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सिद्धार्थनगर : माफिया पर कार्रवाई, बाबुओं पर रहम
Thu, 27 Apr 2023 01:08 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Thu, 27 Apr 2023 01:08 AM IST
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सिद्धार्थनगर। शिक्षक भर्ती फर्जीवाड़े के मुख्य आरोपी राकेश सिंह पर लगातार कार्रवाई जारी है। शिक्षक से गैंगस्टर बनाए गए माफिया की दो बार में लगभग पांच करोड़ की संपत्ति कुर्क की जा चुकी है। लेकिन माफिया को माफिया बनने में सहयोग करने में शामिल बाबुओं पर विभाग रहम कर रहा है। इस काले कारनामे में एक दर्जन से अधिक बाबू शामिल हैं। इसमें मात्र एक पर धोखाधड़ी का केस दर्ज हुआ है। क्यों इन बाबुओं पर कार्रवाई नहीं हो रही है, इसे लेकर शिक्षा विभाग में और आम लोगों में सवाल है। वहीं विभागीय जिम्मेदार इस पर खामोश हैं।
जिले में वर्ष 2018-19 में बेसिक शिक्षा विभाग में फर्जी दस्तावेज के सहारे नौकरी दिलाने के मामले का भंडाफोड़ हुआ था। इसके बाद मामले की जांच एसटीएफ को मिल गई। जांच में जुटी एसटीएफ ने नेटवर्क को खंगालना शुरू किया तो पता चला इस गिरोह का सरगना देवरिया जनपद के भाटपाररानी थाना क्षेत्र के कुइचवर गांव निवासी राकेश सिंह है। एसटीएफ की टीम ने उसे दबोचा और जेल गया। मामले की जांच जारी है। अब तक 100 अधिक फर्जी शिक्षक पकड़े जा चुके हैं जो दूसरों के दस्तावेज के सहारे नौकरी करते हुए मिले थे। दो बार में माफिया की लगभग पांच करोड़ की संपत्ति की प्रशासन कुर्की की कार्रवाई कर चुका है। माफिया पर लगातार कार्रवाई जारी है। शिक्षा से विभाग से जुड़े लोगों कहना है कि खेल के मुख्य खिलाड़ियों की भूमिका में बाबू रहे।
मोटी कमाई की पर अभी तक कार्रवाई नहीं हो रही है। अबतक के फर्जीवाडे में 12 से अधिक बाबू शामिल रहे हैं। जो उस वक्त भर्ती में थे, लेकिन वर्ष 2020 में एक बाबू पर धोखाधड़ी का केस दर्ज करके उसे जेल भेजा गया था। मौजूदा समय में जमानत पर जेल से बाहर है। और गैर जनपद में कार्यरत हैं। इसके अलावा अन्य बाबुओं पर कार्रवाई नहीं की गई है। इस बात की चर्चा शिक्षा विभाग में जोरों पर हैं। लोगों कहना है कि राकेश सिंह से कम दोषी ये लोग नहीं हैं। अगर सही से जांच हो तो इनकी बेनामी संपत्ति जब्त होगी और जेल जाएंगे। लेकिन ऐसा करने में विभाग क्यों रुचि नहीं ले रहा है यह बड़ा सवाल है।
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भर्ती में पटल के बाबू की भूमिका अहम
शिक्षा विभाग से जुड़े सूत्रों के अनुसार, शिक्षक भर्ती में पटल के बाबू की भूमिका अहम होती है। बाबू को ही पूरी फाइल देखनी होती है। वह मिलान करते हैं। बेरीफिकेशन के लिए भेजते हैं। जब पूरी तरह से संतुष्ट हो जाते हैं, तब फाइल आगे बढ़ती है और नियुक्ति प्रक्रिया शुरू होती है। ऐसे में कैसे कहा जाता है कि इन बाबुओं का रोल नहीं रहा होगा। जब इन्हें ही जांच करने की जिम्मेदारी थी तो कैसे फर्जी दस्तावेज के सहारे भर्ती हो गए। यह बड़ा सवाल हैं और इनके संलिप्त होने का प्रमाण भी।
100 से अधिक शिक्षक बर्खास्त, रिकवरी नहीं
फर्जी दस्तावेज के सहारे नौकरी करने वाले 100 से अधिक शिक्षक पकड़े जा चुके हैं। जिन्हें बर्खास्त कर दिया और उनके खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज करके जेल भेजा गया। अभी तक विभाग की ओर से यह आंकड़ा एकत्र नहीं हो पाया है कि इन्होंने कितना वेतन लिया था। ऐसे में रिकवरी और कुर्की की कार्रवाई कैसे करेंगे यह समझ सकते हैं।
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जिले में वर्ष 2018-19 में बेसिक शिक्षा विभाग में फर्जी दस्तावेज के सहारे नौकरी दिलाने के मामले का भंडाफोड़ हुआ था। इसके बाद मामले की जांच एसटीएफ को मिल गई। जांच में जुटी एसटीएफ ने नेटवर्क को खंगालना शुरू किया तो पता चला इस गिरोह का सरगना देवरिया जनपद के भाटपाररानी थाना क्षेत्र के कुइचवर गांव निवासी राकेश सिंह है। एसटीएफ की टीम ने उसे दबोचा और जेल गया। मामले की जांच जारी है। अब तक 100 अधिक फर्जी शिक्षक पकड़े जा चुके हैं जो दूसरों के दस्तावेज के सहारे नौकरी करते हुए मिले थे। दो बार में माफिया की लगभग पांच करोड़ की संपत्ति की प्रशासन कुर्की की कार्रवाई कर चुका है। माफिया पर लगातार कार्रवाई जारी है। शिक्षा से विभाग से जुड़े लोगों कहना है कि खेल के मुख्य खिलाड़ियों की भूमिका में बाबू रहे।
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मोटी कमाई की पर अभी तक कार्रवाई नहीं हो रही है। अबतक के फर्जीवाडे में 12 से अधिक बाबू शामिल रहे हैं। जो उस वक्त भर्ती में थे, लेकिन वर्ष 2020 में एक बाबू पर धोखाधड़ी का केस दर्ज करके उसे जेल भेजा गया था। मौजूदा समय में जमानत पर जेल से बाहर है। और गैर जनपद में कार्यरत हैं। इसके अलावा अन्य बाबुओं पर कार्रवाई नहीं की गई है। इस बात की चर्चा शिक्षा विभाग में जोरों पर हैं। लोगों कहना है कि राकेश सिंह से कम दोषी ये लोग नहीं हैं। अगर सही से जांच हो तो इनकी बेनामी संपत्ति जब्त होगी और जेल जाएंगे। लेकिन ऐसा करने में विभाग क्यों रुचि नहीं ले रहा है यह बड़ा सवाल है।
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भर्ती में पटल के बाबू की भूमिका अहम
शिक्षा विभाग से जुड़े सूत्रों के अनुसार, शिक्षक भर्ती में पटल के बाबू की भूमिका अहम होती है। बाबू को ही पूरी फाइल देखनी होती है। वह मिलान करते हैं। बेरीफिकेशन के लिए भेजते हैं। जब पूरी तरह से संतुष्ट हो जाते हैं, तब फाइल आगे बढ़ती है और नियुक्ति प्रक्रिया शुरू होती है। ऐसे में कैसे कहा जाता है कि इन बाबुओं का रोल नहीं रहा होगा। जब इन्हें ही जांच करने की जिम्मेदारी थी तो कैसे फर्जी दस्तावेज के सहारे भर्ती हो गए। यह बड़ा सवाल हैं और इनके संलिप्त होने का प्रमाण भी।
100 से अधिक शिक्षक बर्खास्त, रिकवरी नहीं
फर्जी दस्तावेज के सहारे नौकरी करने वाले 100 से अधिक शिक्षक पकड़े जा चुके हैं। जिन्हें बर्खास्त कर दिया और उनके खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज करके जेल भेजा गया। अभी तक विभाग की ओर से यह आंकड़ा एकत्र नहीं हो पाया है कि इन्होंने कितना वेतन लिया था। ऐसे में रिकवरी और कुर्की की कार्रवाई कैसे करेंगे यह समझ सकते हैं।