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‘सच्ची भक्ति के वशीभूत होते हैं भगवान’
अमर उजाला ब्यूरो, सिद्धार्थनगर।
Updated Tue, 21 Feb 2017 10:57 PM IST
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पचउथ में श्रीमद्भागवत कथा सुनाते स्वामी आलोकानंद।
- फोटो : Amar Ujala
डुमरियागंज नगर पंचायत के शाहपुर के पचउथ में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन सोमवार को देर रात तक कथा सुनने के लिए पंडाल में श्रोताओं की भीड़ जुटी रही। वृंदावन से आए कथावाचक स्वामी आलोकानंद ने भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का वर्णन किया।
कथा का शुभारंभ भगवान श्रीकृष्ण-राधा की आरती से हुई। स्वामी आलोकानंद ने कहा कि अगर किसी मनुष्य के पास सभी सांसारिक सुख साधन हों, मगर भक्ति भावना न हो तो उसका जीवन निरर्थक रहता है। जिस प्रकार स्त्री बिना आभूषण के सुंदर नहीं दिखती, उसी प्रकार बिना भक्ति मानव जीवन बेकार है। उन्होंने कहा कि भगवान धरती पर भक्तों की रक्षा करने के लिए आते हैं। जब-जब पृथ्वी पर अत्याचार बढ़ा है, तब-तब भगवान अपने भक्तों की रक्षा के खातिर अवतरित हुए हैं।
कहा कि मनुष्य का जीवन समस्याओं का घर है। मोह माया के जाल में फंसकर मनुष्य सांसारिक चिंता में रहता है। सच्ची श्रद्धा और भाव से भगवान की भक्ति सभी मोह माया और चिंताओं के नाश का कारक है। इस दौरान दीपक अग्रहरि, पप्पू यादव, मिथिलेश यादव, बबलू यादव, निखिल, कुसुम अग्रहरि, रामपाल यादव, सोनी, प्रिया अग्रहरि, पुनीत यादव, नीलम, पुष्पा यादव आदि मौजूद रहीं।
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कथा का शुभारंभ भगवान श्रीकृष्ण-राधा की आरती से हुई। स्वामी आलोकानंद ने कहा कि अगर किसी मनुष्य के पास सभी सांसारिक सुख साधन हों, मगर भक्ति भावना न हो तो उसका जीवन निरर्थक रहता है। जिस प्रकार स्त्री बिना आभूषण के सुंदर नहीं दिखती, उसी प्रकार बिना भक्ति मानव जीवन बेकार है। उन्होंने कहा कि भगवान धरती पर भक्तों की रक्षा करने के लिए आते हैं। जब-जब पृथ्वी पर अत्याचार बढ़ा है, तब-तब भगवान अपने भक्तों की रक्षा के खातिर अवतरित हुए हैं।
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कहा कि मनुष्य का जीवन समस्याओं का घर है। मोह माया के जाल में फंसकर मनुष्य सांसारिक चिंता में रहता है। सच्ची श्रद्धा और भाव से भगवान की भक्ति सभी मोह माया और चिंताओं के नाश का कारक है। इस दौरान दीपक अग्रहरि, पप्पू यादव, मिथिलेश यादव, बबलू यादव, निखिल, कुसुम अग्रहरि, रामपाल यादव, सोनी, प्रिया अग्रहरि, पुनीत यादव, नीलम, पुष्पा यादव आदि मौजूद रहीं।
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