{"_id":"58d2ce184f1c1b996e1a28cd","slug":"responsibilities-do-not-know-how-many-meat-shops","type":"story","status":"publish","title_hn":"जिम्मेदार नहीं जानते कितनी मीट की दुकानें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जिम्मेदार नहीं जानते कितनी मीट की दुकानें
सिद्धार्थनगर (ब्यूरो)
Updated Thu, 23 Mar 2017 12:48 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सिद्धार्थनगर। जिले में दो स्लाटर हाउस को छोड़ दें तो एक भी मीट की दुकान जिले में पंजीकृत नहीं हैं। जिले भर में सैकड़ों मीट की दुकानें चल रही हैं। बावजूद इसके किसी को भी लाइसेंस नहीं दिया गया। मीट की दुकानों के लिए नगर क्षेत्र में जहां नगर पालिका और नगर पंचायत जिम्मेदार है। वहीं, ग्रामीण क्षेत्र में इसकी जिम्मेदारी जिला पंचायत को मिली हुई है।
बकरे और मुर्गे के मांस की बिक्री जिले में सर्वाधिक है। हर चौक चौराहे पर ऐसी दुकानें संचालित हो रही हैं, जिनके पास कोई लाइसेंस नहीं है। नगर पालिका परिषद सिद्धार्थनगर आठ मीट की दुकानों के पंजीयन की बात तो करता है पर इसकी सूचना पशु चिकित्सा विभाग को नहीं है, जिसके कारण धड़ल्ले से बिना जांच के मुर्गे और बकरे हलाल किए जा रहे हैं। नियम है कि बिना पशु विभाग की जांच के कोई भी जानवर जिले में नहीं काटे जा सकते और न ही उनका मांस बेचा जा सकता है, पर जिले में नियम कानून को ताख पर रख कर कारोबार संचालित हो रहा है। जिला पंचायत के पास महज दो स्लाटर हाउस, जिसमें एक मिठवल के जमुनी में तो दूसरा खेसरहा विकास खंड में संचालित हैं, का पंजीयन है।
ग्रामीण क्षेत्र के हर चौराहों पर मीट की दुकानें चल रही हैं, इन्हें लाइसेंस देने की जिम्मेदारी विभाग की है पर आज तक लाइसेंस देने की जरूरत नहीं समझी गई। जिला पंचायत के अरविंद कुमार की मानें तो जिला पंचायत लाइसेंस देने की प्रक्रिया शुरू कर चुका है पर अभी सूची नहीं तैयार है, जिसके कारण पंजीकृत विक्रेताओं की जानकारी नहीं है यहां स्लाटर हाउस की जानकारी ही अब तक है। नगर पालिका के लिपिक का कहना है कि क्षेत्र में कुल आठ दुकानों को लाइसेंस दिए गए हैं। संबंध में मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. फणीश सिंह का कहना है कि उनके पास सिर्फ जिला पंचायत के दो स्लाटर हाउसों के पंजीयन की जानकारी है। जहां जांच की जाती है। नगर पालिका अथवा नगर पंचायत से कोई सूची न मिलने के कारण अन्य स्थानों पर कोई जांच-पड़ताल नहीं की जाती।
विज्ञापन
विज्ञापन
बकरे और मुर्गे के मांस की बिक्री जिले में सर्वाधिक है। हर चौक चौराहे पर ऐसी दुकानें संचालित हो रही हैं, जिनके पास कोई लाइसेंस नहीं है। नगर पालिका परिषद सिद्धार्थनगर आठ मीट की दुकानों के पंजीयन की बात तो करता है पर इसकी सूचना पशु चिकित्सा विभाग को नहीं है, जिसके कारण धड़ल्ले से बिना जांच के मुर्गे और बकरे हलाल किए जा रहे हैं। नियम है कि बिना पशु विभाग की जांच के कोई भी जानवर जिले में नहीं काटे जा सकते और न ही उनका मांस बेचा जा सकता है, पर जिले में नियम कानून को ताख पर रख कर कारोबार संचालित हो रहा है। जिला पंचायत के पास महज दो स्लाटर हाउस, जिसमें एक मिठवल के जमुनी में तो दूसरा खेसरहा विकास खंड में संचालित हैं, का पंजीयन है।
विज्ञापन
ग्रामीण क्षेत्र के हर चौराहों पर मीट की दुकानें चल रही हैं, इन्हें लाइसेंस देने की जिम्मेदारी विभाग की है पर आज तक लाइसेंस देने की जरूरत नहीं समझी गई। जिला पंचायत के अरविंद कुमार की मानें तो जिला पंचायत लाइसेंस देने की प्रक्रिया शुरू कर चुका है पर अभी सूची नहीं तैयार है, जिसके कारण पंजीकृत विक्रेताओं की जानकारी नहीं है यहां स्लाटर हाउस की जानकारी ही अब तक है। नगर पालिका के लिपिक का कहना है कि क्षेत्र में कुल आठ दुकानों को लाइसेंस दिए गए हैं। संबंध में मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. फणीश सिंह का कहना है कि उनके पास सिर्फ जिला पंचायत के दो स्लाटर हाउसों के पंजीयन की जानकारी है। जहां जांच की जाती है। नगर पालिका अथवा नगर पंचायत से कोई सूची न मिलने के कारण अन्य स्थानों पर कोई जांच-पड़ताल नहीं की जाती।
विज्ञापन