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Siddharthnagar News: पर्यटकों को लुभाएगी, इतिहास भी बताएगी बर्डपुर कोठी

Thu, 23 Oct 2025 11:28 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Thu, 23 Oct 2025 11:28 PM IST
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Siddharthnagar News: Birdpur Kothi will attract tourists and will also tell the history
इसी तरह बनेगा बर्डपुर की कोठी। स्रोत विज्ञ​प्ति
सिद्धार्थनगर। प्राचीन विरासत में शामिल अंग्रेजों की आलीशान बर्डपुर कोठी में भी पर्यटक आ-जा सकेंगे। उन्हें लुभाने के लिए इसे भव्य बनाया जाएगा। नगर पंचायत कपिलवस्तु की देखरेख में यहां पर्यटकीय सुविधाएं विकसित करने के लिए 30 वर्ष के लिए लीज पर दे दिया गया है।
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शर्तों के अनुसार लीज धारक को मूल स्वरूप से बिना छेड़छाड़ किए 3.5 करोड़ रुपये लागत से भव्य स्वरूप देना है। जिला प्रशासन की ओर से जारी नए माॅडल के अनुसार ही मरम्मत और रंगाई-पुताई के बाद इसका संचालन होगा। इससे यहां देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को बेहतर सुविधा मिलेगी।
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जिले में स्थित प्राचीन भवनों का उद्धार कर जिले में पर्यटकीय सुविधाओं को विकसित किया जा रहा है। इसी के तहत डीएम डॉ. राजागणपति आर के निर्देश पर दो हेक्टेयर (15 बीघा) भूमि में स्थित बर्डपुर कोठी का मरम्मत कराने के साथ ही लीज पर देकर संचालित करने की कार्ययोजना बनी थी। इसके बाद नगर पंचायत कपिलवस्तु की ओर से बर्डपुर कोठी को मरम्मत की शर्तों के साथ 30 वर्ष के लिए लीज पर दिया गया है। इसमें पहले पांच वर्ष तक लीज धारक को शुल्क नहीं देना होगा। इसके बाद प्रत्येक वर्ष एक लाख रुपये शुल्क देय होगा।
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जिलाधिकारी की संस्तुति के साथ 20 वर्ष के बाद 10 साल तक किराये में 15 प्रतिशत की वृद्धि के साथ शुल्क लिया जाएगा। लीज धारक किसी दूसरे को इस कार्य के लिए हस्तांतरित नहीं कर सकेगा। कोठी के मूल संरचना में कोई परिवर्तन, नव निर्माण नहीं किया जाएगा केवल मरम्मत कराने की अनुमति होगी। परिसर में लगे पेड़ नहीं काटे जाएंगे।
कभी रहा सत्ता का केंद्र, अब हो चुका खंडहर : बर्डपुर कस्बे का नामकरण आज भी अंग्रेज जमींदार आरएन बर्ड (जो 1829 में गोरखपुर के कमिश्नर थे) के नाम से जाना जाता है। बर्डपुर वास्तव में अंग्रेज जमींदारों की रियासत थी, जिसमें 14 मौजे थे। आज भी इन मौजों को इनके क्रमांक से जाने जाते हैं। बर्डपुर एस्टेट की स्थापना 1832 में की गई थी। जेजे मैकलाचलन इसके जमींदार थे। एक मार्च 1934 में यह संपत्ति डब्लूएफ गिब्बन और के काका को बेच दी। वर्ष 1948 में रियासत का प्रबंध देख रहे एच. गिब्बन की मृत्यु हो गई। तब तक सत्ता का केंद्र रही यह कोठी अब खंडहर में तब्दील हो चुकी है।

वर्तमान में रख-रखाव के अभाव में बर्डपुर कोठी के परिसर में सड़क जर्जर, भवन की दीवार का प्लास्टर, मार्बल, लाॅबी, छत का प्लास्टर उखड़ गया है। नगर पंचायत की तरफ से यहां सड़क का निर्माण होगा, लेकिन मरम्मत कार्य लीज धारक कराएगा।
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