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महामारी से जंग लड़ने में पीछे नहीं रहे कैदी
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जिला जेल में मास्क बनाते कैदी। फाइल फोटो
- फोटो : SIDDHARTHNAGAR
महामारी से जंग लड़ने में पीछे नहीं रहे कैदी
कोरोना संक्रमण काल में मास्क बनाकर कोरोना से बचाव की मुहिम का हिस्सा बने कैदी
संक्रमण काल में जेल में ही बनाए 3750 मास्क
बंदियों के साथ ही जेल पुलिस, होमगार्ड और चिकित्सकों में बांटे गए मास्क
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। कोरोना संक्रमण काल में खुद को सक्षम समझने वाला हर नागरिक संक्रमण को मात देने के लिए जंग लड़ा। आगे बढ़कर लोगों की मदद की। राशन, पानी और सब्जी के साथ बीमारी से ग्रसित लोगों तक दवा पहुंचाने का कार्य किया। इस सहयोग से देश ने बड़े संकट से निपटने में कामयाबी हासिल की। इस लड़ाई में जेल में बंद कैदी और बंदी भी पीछे नहीं रहे। आगे आकर उन्होंने भी संक्रमण को मात देने का कार्य किया। जेल में मास्क बनाकर न सिर्फ बंदियों और कैदियों तक पहुंचाया। बल्कि जेल पुलिस के जवान, होमगार्ड और जेल में आने वाले अन्य लोगों को भी दिया।
मार्च माह में जब कोरोना का संक्रमण शुरू हुआ तो स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई। बेकाबू हो चुके कोरोना को रोकने के लिए जेल में मुलाकात बंद कर दी गई। जिला कारागार में 600 से अधिक बंदी और कैदी हैं। जेल में भीड़ को नियंत्रित और संक्रमण को रोकने के लिए शासन के निर्देश पर चार सप्ताह के लिए 93 बंदियों को पैरोल पर रिहा किया गया। जो अब आ चुके हैं। मास्क खरीदने में रुपये अधिक खर्च होते हैं। संक्रमण से बचाव बेहद जरूरी था। इसलिए कैदियों ने खुद मास्क बनाना शुरू किया। लगातार सिलाई का दौर जारी रहा। 3750 मास्क बनाने का काम कैदियों ने किया। इसमें जेलकर्मी, बंदी, अंदर आने वाले लोगों को कपड़े का मास्क वितरित किया गया। यह मास्क ऐसा था कि रोज धुलिए और रोज लगाइए। अब भी कारागार में लोग मास्क लगा रहे हैं। जेल अधीक्षक अवधनरायन सिंह ने बताया कि जेल के कैदियों ने खुद मास्क बनाया और लगा रहे हैं। नियमित जेल सैनिटाइज होती है। लोग कोरोना की गाइडलाइन का पालन कर रहे हैं।
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कोरोना संक्रमण काल में मास्क बनाकर कोरोना से बचाव की मुहिम का हिस्सा बने कैदी
संक्रमण काल में जेल में ही बनाए 3750 मास्क
बंदियों के साथ ही जेल पुलिस, होमगार्ड और चिकित्सकों में बांटे गए मास्क
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। कोरोना संक्रमण काल में खुद को सक्षम समझने वाला हर नागरिक संक्रमण को मात देने के लिए जंग लड़ा। आगे बढ़कर लोगों की मदद की। राशन, पानी और सब्जी के साथ बीमारी से ग्रसित लोगों तक दवा पहुंचाने का कार्य किया। इस सहयोग से देश ने बड़े संकट से निपटने में कामयाबी हासिल की। इस लड़ाई में जेल में बंद कैदी और बंदी भी पीछे नहीं रहे। आगे आकर उन्होंने भी संक्रमण को मात देने का कार्य किया। जेल में मास्क बनाकर न सिर्फ बंदियों और कैदियों तक पहुंचाया। बल्कि जेल पुलिस के जवान, होमगार्ड और जेल में आने वाले अन्य लोगों को भी दिया।
मार्च माह में जब कोरोना का संक्रमण शुरू हुआ तो स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई। बेकाबू हो चुके कोरोना को रोकने के लिए जेल में मुलाकात बंद कर दी गई। जिला कारागार में 600 से अधिक बंदी और कैदी हैं। जेल में भीड़ को नियंत्रित और संक्रमण को रोकने के लिए शासन के निर्देश पर चार सप्ताह के लिए 93 बंदियों को पैरोल पर रिहा किया गया। जो अब आ चुके हैं। मास्क खरीदने में रुपये अधिक खर्च होते हैं। संक्रमण से बचाव बेहद जरूरी था। इसलिए कैदियों ने खुद मास्क बनाना शुरू किया। लगातार सिलाई का दौर जारी रहा। 3750 मास्क बनाने का काम कैदियों ने किया। इसमें जेलकर्मी, बंदी, अंदर आने वाले लोगों को कपड़े का मास्क वितरित किया गया। यह मास्क ऐसा था कि रोज धुलिए और रोज लगाइए। अब भी कारागार में लोग मास्क लगा रहे हैं। जेल अधीक्षक अवधनरायन सिंह ने बताया कि जेल के कैदियों ने खुद मास्क बनाया और लगा रहे हैं। नियमित जेल सैनिटाइज होती है। लोग कोरोना की गाइडलाइन का पालन कर रहे हैं।
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