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Siddharthnagar News: ग्रामीण क्षेत्रों में खुलने लगी निजी लाइब्रेरी, पढ़ाई में बढ़ा रुझान

Thu, 19 Sep 2024 11:20 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 19 Sep 2024 11:20 PM IST
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Private libraries started opening in rural areas, interest in studies increased
-जिले में कई स्थानों पर लाइब्रेरी खुलने से युवाओं को पढ़ने में मिल रही सुविधा
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-घर से नजदीक लाइब्रेरी की सुविधा होने से युवा निजी लाइब्रेरी के तरफ कर रहे रुख
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। पढ़ने और पढ़ाने का शौक रखने वालों विद्यार्थियों को निजी लाइब्रेरी खूब भा रही है। जिले में इकलौती सरकारी लाइब्रेरी होने से ग्रामीण स्तर पर खुल रही प्राइवेट लाइब्रेरी की तरफ पढ़ाई को लेकर छात्रों का रुझान बढ़ रहा है। निजी लाइब्रेरी काफी बेहतर हैं। जिले में अभी तक लगभग 15 से अधिक निजी लाइब्रेरी हैं। जहां युवा बैठकर प्रतियोगी परीक्षा सहित अन्य कक्षाओं के पाठ्यक्रम की तैयारी कर रहे हैं।
शांत माहौल और इंटरनेट की बेहतर कनेक्टिविटी उन्हें अपनी ओर खींच रही है। जिले के विभिन्न कस्बों में खुल रही निजी लाइब्रेरी में छात्रों को सुविधाएं भी बेहतर दी जा रही हैं। छात्र निजी लाइब्रेरी में पढ़ने के लिए किताबें, न्यूज पेपर, करेंट अफेयर्स सहित कई नई जानकारियां पा रहे हैं, जबकि निजी लाइब्रेरी में छात्रों के घर से भी कम दूरी पर पड़ रही है। इससे छात्र जिले में खुल रही प्राइवेट लाइब्रेरी के तरफ ज्यादा रुख कर रहे हैं। वहीं जिले में मात्र एक ही सरकारी लाइब्रेरी है, जो जिला मुख्यालय पर है।
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ऐसे में शोहरतगढ़, बांसी, इटवा व डुमरियागंज के छात्रों को इसका लाभ नहीं मिल पाता है। इसका फायदा उठाकर निजी लाइब्रेरी संचालक पढ़ने वाले छात्रों को सभी सुविधा दे रहे हैं। जिले के ग्राम पंचायतों में लाइब्रेरी खोलने की कवायद चल रही है, लेकिन संचालन नहीं होने से छात्र प्राइवेट लाइब्रेरी में ही पठन-पाठन का कार्य कर रहे हैं।
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बोले छात्र
जिले के कई बड़े कस्बे में निजी लाइब्रेरी का संचालन हो रहा है। इसमें पढ़ने के लिए किताबों के साथ ऑनलाइन व्यवस्था भी दी जा रही है, जिससे छात्र प्राइवेट लाइब्रेरी के तरफ रुख कर रहे हैं।

-सुमित उपाध्याय, छात्र
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जिले में एक ही सरकारी लाइब्रेरी है। जाे मुख्यालय पर है। ऐसे में कम दूरी पर निजी लाइब्रेरी खुलने से पढ़ने वाले छात्र निजी लाइब्रेरी में जा रहे है। छात्रों को पढ़ने के लिए सभी प्रकार कि किताबें भी दी जा रही है।
-आशुतोष दुबे, छात्र
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