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नियम पर नियम : नाबालिग के हाथों में वाहन के स्टीयरिंग..जा रही जान

Fri, 23 Aug 2024 03:03 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Fri, 23 Aug 2024 03:03 AM IST
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Rule after rule: Steering of the vehicle in the hands of a minor...it is costing lives.
सिद्धार्थनगर। सड़क हादसों में मौत का सिलसिला जारी है। आए दिन कोई न कोई हादसे में जान गंवा रहा है। मरने वालों में सर्वाधिक संख्या युवा और किशोर ही हैं। जबकि हादसों को रोकने के लिए शासन ने किशोरों को वाहन बावजूद वाहन देने वाले अभिभावकों पर कार्रवाई करने का निर्देश दिया। नाबालिगों को वाहन की स्टीयरिंग थमाने से अभिभावक चूक नहीं रहे हैं। नतीजा हादसा और जिंदगी भर बेटे को खोने का जख्म मिल रहा है।
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सरकार सड़क हादसों को राेकने के लिए नित नये कानून बना रही है, उसे सख्त कर रही है। जुर्माना राशि कई गुना बढ़ा रही है, जागरूक किया जा रहा है। इसके बाद भी हादसों में कमी आने के बजाए आंकड़ों में इजाफा हो रहा है। हर साल सड़क हादसों में मरने वालों की तादाद बढ़ रही है। मरने वालों में युवा के साथ ही किशोर भी शामिल हैं। नाबालिग वाहन की स्टीयरिंग न पकड़ने पाए, इसके लिए शासन की ओर से नियम लागू किया गया कि अगर किशोर वाहन चलाते हुए पाया जाए तो सीज करने के साथ ही मुकदमा दर्ज किया जाए। इस नियम को सख्ती से लागू किया गया, वाहनों की चेकिंग करने के साथ ही कार्रवाई भी की गई, लेकिन नियम तो ताक पर रखकर चलना आदत से बन गई है। इसी का नजीता है कि डुमरियागंज जैसा हादसा हुआ। डुमरियागंज में कक्षा नौवीं का छात्र बाइक लेकर विद्यालय निकला था। हादसे में उसकी जान चली गई। उसके साथ ही एक और छात्र जख्मी हो गया, जिसकी हालत नाजुक बनी हुई। नियम का लोग कितना पालन कर रहे हैं कि इसकी पड़ताल करने के लिए नगर में निकले तो चौंका देने वाली तस्वीर सामने आई।
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अशोक मार्ग पर दोपहर लगभग दो बजे खड़े थे। इस दौरान कई नाबालिग वाहन लेकर गुजरते हुए दिखे। यह न सिर्फ नियम के खिलाफ वाहन चला रहे थे। हेलमेट भी नहीं लगाए हुए थे। ड्रेस से पता चला कि नगर के विद्यालय में पढ़ते हैं। वहीं लगभग सवा दो बजे उसका मार्ग पर कई किशोर एक और दो सवारी चलते हुए दिखे। वही भी बिना हेलमेट के। ऐसी स्थिति नगर में कई स्थानों पर देखने को मिली। कमोबेश पूरे जिले में यही हाल है। नियम तो ताक पर रखकर अभिभावक किशोर और नाबालिग को वाहन थमा दे रहे हैं। इसके आगे का परिणाम क्या है, इसके बारे में कोई अभिभावक नहीं सोंच रहा है। नजीता हादसे पर हादसे हो रहे हैं।
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500 से अधिक वाहनों का कर चुके हैं चालान
नियम प्रभावी होने के बाद पुलिस लगातार जांच और कार्रवाई कर रही है। आंकड़े बताते हैं कि पुलिस अबतक अभिभावकों को बुलाकर 500 वाहनों का चालान और सीज करने का कार्य कर चुकी है। लगातार कार्रवाई भी कर रही है। लेकिन कार्रवाई का भी लोगों में भय नहीं है और यह जानते हुए भी की हादसा हो जाएगा फिर भी वाहन चलाने के लिए दे दे रहे हैं।

नाबालिग से वाहन चलाते हुए पाए जाने पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। पकड़े जाने पर अभिभावकों को बुलाकर कार्रवाई समझाने के साथ ही कार्रवाई की जाती है। साथ ही प्रेरित भी किया जाता है कि यातायात नियम का पालन करें, बच्चों को गाड़ी चलाने के लिए न दें।
-सर्वेश कुमार यादव, यातायात प्रभारी
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