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Siddharthnagar News: आय, जाति व निवास के आठ हजार मामले लंबित, वरासत और घरौनी भी फंसी
Fri, 11 Sep 2026 11:25 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Fri, 11 Sep 2026 11:25 PM IST
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- लेखपालों की मांगों को लेकर टकराव का असर अब फरियादियों के काम पर
- तीन दिन के आंदोलन से पड़ताल, अंश निर्धारण समेत अन्य राजस्व प्रकरण लंबित
सिद्धार्थनगर। तीन दिन से चल रहे लेखपालों के धरने के कारण फरियादियों के राजस्व से जुड़े कार्यों पर सीधा असर पड़ रहा है। जिले के पांचों तहसीलों में तैनात 550 लेखपालों की हड़ताल से वरासत के 250 से अधिक मामले लंबित हो गए हैं। वहीं बच्चों की छात्रवृत्ति के लिए आवेदन किए गए 8563 से अधिक आय, जाति व निवास के मामले लंबित है।
इतना ही नहीं एग्रोस्टेक के तहत फसल का खरीफ पड़ताल, घरौनी के नक्शे और अंश निर्धारण कार्य ठप हो गया है। कोर्ट के आदेश समेत अन्य निर्देशों के अनुपालन में होने वाले 150 से अधिक पैमाइश व अन्य राजस्व कार्य भी बाधित हो गए है। हालांकि प्रशासन द्वारा सभी तहसीलों में लेखपालों से जुड़े महत्वपूर्ण राजस्व संबंधी कार्य कानूनगो के सहयोग से निपटाए जाने का दावा किया जा रहा है।
वर्तमान में स्कूलों में बच्चों की छात्रवृत्ति के आवेदन के लिए जरूरी महत्वपूर्ण दस्तावेज में शामिल आय जाति व निवास के लिए सभी पांचों तहसीलों में आवेदन किए गए है। पिछले तीन दिनों से जिले के सभी तहसीलों में धरना दे रहे लेखपालों के कार्य नहीं करने से इनमें रिपोर्ट नहीं लगने से लंबित चल रहे हैं। आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र के लिए आवेदन कर अभिभावक तहसीलों का चक्कर काटते दिख रहे हैं। इटवा तहसील में निवास के पांच सौ मामले, जाति के 350 और आय प्रमाण पत्र के छह सौ से अधिक मामले लंबित है। इसी तरह नौगढ़ में निवास के 760, जाति के 390 और आय के 933 मामले लंबित है।
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डुमरियागंज में निवास के पांच सौ, जाति के 562 और आय के 918 मामले लंबित है। शोहरतगढ़ में निवास के 198, जाति के 345 और आय के 443 मामले लंबित है। वहीं बांसी में निवास के निवास के 265, जाति के 332 व आय प्रमाण पत्र के 667 मामले लंबित है। इसी के साथ तहसील से जुड़े अन्य कार्यों के लिए भी लोग चक्कर काट रहे है लेकिन यहां आने के बाद काम नहीं होने से वह निराश होकर वापस लौट रहे है। लेखपालों के धरना के तीसरे दिन शुक्रवार को जिले के पांचों तहसीलों में पहुंचे फरियादी काम नहीं होने के बाद वापस लौटने को मजबूर रहे। लेखपाल संघ के जिलाध्यक्ष अजय कुमार गुप्ता का कहना है कि समस्याओं के निराकरण के संबंध में प्रशासन से कोई वार्ता नहीं हुई है। शनिवार को बंदी के दिन सभी लेखपाल साथी तहसीलों पर रहेंगे। सोमवार को फिर से मांगों को लेकर कलक्ट्रेट परिसर में धरना दिया जाएगा।
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लेखपाल से नहीं हुआ था कोई र्दुव्यवहार
एसडीएम इटवा संदीप तिवारी का कहना है कि लेखपाल जितेंद्र यादव का स्थानांतरण शोहरतगढ़ के लिए हो गया था। तहसीलदार इटवा ने उच्चाधिकारियों के आदेश के अनुपालन में उन्हें शोहरतगढ़ के लिए रिलीव कर दिया। इसके बाद जीतेंद्र यादव तहसीलदार इटवा के पास छुट्टी के लिए आए तो तहसीलदार इटवा कैलाश नाथ यादव ने मना कर दिया। इसमें विवाद या अभद्र व्यवहार जैसी कोई बात नहीं हुई। जब वह यहां से रिलीव हो गए थे तो फिर यहां से उनको छुट्टी कैसे मिल सकती थी।
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इटवा तहसील आये थे हैसियत प्रमाण पत्र बनवाने के लिए। यहां पता चला कि लेखपाल आंदोलन पर हैं। अब बाद में आना पड़ेगा।
- बाल विनोद तिवारी, ग्राम पेडारी
आय प्रमाण पत्र बनवाना था, यहां आए तो पता चला कि लेखपाल जिले पर धरने में शामिल होने गए हैं। अब बाद में तहसील का चक्कर लगाना पड़ेगा।
- बीएन तिवारी, ऊंचडीह, इटवा
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- तीन दिन के आंदोलन से पड़ताल, अंश निर्धारण समेत अन्य राजस्व प्रकरण लंबित
सिद्धार्थनगर। तीन दिन से चल रहे लेखपालों के धरने के कारण फरियादियों के राजस्व से जुड़े कार्यों पर सीधा असर पड़ रहा है। जिले के पांचों तहसीलों में तैनात 550 लेखपालों की हड़ताल से वरासत के 250 से अधिक मामले लंबित हो गए हैं। वहीं बच्चों की छात्रवृत्ति के लिए आवेदन किए गए 8563 से अधिक आय, जाति व निवास के मामले लंबित है।
इतना ही नहीं एग्रोस्टेक के तहत फसल का खरीफ पड़ताल, घरौनी के नक्शे और अंश निर्धारण कार्य ठप हो गया है। कोर्ट के आदेश समेत अन्य निर्देशों के अनुपालन में होने वाले 150 से अधिक पैमाइश व अन्य राजस्व कार्य भी बाधित हो गए है। हालांकि प्रशासन द्वारा सभी तहसीलों में लेखपालों से जुड़े महत्वपूर्ण राजस्व संबंधी कार्य कानूनगो के सहयोग से निपटाए जाने का दावा किया जा रहा है।
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वर्तमान में स्कूलों में बच्चों की छात्रवृत्ति के आवेदन के लिए जरूरी महत्वपूर्ण दस्तावेज में शामिल आय जाति व निवास के लिए सभी पांचों तहसीलों में आवेदन किए गए है। पिछले तीन दिनों से जिले के सभी तहसीलों में धरना दे रहे लेखपालों के कार्य नहीं करने से इनमें रिपोर्ट नहीं लगने से लंबित चल रहे हैं। आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र के लिए आवेदन कर अभिभावक तहसीलों का चक्कर काटते दिख रहे हैं। इटवा तहसील में निवास के पांच सौ मामले, जाति के 350 और आय प्रमाण पत्र के छह सौ से अधिक मामले लंबित है। इसी तरह नौगढ़ में निवास के 760, जाति के 390 और आय के 933 मामले लंबित है।
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डुमरियागंज में निवास के पांच सौ, जाति के 562 और आय के 918 मामले लंबित है। शोहरतगढ़ में निवास के 198, जाति के 345 और आय के 443 मामले लंबित है। वहीं बांसी में निवास के निवास के 265, जाति के 332 व आय प्रमाण पत्र के 667 मामले लंबित है। इसी के साथ तहसील से जुड़े अन्य कार्यों के लिए भी लोग चक्कर काट रहे है लेकिन यहां आने के बाद काम नहीं होने से वह निराश होकर वापस लौट रहे है। लेखपालों के धरना के तीसरे दिन शुक्रवार को जिले के पांचों तहसीलों में पहुंचे फरियादी काम नहीं होने के बाद वापस लौटने को मजबूर रहे। लेखपाल संघ के जिलाध्यक्ष अजय कुमार गुप्ता का कहना है कि समस्याओं के निराकरण के संबंध में प्रशासन से कोई वार्ता नहीं हुई है। शनिवार को बंदी के दिन सभी लेखपाल साथी तहसीलों पर रहेंगे। सोमवार को फिर से मांगों को लेकर कलक्ट्रेट परिसर में धरना दिया जाएगा।
लेखपाल से नहीं हुआ था कोई र्दुव्यवहार
एसडीएम इटवा संदीप तिवारी का कहना है कि लेखपाल जितेंद्र यादव का स्थानांतरण शोहरतगढ़ के लिए हो गया था। तहसीलदार इटवा ने उच्चाधिकारियों के आदेश के अनुपालन में उन्हें शोहरतगढ़ के लिए रिलीव कर दिया। इसके बाद जीतेंद्र यादव तहसीलदार इटवा के पास छुट्टी के लिए आए तो तहसीलदार इटवा कैलाश नाथ यादव ने मना कर दिया। इसमें विवाद या अभद्र व्यवहार जैसी कोई बात नहीं हुई। जब वह यहां से रिलीव हो गए थे तो फिर यहां से उनको छुट्टी कैसे मिल सकती थी।
इटवा तहसील आये थे हैसियत प्रमाण पत्र बनवाने के लिए। यहां पता चला कि लेखपाल आंदोलन पर हैं। अब बाद में आना पड़ेगा।
- बाल विनोद तिवारी, ग्राम पेडारी
आय प्रमाण पत्र बनवाना था, यहां आए तो पता चला कि लेखपाल जिले पर धरने में शामिल होने गए हैं। अब बाद में तहसील का चक्कर लगाना पड़ेगा।
- बीएन तिवारी, ऊंचडीह, इटवा