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धनिष्ठा नक्षत्र में मनाया जाएगा रक्षाबंधन
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धनिष्ठा नक्षत्र में मनाया जाएगा रक्षाबंधन
474 साल बाद बन रहा है ऐसा दुर्लभ संयोग, दिन में भद्रा का भी नहीं रहेगा साया
बहनें शाम 5.32 बजे तक अपने भाइयों की कलाई पर बांध सकेंगी राखी
संवाद न्यूज एजेंसी
डुमरियागंज। रक्षाबंधन इस बार धनिष्ठा नक्षत्र में मनाया जाएगा। यह दुर्लभ संयोग 474 साल बाद बन रहा है। यही नहीं रक्षाबंधन के अवसर पर इस बार शोभन योग बन रहा है। दिन में भद्रा का साया नहीं रहेगा। भद्राकाल 22 अगस्त सुबह 6.17 बजे समाप्त हो जाएगा। इसके बाद बहनें शाम 5.32 बजे तक अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांध सकती हैं।
श्रावण मास की पूर्णिमा को रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाता है। इस बार यह त्योहार 22 अगस्त को मनाया जाएगा। पंडित राकेश शास्त्री के अनुसार इस बार रक्षाबंधन पर शोभन योग सुबह 10.32 बजे तक रहेगा। यह योग मांगलिक कार्यों के लिए बहुत शुभ माना जाता है। रक्षाबंधन का त्योहार श्रवण नक्षत्र में मनाया जाता है, लेकिन इस बार यह सावन पूर्णिमा पर धनिष्ठा नक्षत्र के साथ मनाया जाएगा। शोभन योग भी इस त्योहार को खास बना रहा है। उन्होंने बताया कि रक्षाबंधन पर ग्रहों का ऐसा दुर्लभ संयोग 474 साल बाद बन रहा है। इससे पहले 11 अगस्त 1547 को ग्रहों की ऐसी स्थिति बनी थी। जब धनिष्ठा नक्षत्र में रक्षाबंधन मनाया गया था और सूर्य, मंगल और बुध एक साथ ऐसी स्थिति में आए थे।
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474 साल बाद बन रहा है ऐसा दुर्लभ संयोग, दिन में भद्रा का भी नहीं रहेगा साया
बहनें शाम 5.32 बजे तक अपने भाइयों की कलाई पर बांध सकेंगी राखी
संवाद न्यूज एजेंसी
डुमरियागंज। रक्षाबंधन इस बार धनिष्ठा नक्षत्र में मनाया जाएगा। यह दुर्लभ संयोग 474 साल बाद बन रहा है। यही नहीं रक्षाबंधन के अवसर पर इस बार शोभन योग बन रहा है। दिन में भद्रा का साया नहीं रहेगा। भद्राकाल 22 अगस्त सुबह 6.17 बजे समाप्त हो जाएगा। इसके बाद बहनें शाम 5.32 बजे तक अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांध सकती हैं।
श्रावण मास की पूर्णिमा को रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाता है। इस बार यह त्योहार 22 अगस्त को मनाया जाएगा। पंडित राकेश शास्त्री के अनुसार इस बार रक्षाबंधन पर शोभन योग सुबह 10.32 बजे तक रहेगा। यह योग मांगलिक कार्यों के लिए बहुत शुभ माना जाता है। रक्षाबंधन का त्योहार श्रवण नक्षत्र में मनाया जाता है, लेकिन इस बार यह सावन पूर्णिमा पर धनिष्ठा नक्षत्र के साथ मनाया जाएगा। शोभन योग भी इस त्योहार को खास बना रहा है। उन्होंने बताया कि रक्षाबंधन पर ग्रहों का ऐसा दुर्लभ संयोग 474 साल बाद बन रहा है। इससे पहले 11 अगस्त 1547 को ग्रहों की ऐसी स्थिति बनी थी। जब धनिष्ठा नक्षत्र में रक्षाबंधन मनाया गया था और सूर्य, मंगल और बुध एक साथ ऐसी स्थिति में आए थे।
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