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क्वारंटीन हॉउस बने, जिन्हें रखना था वह गायब
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भनव ापुर क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय गनवरिया खुर्द में बने क्वारंटीन रूम में लगा ताला।
- फोटो : SIDDHARTHNAGAR
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क्वारंटीन हॉउस बने, जिन्हें रखना था वह लापता
ग्राम पंचायत के स्कूलों में बनाए गए क्वारंटीन रूम बेमतलब
बाहर से आए लोग नाश्ता व भोजन के अभाव में रहते हैं घर
अमर उजाला ब्यूरो
मन्नीजोत (सिद्धार्थनगर)। कोरोना वायरस से कोई संक्रमित न हो इसलिए गांव स्तर पर क्वारंटीन हॉउस बनाया गया है। महानगरों से आए हुए लोगों को उसी में रखना है। मगर यह क्वारंटीन हाउस बेमतलब साबित हो रहे हैं। कारण जिनके लिए बनाया गया, वह बेहिचक अपने घरों पर आ और जा रहे हैं। वहीं कुछ तो घरों से पर ही वहां गए ही नहीं। ऐसे में संक्रमित होने का खतरा बढ़ रहा है।
कोरोना वायरस का प्रकोप तेजी से फैल रहा है। बचाव ही इसकी दवा है। ऐसे में इस महामारी से बचने के लिए सरकार ने स्कूलों, पंचायत भवनों और सामुदायिक भवन को क्वारंटीन हाउस बनाया गया। 28 मार्च के बाद महानगरों से गांवों में लौटने वालों को 14 दिनों के लिए क्वारंटीन में रखा जाना है। मगर जागरूकता का अभाव लोगों पर भारी पड़ रहा है। कारण जिन लोगों को क्वारंटीन में रखा जाना है, वह संक्रमण से बेफ्रिक हैं। कहीं-कहीं हाउस तो बना दिए गए, लेकिन कोई रहने को तैयार नहीं हैं। वहीं कुछ स्थानों पर तो ऐसा भी देखने को मिल रहा है कि लोग अपने घरों पर खा रहे हैं। अपने परिवार के बीच में रह रहे हैं। साथ ही लोगों से मेलमिलाप भी जारी है। भनवापुर ब्लॉक क्षेत्र के ग्राम पंचायत गनवरिया बुजुर्ग, गनवरिया खुर्द में पिछले तीन दिनों में 21 लोग बाहर से आए हैं। जिनको क्वारंटीन हाउस के रूप बनाया गया। प्राथमिक विद्यालय में रहना था। प्राथमिक स्कूल गनवरिया खुर्द में बाहर से आए 12 लोगों के लिए ग्राम प्रधान द्वारा केवल नौ चारपाई व बिस्तर का प्रबंध करने के साथ ही अपनी जिम्मेदारी को समाप्त मान लिया। भोजन और नाश्ते की व्यवस्था ना होने के कारण बाहर से आए 12 लोग सुबह अपने घर जाकर स्नान व चाय नाश्ता और दोपहर का भोजन कर पुन: स्कूल के क्वारंटीन रूम में आ गए। बाहर से आए लोगों में हरिपाल, शिवकुमार, गोली, राजू गौतम, राजेंद्र आदि ने बताया कि हमारे ग्राम प्रधान करीब छह महीने से मुंबई में व्यापार कर रहे हैं। कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। हम लोग बिना भोजन व नाश्ता पानी के कितना दिन रह सकते हैं। वहीं प्राथमिक विद्यालय गनवरिया बुजुर्ग में बाहर से आए नौ लोगों में सभी ने बताया कि कल से हम लोगों को नाश्ता और भोजन आदि कुछ नहीं दिया गया। खुद हम लोग बिस्किट के सहारे 24 घंटे से अपना समय व्यतीत कर रहे हैं। एसडीएम डुमरियागंज त्रिभुवन ने बताया कि इस तरह का मामला अगर है तो गलत है। इसके लिए जिम्मेदारी संबंधित थानाध्यक्ष को दी गई है। मामले की जांच की जाएगी, इसके बाद उचित कार्रवाई की जाएगी।
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ग्राम पंचायत के स्कूलों में बनाए गए क्वारंटीन रूम बेमतलब
बाहर से आए लोग नाश्ता व भोजन के अभाव में रहते हैं घर
अमर उजाला ब्यूरो
मन्नीजोत (सिद्धार्थनगर)। कोरोना वायरस से कोई संक्रमित न हो इसलिए गांव स्तर पर क्वारंटीन हॉउस बनाया गया है। महानगरों से आए हुए लोगों को उसी में रखना है। मगर यह क्वारंटीन हाउस बेमतलब साबित हो रहे हैं। कारण जिनके लिए बनाया गया, वह बेहिचक अपने घरों पर आ और जा रहे हैं। वहीं कुछ तो घरों से पर ही वहां गए ही नहीं। ऐसे में संक्रमित होने का खतरा बढ़ रहा है।
कोरोना वायरस का प्रकोप तेजी से फैल रहा है। बचाव ही इसकी दवा है। ऐसे में इस महामारी से बचने के लिए सरकार ने स्कूलों, पंचायत भवनों और सामुदायिक भवन को क्वारंटीन हाउस बनाया गया। 28 मार्च के बाद महानगरों से गांवों में लौटने वालों को 14 दिनों के लिए क्वारंटीन में रखा जाना है। मगर जागरूकता का अभाव लोगों पर भारी पड़ रहा है। कारण जिन लोगों को क्वारंटीन में रखा जाना है, वह संक्रमण से बेफ्रिक हैं। कहीं-कहीं हाउस तो बना दिए गए, लेकिन कोई रहने को तैयार नहीं हैं। वहीं कुछ स्थानों पर तो ऐसा भी देखने को मिल रहा है कि लोग अपने घरों पर खा रहे हैं। अपने परिवार के बीच में रह रहे हैं। साथ ही लोगों से मेलमिलाप भी जारी है। भनवापुर ब्लॉक क्षेत्र के ग्राम पंचायत गनवरिया बुजुर्ग, गनवरिया खुर्द में पिछले तीन दिनों में 21 लोग बाहर से आए हैं। जिनको क्वारंटीन हाउस के रूप बनाया गया। प्राथमिक विद्यालय में रहना था। प्राथमिक स्कूल गनवरिया खुर्द में बाहर से आए 12 लोगों के लिए ग्राम प्रधान द्वारा केवल नौ चारपाई व बिस्तर का प्रबंध करने के साथ ही अपनी जिम्मेदारी को समाप्त मान लिया। भोजन और नाश्ते की व्यवस्था ना होने के कारण बाहर से आए 12 लोग सुबह अपने घर जाकर स्नान व चाय नाश्ता और दोपहर का भोजन कर पुन: स्कूल के क्वारंटीन रूम में आ गए। बाहर से आए लोगों में हरिपाल, शिवकुमार, गोली, राजू गौतम, राजेंद्र आदि ने बताया कि हमारे ग्राम प्रधान करीब छह महीने से मुंबई में व्यापार कर रहे हैं। कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। हम लोग बिना भोजन व नाश्ता पानी के कितना दिन रह सकते हैं। वहीं प्राथमिक विद्यालय गनवरिया बुजुर्ग में बाहर से आए नौ लोगों में सभी ने बताया कि कल से हम लोगों को नाश्ता और भोजन आदि कुछ नहीं दिया गया। खुद हम लोग बिस्किट के सहारे 24 घंटे से अपना समय व्यतीत कर रहे हैं। एसडीएम डुमरियागंज त्रिभुवन ने बताया कि इस तरह का मामला अगर है तो गलत है। इसके लिए जिम्मेदारी संबंधित थानाध्यक्ष को दी गई है। मामले की जांच की जाएगी, इसके बाद उचित कार्रवाई की जाएगी।
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