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Siddharthnagar News: नाबालिग लड़की से दुष्कर्म के दोषी को सात साल के कठोर कारावास की सजा
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संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश विशेष न्यायाधीश पाॅक्सो एक्ट वीरेंद्र कुमार ने नाबालिग लड़की से दुष्कर्म करने के आरोपी श्यामू शर्मा को साक्ष्यों के आधार पर दोषी ठहराते हुए सात साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही उसपर दस हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। वह ढेबरुआ थाना क्षेत्र के हसुड़ी उर्फ गजेहड़ी गांव का रहने वाला है।
घटना ढेबरुआ थानाक्षेत्र के एक गांव की है, जो 21 सितंबर 2015 की है। अभियोजन के अनुसार पीड़िता नाबालिग लड़की के पिता ने पुलिस को तहरीर देते हुए कहा कि 21 सितंबर 2015 को समय करीब एक बजे दोपहर में श्यामू उसकी 14 वर्षीय लड़की को शादी कर की नीयत से बहला-फुसलाकर भगा ले गया था। लड़की के पास एक मोबाइल भी है। पुलिस ने नाबालिग लड़की के अपहरण के अपराध में केस दर्ज करके विवेचना किया। विवेचना के बाद दुष्कर्म के एवं पॉस्को एक्ट के अपराध की बढ़ोतरी करके श्यामू शर्मा के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया।
न्यायालय ने मामले का संज्ञान लेकर विचारण शुरू किया। विचारण की समाप्ति पर दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की बहस सुनकर न्यायालय ने पत्रावली का सम्यक अवलोकन किया और साक्ष्यों के आधार पर अभियुक्त को दोषी ठहराया। इसके बाद सजा के बिंदु पर सुनवाई करके दोषी को सात साल के कठोर कारावास की सजा सुनाते हुए उसपर दस हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। पीड़िता की पैरवी राज्य सरकार की तरफ से नियुक्त विशेष लोक अभियोजक ने किया। न्यायालय ने यह भी आदेश दिया कि जुर्माने की राशि का 90 फीसदी पीड़िता को दिया जाए साथ ही पीड़िता को राज्य सरकार से अधिकतम क्षतिपूर्ति प्राप्त करने व उसके पुनर्वास के लिए निर्णय की प्रति डीएलएसए भेजी जाए।
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सिद्धार्थनगर। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश विशेष न्यायाधीश पाॅक्सो एक्ट वीरेंद्र कुमार ने नाबालिग लड़की से दुष्कर्म करने के आरोपी श्यामू शर्मा को साक्ष्यों के आधार पर दोषी ठहराते हुए सात साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही उसपर दस हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। वह ढेबरुआ थाना क्षेत्र के हसुड़ी उर्फ गजेहड़ी गांव का रहने वाला है।
घटना ढेबरुआ थानाक्षेत्र के एक गांव की है, जो 21 सितंबर 2015 की है। अभियोजन के अनुसार पीड़िता नाबालिग लड़की के पिता ने पुलिस को तहरीर देते हुए कहा कि 21 सितंबर 2015 को समय करीब एक बजे दोपहर में श्यामू उसकी 14 वर्षीय लड़की को शादी कर की नीयत से बहला-फुसलाकर भगा ले गया था। लड़की के पास एक मोबाइल भी है। पुलिस ने नाबालिग लड़की के अपहरण के अपराध में केस दर्ज करके विवेचना किया। विवेचना के बाद दुष्कर्म के एवं पॉस्को एक्ट के अपराध की बढ़ोतरी करके श्यामू शर्मा के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया।
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न्यायालय ने मामले का संज्ञान लेकर विचारण शुरू किया। विचारण की समाप्ति पर दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की बहस सुनकर न्यायालय ने पत्रावली का सम्यक अवलोकन किया और साक्ष्यों के आधार पर अभियुक्त को दोषी ठहराया। इसके बाद सजा के बिंदु पर सुनवाई करके दोषी को सात साल के कठोर कारावास की सजा सुनाते हुए उसपर दस हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। पीड़िता की पैरवी राज्य सरकार की तरफ से नियुक्त विशेष लोक अभियोजक ने किया। न्यायालय ने यह भी आदेश दिया कि जुर्माने की राशि का 90 फीसदी पीड़िता को दिया जाए साथ ही पीड़िता को राज्य सरकार से अधिकतम क्षतिपूर्ति प्राप्त करने व उसके पुनर्वास के लिए निर्णय की प्रति डीएलएसए भेजी जाए।
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