{"_id":"69877f0f868ab73d9802b5bf","slug":"siddharthnagar-news-as-soon-as-lord-rama-was-born-auspicious-songs-and-celebratory-hymns-resonated-in-the-pandal-siddharthnagar-news-c-227-1-sgkp1033-153065-2026-02-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"Siddharthnagar News: भगवान राम का जन्म होते ही पंडाल में गूंजने लगे मंगलगीत और सोहर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Siddharthnagar News: भगवान राम का जन्म होते ही पंडाल में गूंजने लगे मंगलगीत और सोहर
Sat, 07 Feb 2026 11:36 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sat, 07 Feb 2026 11:36 PM IST
विज्ञापन
शाहपुर। क्षेत्र के धनोहरी गांव में आयोजित रामलीला के दूसरे दिन कलाकारों ने भगवान श्रीराम के जन्म और ताड़का वध के प्रसंग का भावपूर्ण मंचन कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। लीला की शुरुआत अयोध्या में दशरथ के यहां पुत्र प्राप्ति की कामना से हुई।
महर्षि वशिष्ठ के निर्देशन में पुत्रेष्टि यज्ञ का आयोजन किया गया, जिसके फलस्वरूप माता कौशल्या के गर्भ से भगवान श्रीराम का अवतार हुआ। राम जन्म के दृश्य के दौरान पूरा पंडाल जय श्रीराम के उद्घोष के बीच मंगलगीत और सोहर से गूंज उठा।
इसके बाद ताड़का वध की लीला का मंचन किया गया। कलाकारों ने बताया कि ताड़का राजा सुकेतु की पुत्री थी, जो महर्षि अगस्त्य के श्राप के कारण राक्षसी बन गई थी। वह अपने पुत्रों के साथ मिलकर ऋषि-मुनियों के यज्ञों को भंग करती थी और मनुष्यों पर अत्याचार करती थी। गुरु विश्वामित्र के आग्रह पर यज्ञ की रक्षा के लिए भगवान श्रीराम वन पहुंचे और ताड़का का अपने धनुष से वध कर धर्म की स्थापना की। लीला मंचन को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
विज्ञापन
इस दौरान अनुराग श्रीवास्तव, मो. हुसेन, जगराम, सहजराम, संदीप गुप्ता, मदन वीरेंद्र मणि, चंद्र शिवधन गुप्ता आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
महर्षि वशिष्ठ के निर्देशन में पुत्रेष्टि यज्ञ का आयोजन किया गया, जिसके फलस्वरूप माता कौशल्या के गर्भ से भगवान श्रीराम का अवतार हुआ। राम जन्म के दृश्य के दौरान पूरा पंडाल जय श्रीराम के उद्घोष के बीच मंगलगीत और सोहर से गूंज उठा।
विज्ञापन
इसके बाद ताड़का वध की लीला का मंचन किया गया। कलाकारों ने बताया कि ताड़का राजा सुकेतु की पुत्री थी, जो महर्षि अगस्त्य के श्राप के कारण राक्षसी बन गई थी। वह अपने पुत्रों के साथ मिलकर ऋषि-मुनियों के यज्ञों को भंग करती थी और मनुष्यों पर अत्याचार करती थी। गुरु विश्वामित्र के आग्रह पर यज्ञ की रक्षा के लिए भगवान श्रीराम वन पहुंचे और ताड़का का अपने धनुष से वध कर धर्म की स्थापना की। लीला मंचन को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
विज्ञापन
इस दौरान अनुराग श्रीवास्तव, मो. हुसेन, जगराम, सहजराम, संदीप गुप्ता, मदन वीरेंद्र मणि, चंद्र शिवधन गुप्ता आदि मौजूद रहे।