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शिक्षामित्रों ने प्रदर्शन किया
अमर उजाला ब्यूरो/सिद्धार्थनगर
Updated Sat, 30 Jan 2016 11:37 PM IST
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शिक्षामित्रों की विभिन्न समस्याओं को लेकर आदर्श शिक्षा मित्र वेलफेयर एसोसिएशन ने शनिवार को कलेक्ट्रेट परिसर में धरना दिया। जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर समस्याओं के समाधान की मांग उठाई।
साथ ही बीएसए के रवैए पर भी आपत्ति जताई। शिक्षामित्रों ने चेतावनी दी कि उत्पीड़न बंद नहीं हुआ तो वह उग्र आंदोलन को मजबूर होंगे।
जिला महामंत्री श्याम बिहारी चौधरी ने कहा कि शिक्षामित्रों की समस्याओं पर वार्ता के लिए 21 दिसंबर को संघ का प्रतिनिधिमंडल बीएसए से उनके कार्यालय में मिलने गया था।
इस दौरान अधिकारी ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया। विरोध करने पर उत्पीड़नात्मक कार्रवाई की जा रही है। कइयों का वेतन रोक दिया गया है।
इसके विरोध में आंदोलन का फैसला लेकर बीएसए को अवगत कराया गया तो संगठन की वैधानिकता के दस्तावेज मांगे गए।
यह दस्तावेज पेश करने की कोशिश की गई तो बीएसए की अनुपस्थिति में लिपिक ने प्राप्त करने से इनकार कर दिया। इस रवैए से साफ जाहिर है कि बीएसए शिक्षामित्रों की समस्याओं के समाधान की बजाए उनका जानबूझकर उत्पीड़न कर रहे हैं।
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प्रथम बैच के अवशेष समायोजित शिक्षकों के 17 और द्वितीय बैच के 9 माह बीतने के बाद भी सत्यापन के अभाव में वेतन भुगतान अटका हुआ है। शीघ्र समस्या का समाधान नहीं हुआ तो कलेक्ट्रेट पर उग्र आंदोलन को बाध्य होंगे।
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साथ ही बीएसए के रवैए पर भी आपत्ति जताई। शिक्षामित्रों ने चेतावनी दी कि उत्पीड़न बंद नहीं हुआ तो वह उग्र आंदोलन को मजबूर होंगे।
जिला महामंत्री श्याम बिहारी चौधरी ने कहा कि शिक्षामित्रों की समस्याओं पर वार्ता के लिए 21 दिसंबर को संघ का प्रतिनिधिमंडल बीएसए से उनके कार्यालय में मिलने गया था।
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इस दौरान अधिकारी ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया। विरोध करने पर उत्पीड़नात्मक कार्रवाई की जा रही है। कइयों का वेतन रोक दिया गया है।
इसके विरोध में आंदोलन का फैसला लेकर बीएसए को अवगत कराया गया तो संगठन की वैधानिकता के दस्तावेज मांगे गए।
यह दस्तावेज पेश करने की कोशिश की गई तो बीएसए की अनुपस्थिति में लिपिक ने प्राप्त करने से इनकार कर दिया। इस रवैए से साफ जाहिर है कि बीएसए शिक्षामित्रों की समस्याओं के समाधान की बजाए उनका जानबूझकर उत्पीड़न कर रहे हैं।
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प्रथम बैच के अवशेष समायोजित शिक्षकों के 17 और द्वितीय बैच के 9 माह बीतने के बाद भी सत्यापन के अभाव में वेतन भुगतान अटका हुआ है। शीघ्र समस्या का समाधान नहीं हुआ तो कलेक्ट्रेट पर उग्र आंदोलन को बाध्य होंगे।