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Siddharthnagar News: लुम्बिनी से दुनिया को शांति और सह-अस्तित्व का संदेश
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लुम्बिनी विश्व शांति घोषणा पत्र 2026 पारित करते आयोजक प्रतिनिधि। स्रोत सोशल मीडिया
संवाद न्यूज एजेंसी खुनुवां (सिद्धार्थनगर)। लुम्बिनी में आयोजित 17वें विश्व शांति मंच के समापन पर बुधवार को ‘लुम्बिनी विश्व शांति घोषणापत्र-2026’ सर्वसम्मति से पारित किया गया। घोषणापत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, परमाणु हथियारों के खतरे, साइबर सुरक्षा, सामाजिक-आर्थिक असमानता और जलवायु संकट पर चिंता जताई गई। देशों से संघर्ष रोकने और विवादों का समाधान संवाद, सहयोग और कूटनीति के माध्यम से करने का आह्वान किया गया।
तीन दिवसीय मंच का विषय ‘21वीं सदी में शांति की पुनर्कल्पना’ था। घोषणापत्र को सेन्जेन पीस फाउंडेशन की अध्यक्ष विक्की हैंसेन और लुम्बिनी विश्व शांति मंच के संस्थापक एवं अध्यक्ष बसु गौतम ने सार्वजनिक किया। आयोजकों के अनुसार, 17वां विश्व शांति मंच पहली बार दक्षिण एशिया में आयोजित हुआ। इसे विभिन्न देशों, संस्कृतियों और महाद्वीपों को साझा शांति प्रयासों से जोड़ने का अवसर बताया गया।
घोषणापत्र में भगवान बुद्ध के मध्यम मार्ग, करुणा, अहिंसा, परस्पर निर्भरता और सह-अस्तित्व की अवधारणाओं को आधुनिक शांति प्रयासों का आधार बनाने पर जोर दिया गया। पारंपरिक सैन्य और संघर्ष केंद्रित सुरक्षा दृष्टिकोण से आगे बढ़कर मानव सुरक्षा, सहयोग आधारित कूटनीति और संघर्ष की रोकथाम को प्राथमिकता देने की बात कही गई।
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देशों के बीच विवादों के समाधान के लिए खुले संवाद के माध्यमों का विस्तार करने और सरकार, नागरिक समाज तथा स्थानीय समुदायों के बीच निरंतर संवाद को जरूरी बताया गया। शांति निर्माण में महिलाओं और युवाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।
कार्यक्रम के अंत में सरकारों, अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं, नागरिक समाज, निजी क्षेत्र और आम नागरिकों से लुम्बिनी से दिए गए शांति संदेश को ठोस नीतियों और दैनिक व्यवहार में उतारने की अपील की गई। कार्यक्रम का आयोजन लुम्बिनी विश्व शांति मंच और लक्जमबर्ग स्थित सेन्जेन पीस फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। एआई के इस्तेमाल के लिए नैतिक मानक पर जोर ःकृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) समेत नई तकनीकों के विकास और इस्तेमाल के लिए नैतिक मानक और सुरक्षा व्यवस्था विकसित करने का आह्वान किया गया। विद्यालय से उच्च शिक्षा तक शांति, सहानुभूति, विश्व नागरिकता और आलोचनात्मक सोच को बढ़ावा देने वाली शिक्षा को पाठ्यक्रम में शामिल करने की जरूरत बताई गई।
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तीन दिवसीय मंच का विषय ‘21वीं सदी में शांति की पुनर्कल्पना’ था। घोषणापत्र को सेन्जेन पीस फाउंडेशन की अध्यक्ष विक्की हैंसेन और लुम्बिनी विश्व शांति मंच के संस्थापक एवं अध्यक्ष बसु गौतम ने सार्वजनिक किया। आयोजकों के अनुसार, 17वां विश्व शांति मंच पहली बार दक्षिण एशिया में आयोजित हुआ। इसे विभिन्न देशों, संस्कृतियों और महाद्वीपों को साझा शांति प्रयासों से जोड़ने का अवसर बताया गया।
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घोषणापत्र में भगवान बुद्ध के मध्यम मार्ग, करुणा, अहिंसा, परस्पर निर्भरता और सह-अस्तित्व की अवधारणाओं को आधुनिक शांति प्रयासों का आधार बनाने पर जोर दिया गया। पारंपरिक सैन्य और संघर्ष केंद्रित सुरक्षा दृष्टिकोण से आगे बढ़कर मानव सुरक्षा, सहयोग आधारित कूटनीति और संघर्ष की रोकथाम को प्राथमिकता देने की बात कही गई।
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देशों के बीच विवादों के समाधान के लिए खुले संवाद के माध्यमों का विस्तार करने और सरकार, नागरिक समाज तथा स्थानीय समुदायों के बीच निरंतर संवाद को जरूरी बताया गया। शांति निर्माण में महिलाओं और युवाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।
कार्यक्रम के अंत में सरकारों, अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं, नागरिक समाज, निजी क्षेत्र और आम नागरिकों से लुम्बिनी से दिए गए शांति संदेश को ठोस नीतियों और दैनिक व्यवहार में उतारने की अपील की गई। कार्यक्रम का आयोजन लुम्बिनी विश्व शांति मंच और लक्जमबर्ग स्थित सेन्जेन पीस फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। एआई के इस्तेमाल के लिए नैतिक मानक पर जोर ःकृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) समेत नई तकनीकों के विकास और इस्तेमाल के लिए नैतिक मानक और सुरक्षा व्यवस्था विकसित करने का आह्वान किया गया। विद्यालय से उच्च शिक्षा तक शांति, सहानुभूति, विश्व नागरिकता और आलोचनात्मक सोच को बढ़ावा देने वाली शिक्षा को पाठ्यक्रम में शामिल करने की जरूरत बताई गई।