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राहत : शुरू हुई दूरबीन विधि से सर्जरी
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मेडिकल कॉलेज के सर्जरी ओपीडी के बाहर लगी मरीजों की भीड़। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में मंगलवार को दूरबीन विधि (लेप्रोस्कोपिक) से सर्जरी शुरू कर दी गई है। इससे अब मरीजों को गोरखपुर, लखनऊ व निजी अस्पतालों पर दूरबीन से सर्जरी नहीं करानी पड़ेगी।
मंगलवार को जनरल सर्जन डॉ. आशीष त्रिपाठी व उनकी टीम के द्वारा एक मरीज के पित्त की थैली की दूरबीन विधि से सर्जरी की गई। सर्जरी के बाद मरीज काे वार्ड में शिफ्ट किया गया। मरीज स्वास्थ्य है। उसका इलाज चल रहा है। चिकित्सकों ने बताया कि अब सर्जरी के नाम से डरने की जरूरत नहीं। मेडिकल कॉलेज में दूरबीन विधि से ऑपरेशन की शुरुआत हो गई है। इस आधुनिक तकनीक से बिना बड़े चीरे के सर्जरी होगी, जिससे मरीजों को कम दर्द, कम खून बहना और जल्दी स्वस्थ होने का लाभ मिलेगा।
जनरल सर्जरी के विभागाध्यक्ष डॉ. सीबी पांडेय ने बताया कि दूरबीन विधि से की जाने वाली सर्जरी में मरीज को कम समय तक अस्पताल में रहना पड़ता है और संक्रमण का खतरा भी काफी कम होता है। पहले जिन ऑपरेशनों के लिए बड़े शहरों का रुख करना पड़ता था, अब वही इलाज जिले के मरीजों को मेडिकल कॉलेज में होगी।
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सिद्धार्थनगर। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में मंगलवार को दूरबीन विधि (लेप्रोस्कोपिक) से सर्जरी शुरू कर दी गई है। इससे अब मरीजों को गोरखपुर, लखनऊ व निजी अस्पतालों पर दूरबीन से सर्जरी नहीं करानी पड़ेगी।
मंगलवार को जनरल सर्जन डॉ. आशीष त्रिपाठी व उनकी टीम के द्वारा एक मरीज के पित्त की थैली की दूरबीन विधि से सर्जरी की गई। सर्जरी के बाद मरीज काे वार्ड में शिफ्ट किया गया। मरीज स्वास्थ्य है। उसका इलाज चल रहा है। चिकित्सकों ने बताया कि अब सर्जरी के नाम से डरने की जरूरत नहीं। मेडिकल कॉलेज में दूरबीन विधि से ऑपरेशन की शुरुआत हो गई है। इस आधुनिक तकनीक से बिना बड़े चीरे के सर्जरी होगी, जिससे मरीजों को कम दर्द, कम खून बहना और जल्दी स्वस्थ होने का लाभ मिलेगा।
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जनरल सर्जरी के विभागाध्यक्ष डॉ. सीबी पांडेय ने बताया कि दूरबीन विधि से की जाने वाली सर्जरी में मरीज को कम समय तक अस्पताल में रहना पड़ता है और संक्रमण का खतरा भी काफी कम होता है। पहले जिन ऑपरेशनों के लिए बड़े शहरों का रुख करना पड़ता था, अब वही इलाज जिले के मरीजों को मेडिकल कॉलेज में होगी।
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