पानी आना, सिरदर्द, आंखों में भारीपन और दूर की वस्तुएं स्पष्ट नहीं दिखना जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में नेत्र विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए। बच्चों के स्क्रीन टाइम को सीमित करने, बीच-बीच में आराम देने और बाहर खेलने के लिए प्रोत्साहित करने की जरूरत है।
विज्ञापन