{"_id":"6924a92541f998a3f60e5846","slug":"siddharthnagar-news-bhaye-pragat-kripaladin-dayala-siddharthnagar-news-c-227-1-sgkp1033-148693-2025-11-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"Siddharthnagar News: भये प्रगट कृपाला...दीन दयाला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Siddharthnagar News: भये प्रगट कृपाला...दीन दयाला
Tue, 25 Nov 2025 12:21 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Tue, 25 Nov 2025 12:21 AM IST
विज्ञापन
भनवापुर क्षेत्र के गागापुर में आयोजित श्रीरामलीला का मंचन करते कलाकार। संवाद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
- भनवापुर ब्लॉक क्षेत्र के गागापुर में आयोजित रामलीला के तीसरे दिन हुआ राम जन्म और ताड़का वध का मंचन
भनवापुर। ब्लाॅक क्षेत्र के गागापुर में चल रही रामलीला के तीसरे दिन रविवार की रात कलाकारों ने राम जन्म और विश्वामित्र आगमन की लीला का सजीव मंचन किया। रामलीला को देखने के लिए देर रात तक दर्शकों की भीड़ जुटी रही। दशरथ का चौथा पन आ गया और उन्हें कोई संतान की प्राप्ति नहीं हुई।
उन्हें इस बात की चिंता हुई कि उनके बाद अयोध्या का साम्राज्य कौन संभालेगा। महाराजा दशरथ सलाह के लिए गुरु वशिष्ठ के आश्रम जाते हैं। गुरु वशिष्ठ ने शृंगी ऋषि को बुलवाया, जिन्होंने पुत्र प्राप्ति का यज्ञ करवाया। इससे प्राप्त हव्य को राजा दशरथ ने रानियों में बांटा और उन्हें चार पुत्रों की प्राप्ति हुई। दूसरी ओर जंगल में दुष्ट राक्षस साधु-संतों ऋषि-मुनियों को पूजा पाठ और हवन नहीं करने दे रहे थे। मुनि विश्वामित्र राक्षसों के उत्पात से बहुत परेशान थे। मुनि विश्वामित्र अपने मन में सोचते हैं कि निशाचरों का संहार किस प्रकार होगा। इसके लिए उन्होंने अयोध्या जाकर चक्रवर्ती सम्राट दशरथ के पुत्र राम और लक्ष्मण को मांगने का निश्चय किया।
विश्वामित्र अयोध्या नरेश के दरबार में पहुंचते हैं और राम-लक्ष्मण को अपने साथ ले जाने के लिए मांग करते हैं। शुरुआती हिचक के बाद वशिष्ठ के समझाने पर दशरथ राम और लक्ष्मण को मुनि के साथ भेज देते हैं, जहां रास्ते में ताड़का नाम की निशाचरी का वध करते हैं। राम और लक्ष्मण ऋषि विश्वामित्र के साथ आश्रम में जा कर मुनियों के यज्ञ की रक्षा करते हैं। इस दौरान गजेंद्र शुक्ल, अक्षय शुक्ल, नीलेश शुक्ल, फागू गुप्ता, काली प्रसाद, राजू यादव आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
भनवापुर। ब्लाॅक क्षेत्र के गागापुर में चल रही रामलीला के तीसरे दिन रविवार की रात कलाकारों ने राम जन्म और विश्वामित्र आगमन की लीला का सजीव मंचन किया। रामलीला को देखने के लिए देर रात तक दर्शकों की भीड़ जुटी रही। दशरथ का चौथा पन आ गया और उन्हें कोई संतान की प्राप्ति नहीं हुई।
उन्हें इस बात की चिंता हुई कि उनके बाद अयोध्या का साम्राज्य कौन संभालेगा। महाराजा दशरथ सलाह के लिए गुरु वशिष्ठ के आश्रम जाते हैं। गुरु वशिष्ठ ने शृंगी ऋषि को बुलवाया, जिन्होंने पुत्र प्राप्ति का यज्ञ करवाया। इससे प्राप्त हव्य को राजा दशरथ ने रानियों में बांटा और उन्हें चार पुत्रों की प्राप्ति हुई। दूसरी ओर जंगल में दुष्ट राक्षस साधु-संतों ऋषि-मुनियों को पूजा पाठ और हवन नहीं करने दे रहे थे। मुनि विश्वामित्र राक्षसों के उत्पात से बहुत परेशान थे। मुनि विश्वामित्र अपने मन में सोचते हैं कि निशाचरों का संहार किस प्रकार होगा। इसके लिए उन्होंने अयोध्या जाकर चक्रवर्ती सम्राट दशरथ के पुत्र राम और लक्ष्मण को मांगने का निश्चय किया।
विज्ञापन
विश्वामित्र अयोध्या नरेश के दरबार में पहुंचते हैं और राम-लक्ष्मण को अपने साथ ले जाने के लिए मांग करते हैं। शुरुआती हिचक के बाद वशिष्ठ के समझाने पर दशरथ राम और लक्ष्मण को मुनि के साथ भेज देते हैं, जहां रास्ते में ताड़का नाम की निशाचरी का वध करते हैं। राम और लक्ष्मण ऋषि विश्वामित्र के साथ आश्रम में जा कर मुनियों के यज्ञ की रक्षा करते हैं। इस दौरान गजेंद्र शुक्ल, अक्षय शुक्ल, नीलेश शुक्ल, फागू गुप्ता, काली प्रसाद, राजू यादव आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन