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Siddharthnagar News: बिना फिटनेस और परमिट के फर्राटा भर रहे स्कूली वाहन
Thu, 12 Dec 2024 12:16 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Thu, 12 Dec 2024 12:16 PM IST
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बर्डपुर। ब्लॉक क्षेत्र के स्कूलों में बच्चों को लाने-लेजाने के लिए स्कूल प्रबंधन की ओर से लगाए गए वाहनों के फिटनेस परमिट नहीं हैं। फिर भी यह सड़क पर बेखौफ होकर फर्राटा भर रहे हैं। इनको चलाने वाले कई ड्राइवरों के पास लाइसेंस भी नहीं है। मगर वह बिना लाइसेंस के ही तीन और चार पहिया वाहन चला रहे हैं।
स्कूली वाहनों से हादसे होते हैं तो जांच और जागरूकता की बात तो होती है। लेकिन, इस पार काम सिर्फ कागजों में ही होता है। सीमावर्ती क्षेत्र में बिना फिटनेस, परमिट के यह स्कूली वाहन बच्चों की जान जोखिम में डालकर सड़कों पर दौड़ लगा रहे हैं।
लेकिन, कार्रवाई तो दूर अब तक इन पर लगाम कसने के लिए विभाग ने कोई ठोस कदम नहीं उठाए हैं। परिवहन विभाग सिर्फ वाहन संचालकों प्रबंधकों को नोटिस भेजकर कार्रवाई का कोरम पूरा कर ले रहा है।
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क्षेत्र के अनेकों स्कूली वाहन बच्चों को घर से स्कूल लाने और वापस पहुंचाने के कार्य में लगे हैं। स्कूल के अधीन चलने वाले वाहनों के एवज में स्कूल प्रबंधन अभिभावकों से मनमानी फीस भी वसूल करता है। लेकिन, वाहन फिट हैं या नहीं, वाहन के अंदर अग्निशमन यंत्र व फर्स्ट एड बाॅक्स है या नहीं, इसे देखने की जहमत कोई नहीं करता।
इनकी जांच के लिए विभाग जरूर है, लेकिन उनकी जांच-पड़ताल सिर्फ अभियान के दिनों में ही होती है। वाहन ही फिट नहीं तो इसमें बैठने वाले बच्चे कितने सुरक्षित होंगे, इसको आसानी से समझा जा सकता है। यही नहीं बोलेरो, जीप, टेंपो जैसी कुछ प्राइवेट गाड़ियां जो थोड़ा पुरानी हैं और इनका चलन धीरे-धीरे खत्म होता जा रहा है। वह भी इन स्कूलों में धड़ल्ले से बच्चों को लाने-लेजाने के लिए इस्तेमाल की जा रहीं हैं।
विवेक गोस्वामी, सुनील, राकेश, अविनाश चौधरी, केशरी पांडेय, राकेश, बाबूलाल आदि क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि सब सेटिंग का खेल है। जो गाड़ी रोड पर बिना परमिट, फिटनेस के चल रही है, उसके बारे में कौन नहीं जानता है। पुलिस के लोग भी चुप्पी साधे हुए हैं।
इस संबंध में एआरटीओ सुरेश कुमार ने बताया कि नियमित जांच की जाती है और कार्रवाई भी की जाती है।
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स्कूली वाहनों से हादसे होते हैं तो जांच और जागरूकता की बात तो होती है। लेकिन, इस पार काम सिर्फ कागजों में ही होता है। सीमावर्ती क्षेत्र में बिना फिटनेस, परमिट के यह स्कूली वाहन बच्चों की जान जोखिम में डालकर सड़कों पर दौड़ लगा रहे हैं।
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लेकिन, कार्रवाई तो दूर अब तक इन पर लगाम कसने के लिए विभाग ने कोई ठोस कदम नहीं उठाए हैं। परिवहन विभाग सिर्फ वाहन संचालकों प्रबंधकों को नोटिस भेजकर कार्रवाई का कोरम पूरा कर ले रहा है।
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क्षेत्र के अनेकों स्कूली वाहन बच्चों को घर से स्कूल लाने और वापस पहुंचाने के कार्य में लगे हैं। स्कूल के अधीन चलने वाले वाहनों के एवज में स्कूल प्रबंधन अभिभावकों से मनमानी फीस भी वसूल करता है। लेकिन, वाहन फिट हैं या नहीं, वाहन के अंदर अग्निशमन यंत्र व फर्स्ट एड बाॅक्स है या नहीं, इसे देखने की जहमत कोई नहीं करता।
इनकी जांच के लिए विभाग जरूर है, लेकिन उनकी जांच-पड़ताल सिर्फ अभियान के दिनों में ही होती है। वाहन ही फिट नहीं तो इसमें बैठने वाले बच्चे कितने सुरक्षित होंगे, इसको आसानी से समझा जा सकता है। यही नहीं बोलेरो, जीप, टेंपो जैसी कुछ प्राइवेट गाड़ियां जो थोड़ा पुरानी हैं और इनका चलन धीरे-धीरे खत्म होता जा रहा है। वह भी इन स्कूलों में धड़ल्ले से बच्चों को लाने-लेजाने के लिए इस्तेमाल की जा रहीं हैं।
विवेक गोस्वामी, सुनील, राकेश, अविनाश चौधरी, केशरी पांडेय, राकेश, बाबूलाल आदि क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि सब सेटिंग का खेल है। जो गाड़ी रोड पर बिना परमिट, फिटनेस के चल रही है, उसके बारे में कौन नहीं जानता है। पुलिस के लोग भी चुप्पी साधे हुए हैं।
इस संबंध में एआरटीओ सुरेश कुमार ने बताया कि नियमित जांच की जाती है और कार्रवाई भी की जाती है।