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Siddharthnagar News: लॉकडाउन में बंद हुआ कारोबार तो कर्जदार हो गया था प्रिंस
Fri, 19 Jan 2024 11:45 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Fri, 19 Jan 2024 11:45 PM IST
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सिद्धार्थनगर। बांसी के गांधीनगर में सूदखोरों के चंंगुल में फंसे प्रिंस ने खुदकुशी कर ली है तो आसपास के लोगों में भी सूदखोरों पर आक्रोश है। परिवार के अनुसार लाॅकडाउन में उसका फर्नीचर का कारोबार बंद हुआ तो उसने गृहस्थी चलाने के लिए ब्याज पर कर्ज लिया। एक बार कर्ज लिया तो ब्याज चुकाने में वह कर्जदार होता गया। अब पुलिस को तलाश है कि आखिर किन किन सूदखोरों ने बेइंतहा तंग किया कि उसने मौत को गले लगा लिया।
मृतक प्रिंस कोरोना के लाॅकडाउन से पहले कस्बे में लकड़ी फर्नीचर की दुकान करता था। लाॅकडाउन लगने के बाद वह घर पर बैठा रहा, इस दौरान धीरे-धीरे घर खर्च में उसकी पूंजी समाप्त हो गई। इसके बाद वह परिवार के जीविकोपार्जन के लिए घर पर किराना व बच्चों के टॉफी चिप्स आदि की दुकान कर रहा था। इस दौरान उसने कुछ लोगों से कर्ज लिया था। एक सप्ताह पहले एक कर्ज देने वाले का कर्ज अदा किया था, लेकिन इसके बाद भी कुछ और लोगों का कर्ज अदा नहीं कर पाया था। जो लोग रोज उसके घर आकर अपना बकाया वसूलने का उस पर दबाव बना रहे थे। कर्ज में डूबा प्रिंस दबाव झेल न पाया और आत्महत्या का रास्ता अपना लिया।
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दुधमुंहे बेटे व बेटियों का भी नहीं आया ध्यान
कर्ज में डूबे प्रिंस ने तो एक झटके में अपनी जीवन लीला समाप्त करने का निर्णय ले लिया, लेकिन उसे अपने दो माह के दुधमुंहे बेटे, दो नन्हीं बेटियों और पत्नी का ध्यान नहीं रहा। प्रिंस के पीछे उसकी 28 वर्षीय पत्नी गायत्री, बड़ी बेटी सात वर्षीय वैष्णवी, पांच वर्षीय जान्हवी व दो माह का बेटा कार्तिक है। पत्नी राते-रोते बेसुध हो जा रही है। बच्चियां मां को बार बार रोता देख पूछ रही है क्यूं रो रही हो, पापा कहां हैं। घटना की खबर फैलते ही काफी संख्या में प्रिंस के घर महिला व पुरुष पहुंचने लगे, सुबह से लेकर शाम तक यह क्रम जारी रहा। वहां पहुंचने पर लोग बच्चों का चेहरा देख रुआंसे लौट रहे थे।
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3.5 लाख रुपये का कर्जदार था प्रिंस
मृतक प्रिंस की पत्नी गायत्री ने बताया कि उसकी जानकारी में उसके पति कुल तीन लाख पचास हजार रुपये के कर्जदार थे। गायत्री ने बताया कि उसके पति ने एक व्यक्ति से जमीन बेचने के लिए दो लाख रुपये बतौर बयाना लिया था तथा कुछ लोगों से डेढ़ लाख रुपये ब्याज पर कर्ज लिए थे। जो अदा नहीं हुआ था और यह लोग बार बार उसके घर आकर रुपये वापस लेने का दबाव बना रहे थे।
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मृतक प्रिंस कोरोना के लाॅकडाउन से पहले कस्बे में लकड़ी फर्नीचर की दुकान करता था। लाॅकडाउन लगने के बाद वह घर पर बैठा रहा, इस दौरान धीरे-धीरे घर खर्च में उसकी पूंजी समाप्त हो गई। इसके बाद वह परिवार के जीविकोपार्जन के लिए घर पर किराना व बच्चों के टॉफी चिप्स आदि की दुकान कर रहा था। इस दौरान उसने कुछ लोगों से कर्ज लिया था। एक सप्ताह पहले एक कर्ज देने वाले का कर्ज अदा किया था, लेकिन इसके बाद भी कुछ और लोगों का कर्ज अदा नहीं कर पाया था। जो लोग रोज उसके घर आकर अपना बकाया वसूलने का उस पर दबाव बना रहे थे। कर्ज में डूबा प्रिंस दबाव झेल न पाया और आत्महत्या का रास्ता अपना लिया।
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दुधमुंहे बेटे व बेटियों का भी नहीं आया ध्यान
कर्ज में डूबे प्रिंस ने तो एक झटके में अपनी जीवन लीला समाप्त करने का निर्णय ले लिया, लेकिन उसे अपने दो माह के दुधमुंहे बेटे, दो नन्हीं बेटियों और पत्नी का ध्यान नहीं रहा। प्रिंस के पीछे उसकी 28 वर्षीय पत्नी गायत्री, बड़ी बेटी सात वर्षीय वैष्णवी, पांच वर्षीय जान्हवी व दो माह का बेटा कार्तिक है। पत्नी राते-रोते बेसुध हो जा रही है। बच्चियां मां को बार बार रोता देख पूछ रही है क्यूं रो रही हो, पापा कहां हैं। घटना की खबर फैलते ही काफी संख्या में प्रिंस के घर महिला व पुरुष पहुंचने लगे, सुबह से लेकर शाम तक यह क्रम जारी रहा। वहां पहुंचने पर लोग बच्चों का चेहरा देख रुआंसे लौट रहे थे।
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3.5 लाख रुपये का कर्जदार था प्रिंस
मृतक प्रिंस की पत्नी गायत्री ने बताया कि उसकी जानकारी में उसके पति कुल तीन लाख पचास हजार रुपये के कर्जदार थे। गायत्री ने बताया कि उसके पति ने एक व्यक्ति से जमीन बेचने के लिए दो लाख रुपये बतौर बयाना लिया था तथा कुछ लोगों से डेढ़ लाख रुपये ब्याज पर कर्ज लिए थे। जो अदा नहीं हुआ था और यह लोग बार बार उसके घर आकर रुपये वापस लेने का दबाव बना रहे थे।