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Siddharthnagar News: कैंपस से मिली बस की सुविधा, छात्राओं की नहीं छूटेगी कक्षाएं
Fri, 23 Feb 2024 11:06 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Fri, 23 Feb 2024 11:06 PM IST
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सिद्धार्थनगर। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु के कैंपस से बस चलने से नौगढ़ क्षेत्र की 60 से 70 बच्चियां प्रतिदिन पढ़ने जाने लगी हैं। जबकि पहले असुविधा होने के कारण बेटियों को विश्वविद्यालय में पढ़ने जाने में दिक्कत होती थी।
नौगढ़ से सरकारी बस समय से नहीं चलने के कारण बेटियां विश्वविद्यालय में पढ़ने नहीं जा पाती थी। पहले बेटियों को सनई से पढ़ने जाने के लिए तीन जगहों पर ऑटो बदलना पड़ता था। समय भी अधिक लगता था। लौटते समय वाहन नहीं मिलने पर अपने आप को असुरक्षित महसूस करती थीं। बस का संचालन होने से पढ़ने जाने वाली छात्राओं की संख्या बढ़ गई है। जबकि पहले की अपेक्षा किराया भी कम हो गया है। प्राइवेट वाहन से जाने पर दोनों तरफ से लगभग दो सौ से अधिक किराया देना पड़ता था। समय से वाहन भी नहीं मिलता था। बस चलने से पहले 10 से 20 बेटियां ही विश्वविद्यालय जाती थी। लेकिन अब 60 से 70 बेटियां पढ़ने के लिए जाती हैं।
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पहले बस नहीं चलने से विश्वविद्यालय जाने में असुविधा होती थी। अब बस चलने से पढ़ने जाने में आसानी होती है। किसी प्रकार की समस्या भी नहीं होती है। समय से घर पर भी आ जाते हैं।
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-सृष्टि पांडेय, छात्रा
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विश्वविद्यालय जाने के लिए तीन जगहों पर ऑटो बदलना पड़ता था। किराया भी दो सौ रुपया से अधिक लग जाता थी। लेकिन बस का संचालन होने से छात्राओं की संख्या भी बढ़ गई है।
-आकर्षिता त्रिपाठी, छात्रा
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वर्जन
छात्राओं की सुविधा के लिए बसों का संचालन किया जा रहा है। बस चलने से पहले की अपेक्षा पढ़ने आने वाली छात्राओं की संख्या भी बढ़ गई है।
-अमरेंद्र कुमार सिंह, कुलसचिव
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नौगढ़ से सरकारी बस समय से नहीं चलने के कारण बेटियां विश्वविद्यालय में पढ़ने नहीं जा पाती थी। पहले बेटियों को सनई से पढ़ने जाने के लिए तीन जगहों पर ऑटो बदलना पड़ता था। समय भी अधिक लगता था। लौटते समय वाहन नहीं मिलने पर अपने आप को असुरक्षित महसूस करती थीं। बस का संचालन होने से पढ़ने जाने वाली छात्राओं की संख्या बढ़ गई है। जबकि पहले की अपेक्षा किराया भी कम हो गया है। प्राइवेट वाहन से जाने पर दोनों तरफ से लगभग दो सौ से अधिक किराया देना पड़ता था। समय से वाहन भी नहीं मिलता था। बस चलने से पहले 10 से 20 बेटियां ही विश्वविद्यालय जाती थी। लेकिन अब 60 से 70 बेटियां पढ़ने के लिए जाती हैं।
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पहले बस नहीं चलने से विश्वविद्यालय जाने में असुविधा होती थी। अब बस चलने से पढ़ने जाने में आसानी होती है। किसी प्रकार की समस्या भी नहीं होती है। समय से घर पर भी आ जाते हैं।
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-सृष्टि पांडेय, छात्रा
विश्वविद्यालय जाने के लिए तीन जगहों पर ऑटो बदलना पड़ता था। किराया भी दो सौ रुपया से अधिक लग जाता थी। लेकिन बस का संचालन होने से छात्राओं की संख्या भी बढ़ गई है।
-आकर्षिता त्रिपाठी, छात्रा
वर्जन
छात्राओं की सुविधा के लिए बसों का संचालन किया जा रहा है। बस चलने से पहले की अपेक्षा पढ़ने आने वाली छात्राओं की संख्या भी बढ़ गई है।
-अमरेंद्र कुमार सिंह, कुलसचिव