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Siddharthnagar News: उफनाई राप्ती, 250 बीघा फसल डूबी, बांधों पर मंडराया खतरा

Fri, 11 Aug 2023 02:37 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Fri, 11 Aug 2023 02:37 AM IST
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Raging Rapti, 250 bigha crop submerged
पिकौरा वीरपुर मार्ग पर चढा बाढ़ का पानी से होकर जाते लोग
सिद्धार्थनगर। तीन दिन से जिले समेत नेपाल में हो रही बारिश से राप्ती व बूढ़ी राप्ती नदियों का जलस्तर चेतावनी निशान पर पहुंच गया है। राप्ती में उफान से डुमरियागंज क्षेत्र में 250 बीघा फसल जलमग्न हो गई। भनवापुर क्षेत्र के पिकौरा-वीरपुर मार्ग पर बाढ़ का पानी बह रहा है। बांधों पर खतरा मंडरा रहा है। इससे जोगिया, लोटन, उसका, शोहरतगढ़, बांसी और डुमरियागंज क्षेत्र में नदी किनारे स्थित गांव के लोग बाढ़ की आशंका से सहमे हुए हैं।
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जिले में बाढ़ की तबाही मचाने वाली प्रमुख नदियों में शामिल राप्ती नदी का जलस्तर बृहस्पतिवार को उसके चेतावनी स्तर 83.900 के नजदीक पहुंच कर 83.890 मीटर पर बह रही है, यह खतरे के निशान 84.900 मीटर से करीब एक मीटर नीचे है। वहीं, दूसरी प्रमुख नदी बूढ़ी राप्ती नदी चेतावनी स्तर 84.650 मीटर से ऊपर 84.690 मीटर पर बह रही है। जो खतरे के निशान 85.650 मीटर से एक मीटर से भी कम है। इससे फिर से बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। लोगों का कहना है कि पिछले वर्ष सितंबर और अक्तूबर में भयावह बाढ़ आई थी, इस वर्ष भी बाढ़ का खतरा बढ़ रहा है। राप्ती नदी में आए उफान से डुमरियागंज तहसील क्षेत्र व भनवापुर ब्लाक क्षेत्र में वीरपुर एहतमाली, वीरपुर कोहल, पिकौरा, बामदेई, राउतडीला में बृहस्पतिवार को सैकड़ों बीघा धान की फसल डूब गई है। पिकौरा-वीरपुर मार्ग पर करीब तीन फीट पानी चढ़ गया हैं, जिससे लोगों को अपने जरूरी कार्यों के लिए आने जाने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
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कटान व बांध में गैप से सहमे ग्रामीण
भनवापुर क्षेत्र के बामदेई गांव के पास राप्ती के कटान को रोकने के लिए लगाए गए बोल्डर व बालू भरी बोरियाें को राप्ती में विलीन होता देख लोग दहशत में हैं। ग्राम प्रधान के प्रतिनिधि बामदेई अनुराग पांडेय, रामफेर, अंगद, प्रेम नरायण ने बताया कि हर साल बाढ़ के पहले बोल्डर, बालू भरी बोरियां लगा कर कटान रोकने की खानापूरी की जाती है। शाहपुर-भोजपुर बांध का निर्माण समय से हो जाता तो बाढ़ से सुरक्षा मिलती। इस संबंध में एसडीएम डुमरियागंज प्रवेंंद्र कुमार ने कहा कि बाढ़ से अगर किसानों का फसल बाढ़ के पानी में डूब गया है तो इसका सर्वे करा कार्रवाई की जाएगी।
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प्राचीन शिव मंदिर का अस्तित्व खतरे में
डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के वीरपुर एहतमाली गांव के पश्चिम राप्ती के किनारे स्थित प्राचीन शिव मंदिर के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है। गांव के लब्लू, पप्पू, रवि, मानिक ,रामबरन ने बताया कि राप्ती नदी की कटान प्राचीन शिव मंदिर की नींव से करीब चार मीटर तक है, अगर जल्द कटान रोकने के लिए कोई ठोस उपाय नहीं किए गए तो मंदिर नदी में विलीन हो जाएगा।
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परसोहन-मूसा बांध पर मंडरा रहा खतरा
यदि बूढ़ी राप्ती नदी का जलस्तर बढ़ा तो किनारे बने दलपतपुर-परसोहन व परसोहन-मूसा बांध के टूटने का खतरा उत्पन्न हो जाएगा। दलपतपुर, गदाखौवा, बुड्ढी व छगड़िहवा गांव के पास बांध की हालत खस्ता है। इन गांवों के कटान स्थलों के पास कई जगह चूहों के बिल नजर आए। ग्रामीणों का कहना है कि अगर इस बार भी बाढ़ आई तो ये कटान स्थल पानी का दबाव झेल नहीं पाएंगे। डेगहर गांव निवासी अब्दुल रब, बुधई, गदाखौवा गांव निवासी वृजभान, सुनील, बुड्ढी निवासी कैलासी, मोहन, छगड़िहवा निवासी राम भरोसे, उजागिर व मन बहाल ने बताया कि यही कटान स्थल वर्ष 2014 व 2017 में आई बाढ़ से टूट गया था और पूरा इलाका डूब गया था। इस कटान स्थल की कोई स्थाई मरम्मत ही नहीं कराई गई है। ग्रामीणों ने बताया कि बूढ़ी राप्ती में बाढ़ आने से व कटान स्थल टूटने से दलपतपुर, डेगहर, परसोहन, देवीपुर, सिकरा बुजुर्ग, मुडिला, गदाखौवा, बुड्ढी, छगड़िहवा, बैरिहवां, केरवनिया व मुडिलिया समेत कई गांव प्रभावित होते हैं।

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बांध बदहाल, सहमे बाढ़ पीड़ित
राप्ती नदी का जल स्तर दो दिनों से तेजी से बढ़ने से बांसी क्षेत्र में बाढ़ पीड़ित भयभीत है। बांसी नगर में स्थित राप्ती नदी पुल के दक्षिणी पश्चिमी छोरपर स्थित जमींदारी बांध में सैकड़ों रेनकट बन गए हैं, जो सिंचाई विभाग के अभियंताओं के दावों को खारिज कर रहे हैं। राप्ती नदी के दक्षिणी पश्चिमी तट पर स्थित जमींदारी बांध में पहली ही बरसात में सैकड़ों रेनकट हो गए हैं। एक वर्ष पूर्व इस बांध पर मिट्टी पटाई व चौड़ीकरण का कार्य हुआ था। इस वर्ष बरसात होते ही इस बांध की असलियत सामने आ गई है। बांध के किनारे बसे गरगजवा, पिपरहिया, कटहा, रूदलापुर, खरिका सहित एक दर्जन गांवों के लोग चिंतित है। क्षेत्र निवासी सभासद प्रतिनिधि नीलेश निषाद, आकाश, सुरेंद्र, दीपक निषाद, राकेश निषाद का कहना है कि बांध काफी जर्जर है। नदी का जल स्तर पिछले वर्ष की तरह बढ़ा तो बांध नहीं झेल पाएगा। लोगों का कहना है कि यदि इस बांध में कटान हुआ तो एक दर्जन गांव के लोगों का काफी नुकसान होगा।
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नदियां का जलस्तर (मीटर में)



नदी खतरे का स्तर बुधवार बृहस्पतिवार



राप्ती 84.900 83.760 83.890

बूढ़ी राप्ती 85.650 84.120 84.690

कूड़ा 83.520 81.060 81.310

घोघी 87.000 85.30 85.35

बानगंगा 93.420 93.30 93.40

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पिकौरा वीरपुर मार्ग पर चढा बाढ़ का पानी से होकर जाते लोग

पिकौरा वीरपुर मार्ग पर चढा बाढ़ का पानी से होकर जाते लोग

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