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Siddharthnagar News: पराली जलाने पर अंकुश लगाने में नाकाम 46 कर्मियों का रोका वेतन

Mon, 20 Nov 2023 12:46 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Mon, 20 Nov 2023 12:46 AM IST
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salary barred of 46 workers in parali burning
फोटो-
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कृषि उपनिदेशक ने विभागीय कर्मियों की एक वेतन वृद्धि भी रोकी
तहसील, ब्लॉक व न्याय पंचायत में तैनात कर्मियों पर हुई कार्रवाई
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। पराली जलाने की घटना पर अंकुश लगाने में नाकाम रहे 46 अधिकारियों एवं कर्मचारियों का एक माह का वेतन व एक वेतन वृद्धि रोकने के साथ प्रतिकूल प्रविष्टि दी गई है। कृषि उपनिदेशक एके विश्वकर्मा ने तहसील, ब्लॉक व न्याय पंचायत स्तर पर तैनात विभागीय कर्मियों पर कार्रवाई की है। उन्होंने इसके बाद लापरवाही बरतने पर निलंबन की कार्रवाई करने की चेतावनी दी है।
जिले के बांसी, इटवा, डुमरियागंज व शोहरतगढ़ तहसीलों में पांच से अधिक पराली जलाने की घटनाएं होने पर उप कृषि निदेशक ने वरिष्ठ प्राविधिक सहायक गुप-ए अनूप द्विवेदी, संजीव कुमार व संजीव आनंद के विरुद्ध कार्रवाई की है। इसके साथ ही ब्लॉकों में पांच से अधिक पराली जलाने की घटना होने पर एडीओ कृषि बढ़नी मुकेश कुमार गहलोत, डुमरियागंज अभिनव सिंह, भनवापुर सुजीत कुमार, इटवा व खुनियांव योगेंद्र पांडेय, मिठवल हेमंत गुप्ता और खेसरहा के एडीओ कृषि शिवपूजन पर कार्रवाई की है।
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इनके अलावा न्याय पंचायत स्तर पर तैनात कृषि विभाग के कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई की गई है। उप कृषि निदेशक का कहना है कि जिन तहसीलों एवं ब्लॉकों में पांच से अधिक पराली जलाने की घटनाएं हुई हैं, वहां पर तैनात कृषि विभाग के अधिकारियों एवं संबंधित न्याय पंचायत के कर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई की गई है।
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उन्होंने कहा कि पराली जलाने की घटना होने पर मौके पर पहुंचकर तहसील स्तरीय प्रभारी, एडीओ कृषि, न्याय पंचायत प्रभारी व लेखपाल की संयुक्त रिपोर्ट तत्काल देनी होती है।

कृषि विभाग कर्मियों की यह थी जिम्मेदारी
कृषि विभाग की तरफ से पराली जलाने की घटना पर अंकुश लगाने को तहसील, ब्लॉक और न्याय पंचायत स्तर पर प्रभारी नियुक्त किए गए थे। तहसील एवं ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों को न्याय पंचायत स्तर पर तैनात प्रभारी के साथ मिलकर लोगों को पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण और पराली जलाते पकड़े जाने पर जुर्माना व अन्य दंड के बारे में जानकारी देकर जागरूक करना था। साथ ही पराली जलाने की घटना होने पर मौके पर पहुंचकर सत्यापन कर रिपोर्ट भेजने की जिम्मेदारी होती है। उप कृषि निदेशक का कहना है कि इसमें लापरवाही के कारण ही पराली जलाने की घटनाएं हो रही हैं।


61 घटनाएं, 42 पर कार्रवाई व वसूली
जिले में अक्तूबर माह से अब तक पराली जलाने की 61 घटनाएं हुई हैं। इससे 46 गांवों के लोग प्रभावित हुए हैं। जबकि पिछले वर्ष जिले में पराली जलाने की सिर्फ छह घटनाओं की रिपोर्ट हुई थी। इस वर्ष हुईं घटनाओं में 46 मामलों में खेत में धान फसल का अवशेष जलाने और 11 मामलों में कूड़ा जलाने पर पराली जलने की घटनाएं हुई हैं। वहीं, चार मामलों में पराली जली तो थी लेकिन घटना का साक्ष्य नहीं होने से पुष्टि नहीं हो सकी। इन घटनाओं में पराली जलाने वालों पर 1.05 लाख रुपये जुर्माना लगाया गया है, लेकिन अभी वसूली नहीं हो पाई है। जबकि 790 टन पराली एकत्रित कर गोशालाओं में भेजी गई है।
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