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सदर ब्लॉक में ‘तख्ता पलट’!
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
Updated Sat, 20 May 2017 10:45 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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सिद्धार्थनगर। सदर ब्लॉक प्रमुख की कुर्सी डगमगाने लगी है। सूबे में सत्ता परिवर्तन के उपरांत विरोधी खेमे ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। पांच दर्जन से अधिक बीडीसी सदस्यों के समर्थन का दावा करते हुए शनिवार को दूसरे गुट के लोग कलेक्ट्रेट पहुंचे और वे सदस्यों का शपथ पत्र लेकर डीएम के समक्ष पहुंचने की कोशिश में जुटे रहे। लेकिन डीएम के व्यस्त कार्यक्रम के चलते उनकी मंशा साकार नहीं हो सकी। अब सोमवार को एक बार फिर डीएम से मिलने का भरपूर प्रयास करेंगे।
सदर ब्लॉक प्रमुख का चुनाव शुरू से ही चर्चा में रहा है। जिले के 14 ब्लॉकों में सिर्फ सदर सीट ही ऐसी रही है, जिस पर सत्ताधारी सपा ने ऐन वक्त पर घोषित प्रत्याशी से समर्थन वापस ले लिया था। सपा ने यहां पहले संजू सिंह को उम्मीदवार बनाया, लेकिन चुनाव से ठीक पहले समर्थन वापस लेते हुए निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरने का ऐलान किया था। पूरे खेल में शासन-सत्ता में बेहद प्रभावशाली रहे एक माननीय की भूमिका अहम रही थी। उनके प्रभाव का ही असर था कि नगर पालिका अध्यक्ष मो. जमील सिद्दीकी के भाई मो. शफीक यहां से भारी अंतर से ब्लॉक प्रमुख निर्वाचित हुए थे।
उन्हें 55 वोट मिले थे, जबकि निकटतम प्रतिद्वंद्वी संजू सिंह को 28 सदस्यों का समर्थन ही मिल सका।
विधानसभा चुनाव में मो.जमील और शफीक ने सपा छोड़कर बसपा का दामन थाम लिया था। लिहाजा सूबे में सत्ता परिवर्तन के बाद से ही इस पद को लेकर अटकलें शुरू हो गई थीं। विरोधी खेमे ने भी सक्रियता बढ़ा दी थी। शनिवार को संजू सिंह के नेतृत्व में बीडीसी सदस्यों का हुजूम दोपहर करीब 1 बजे कलेक्ट्रेट पहुंचा। पांच दर्जन से अधिक सदस्यों के समर्थन का दावा कर रहीं संजू सिंह ने सदस्यों के शपथ पत्र भी दिखाए। उधर, डीएम के लेखपालों के साथ बैठक में व्यस्तता के कारण संजू सिंह को वापस लौटना पड़ा। संजू सिंह के मुताबिक पांच दर्जन से अधिक सदस्य उनके साथ हैं। गौरतलब है कि सदर ब्लॉक में सदस्यों की संख्या 83 है।
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इस संबंध में डीएम कुणाल सिल्कू का कहना है कि दोपहर बाद से ही लेखपालों के साथ बैठक में था। इस अवधि में लोग मिलने आए हों तो जानकारी नहीं है। पत्रक मिलने के बाद मामला संज्ञान में लेकर समुचित कार्रवाई की जाएगी।
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सदर ब्लॉक प्रमुख का चुनाव शुरू से ही चर्चा में रहा है। जिले के 14 ब्लॉकों में सिर्फ सदर सीट ही ऐसी रही है, जिस पर सत्ताधारी सपा ने ऐन वक्त पर घोषित प्रत्याशी से समर्थन वापस ले लिया था। सपा ने यहां पहले संजू सिंह को उम्मीदवार बनाया, लेकिन चुनाव से ठीक पहले समर्थन वापस लेते हुए निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरने का ऐलान किया था। पूरे खेल में शासन-सत्ता में बेहद प्रभावशाली रहे एक माननीय की भूमिका अहम रही थी। उनके प्रभाव का ही असर था कि नगर पालिका अध्यक्ष मो. जमील सिद्दीकी के भाई मो. शफीक यहां से भारी अंतर से ब्लॉक प्रमुख निर्वाचित हुए थे।
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उन्हें 55 वोट मिले थे, जबकि निकटतम प्रतिद्वंद्वी संजू सिंह को 28 सदस्यों का समर्थन ही मिल सका।
विधानसभा चुनाव में मो.जमील और शफीक ने सपा छोड़कर बसपा का दामन थाम लिया था। लिहाजा सूबे में सत्ता परिवर्तन के बाद से ही इस पद को लेकर अटकलें शुरू हो गई थीं। विरोधी खेमे ने भी सक्रियता बढ़ा दी थी। शनिवार को संजू सिंह के नेतृत्व में बीडीसी सदस्यों का हुजूम दोपहर करीब 1 बजे कलेक्ट्रेट पहुंचा। पांच दर्जन से अधिक सदस्यों के समर्थन का दावा कर रहीं संजू सिंह ने सदस्यों के शपथ पत्र भी दिखाए। उधर, डीएम के लेखपालों के साथ बैठक में व्यस्तता के कारण संजू सिंह को वापस लौटना पड़ा। संजू सिंह के मुताबिक पांच दर्जन से अधिक सदस्य उनके साथ हैं। गौरतलब है कि सदर ब्लॉक में सदस्यों की संख्या 83 है।
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इस संबंध में डीएम कुणाल सिल्कू का कहना है कि दोपहर बाद से ही लेखपालों के साथ बैठक में था। इस अवधि में लोग मिलने आए हों तो जानकारी नहीं है। पत्रक मिलने के बाद मामला संज्ञान में लेकर समुचित कार्रवाई की जाएगी।