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प्राथमिक शिक्षक आमने-सामने हुए
अमर उजाला ब्यूरो/सिद्धार्थनगर
Updated Mon, 04 Jan 2016 12:04 AM IST
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बच्चों की पढ़ाई दरकिनार कर गुरुजी इन दिनों अलग विवाद में उलझे हुए हैं। मामला कुर्सी का है। शिक्षक संगठन का प्रतिनिधि बनने के लिए उनमें रार मची हुई है।
एक गुट के लोगों ने मौजूदा कार्यकारिणी को भंग कर प्रदेश स्तर से खुद को संयोजक नियुक्त करने का दावा किया है तो दूसरे गुट ने भ्रम फैलाने का आरोप लगाते हुए कानूनी कार्रवाई की धमकी दी है। दूसरों को संघर्ष, समर्पण और एकजुटता का पाठ पढ़ाने वाले गुरुजी के बीच विवाद रोचक हो गया है।
उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ की जिला इकाई का नेतृत्व अब तक राधारमण त्रिपाठी करते आ रहे हैं। उनके नेतृत्व में संघ के निष्क्रिय होने और शिक्षक हितों के साथ समझौते का आरोप लगाते हुए दूसरे गुट ने उसे प्रदेश स्तर से भंग किए जाने का दावा किया है।
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रविवार को आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में इस गुट के अगुवा अष्टभुजा पांडेय ने बताया कि प्रदेश नेतृत्व ने वर्तमान कार्यकारिणी को भंग करते हुए तदर्थ समिति का गठन किया है। इसमें उन्हें संयोजक और सतीश चंद्र त्रिपाठी, अतुल कुमार मिश्र को सह संयोजक सहित 11 सदस्य मनोनीत किया गया है।
छह माह में जिले की कार्यकारिणी गठन के निर्देश दिए हैं। उन्होंने बताया कि भंग की गई कमेटी का शिक्षकों के प्रति व्यवहार उचित नहीं था। विभागीय अधिकारियों से मिलीभगत कर वह शिक्षकों का ही उत्पीड़न कराते रहे हैं। प्रशिक्षु शिक्षकों को 2 जनवरी को नियुक्ति पत्र दिया गया, जबकि इसके लिए 31 दिसंबर की डेडलाइन थी। देर से नियुक्ति पत्र मिलने के कारण शिक्षकों का एक इंक्रीमेंट कट गया है।
उन्होंने समायोजित शिक्षकों का सत्यापन कराकर वेतन जारी करने, सभी बीआरसी में सेवा पुस्तिका बनाने के नाम पर अवैध वसूली बंद कराने, बिना स्पष्टीकरण लिए शिक्षक पर कार्रवाई पर अंकुश लगाने की मांग की। इन समस्याओं को लेकर संघर्ष की चेतावनी दी। वार्ता के दौरान तदर्थ समिति के सदस्य मिर्जा महबूब, विद्या भूषण, देवेन्द्र यादव, शेर अली, राम अभिलाष त्रिपाठी, भुनेश्वरी श्रीवास्तव, रामदास, विश्वमोहन पाठक, बृजेश पाठक, वशीर फारुकी, सुचित्रानन्द चतुर्वेदी आदि मौजूद रहे।
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एक गुट के लोगों ने मौजूदा कार्यकारिणी को भंग कर प्रदेश स्तर से खुद को संयोजक नियुक्त करने का दावा किया है तो दूसरे गुट ने भ्रम फैलाने का आरोप लगाते हुए कानूनी कार्रवाई की धमकी दी है। दूसरों को संघर्ष, समर्पण और एकजुटता का पाठ पढ़ाने वाले गुरुजी के बीच विवाद रोचक हो गया है।
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उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ की जिला इकाई का नेतृत्व अब तक राधारमण त्रिपाठी करते आ रहे हैं। उनके नेतृत्व में संघ के निष्क्रिय होने और शिक्षक हितों के साथ समझौते का आरोप लगाते हुए दूसरे गुट ने उसे प्रदेश स्तर से भंग किए जाने का दावा किया है।
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रविवार को आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में इस गुट के अगुवा अष्टभुजा पांडेय ने बताया कि प्रदेश नेतृत्व ने वर्तमान कार्यकारिणी को भंग करते हुए तदर्थ समिति का गठन किया है। इसमें उन्हें संयोजक और सतीश चंद्र त्रिपाठी, अतुल कुमार मिश्र को सह संयोजक सहित 11 सदस्य मनोनीत किया गया है।
छह माह में जिले की कार्यकारिणी गठन के निर्देश दिए हैं। उन्होंने बताया कि भंग की गई कमेटी का शिक्षकों के प्रति व्यवहार उचित नहीं था। विभागीय अधिकारियों से मिलीभगत कर वह शिक्षकों का ही उत्पीड़न कराते रहे हैं। प्रशिक्षु शिक्षकों को 2 जनवरी को नियुक्ति पत्र दिया गया, जबकि इसके लिए 31 दिसंबर की डेडलाइन थी। देर से नियुक्ति पत्र मिलने के कारण शिक्षकों का एक इंक्रीमेंट कट गया है।
उन्होंने समायोजित शिक्षकों का सत्यापन कराकर वेतन जारी करने, सभी बीआरसी में सेवा पुस्तिका बनाने के नाम पर अवैध वसूली बंद कराने, बिना स्पष्टीकरण लिए शिक्षक पर कार्रवाई पर अंकुश लगाने की मांग की। इन समस्याओं को लेकर संघर्ष की चेतावनी दी। वार्ता के दौरान तदर्थ समिति के सदस्य मिर्जा महबूब, विद्या भूषण, देवेन्द्र यादव, शेर अली, राम अभिलाष त्रिपाठी, भुनेश्वरी श्रीवास्तव, रामदास, विश्वमोहन पाठक, बृजेश पाठक, वशीर फारुकी, सुचित्रानन्द चतुर्वेदी आदि मौजूद रहे।