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Siddharthnagar News: 205 की जांच में 33 गर्भवतियां उच्च जोखिम वाली
Tue, 09 Dec 2025 11:56 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Tue, 09 Dec 2025 11:56 PM IST
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- भनवापुर के सीएचसी सिरसिया में पीएसएमए के तहत आयोजित हुआ शिविर
भनवापुर। क्षेत्र के सीएचसी सिरसिया में मंगलवार को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत गर्भवतियों के लिए स्वास्थ्य शिविर का आयोजन हुआ। इसमें 205 गर्भवतियों को इलाज व परामर्श दिया गया, जिसमें से 33 गर्भवतियों में उच्च जोखिम के लक्षण पाए गए, 40 गर्भवतियों में खून की कमी होने के कारण आयरन-शुक्रोज की डोज दी गई। अधीक्षक डॉ. शैलेंद्र मणि ओझा ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान उच्च रक्त चाप, मधुमेह, फीटस के बेड़े होने, गंभीर एनिमिया, प्लेसेंटा का विकृत व नीचे होने से गर्भवतियों में जान का खतरा बना रहता है। इसलिए गर्भावस्था के दौरान सोनोग्राफी और चिकित्सीय परामर्श व इलाज बहुत जरूरी है। गर्भावस्था के शुरुआती दिनों में उच्च जोखिम वाले खतरे के लक्षण की पहचान जरूरी है। इससे समय से चिकित्सीय प्रबंधन से जच्चा-बच्चा दोनों को सुरक्षित किया जा सकता है। अधीक्षक ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान उच्च जोखिम के लक्षण पाए जाने पर कम से कम तीन बार चिकित्सीय सलाह जरूरी होता है। इस दौरान डॉ. पीएन पटेल, डॉ. अनवरूद्दीन, ज्योति, प्रेम कुमार त्रिपाठी, अजय कुमार पांडेय, रुपम पाठक आदि शामिल रहे।
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भनवापुर। क्षेत्र के सीएचसी सिरसिया में मंगलवार को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत गर्भवतियों के लिए स्वास्थ्य शिविर का आयोजन हुआ। इसमें 205 गर्भवतियों को इलाज व परामर्श दिया गया, जिसमें से 33 गर्भवतियों में उच्च जोखिम के लक्षण पाए गए, 40 गर्भवतियों में खून की कमी होने के कारण आयरन-शुक्रोज की डोज दी गई। अधीक्षक डॉ. शैलेंद्र मणि ओझा ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान उच्च रक्त चाप, मधुमेह, फीटस के बेड़े होने, गंभीर एनिमिया, प्लेसेंटा का विकृत व नीचे होने से गर्भवतियों में जान का खतरा बना रहता है। इसलिए गर्भावस्था के दौरान सोनोग्राफी और चिकित्सीय परामर्श व इलाज बहुत जरूरी है। गर्भावस्था के शुरुआती दिनों में उच्च जोखिम वाले खतरे के लक्षण की पहचान जरूरी है। इससे समय से चिकित्सीय प्रबंधन से जच्चा-बच्चा दोनों को सुरक्षित किया जा सकता है। अधीक्षक ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान उच्च जोखिम के लक्षण पाए जाने पर कम से कम तीन बार चिकित्सीय सलाह जरूरी होता है। इस दौरान डॉ. पीएन पटेल, डॉ. अनवरूद्दीन, ज्योति, प्रेम कुमार त्रिपाठी, अजय कुमार पांडेय, रुपम पाठक आदि शामिल रहे।