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Siddharthnagar News: प्रेशर हॉर्न और डीजे मचा रहे शोर, सुनने की क्षमता हो रही कमजोर

Thu, 21 Nov 2024 12:26 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Thu, 21 Nov 2024 12:26 AM IST
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Pressure horns and DJs are making noise, hearing ability is becoming weak.
सिद्धार्थनगर। वाहनों के प्रेशर हॉर्न और डीजे के शोर से अब सुनने की क्षमता भी कमजोर होने लगी है। शहर में मैरिज हाॅल और चौराहों के आसपास रहने वाले लोग अधिक परेशान हैं, क्योंकि उन्हें लगन में कई घंटे तक अनचाही आवाज सुननी पड़ रही है। इससे उनके कान में दिक्कत महसूस हो रही है। मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में कान की समस्या से परेशान रोजाना 10 से 15 मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं।
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शहर में सिद्धार्थ तिराहे के रेलवे क्राॅसिंग पर बैरियर गिरने के बाद रेलवे स्टेशन और लुंबिनी रोड और तहसील गेट के पास के दिन में 10 से 12 बार लंबा जाम लग रहा है। इन स्थानों पर लगातार तेज आवाज सुनने वाले लोगों की सुनने की क्षमता कम हो रही है। इसी प्रकार शहर के मधुकरपुर, हुसैनगंज, इंदिरा नगर, खजुरिया रोड पर मैरिज हाॅल हैं, इनमें ज्यादातर होटल मैरिज हाॅल के आसपास रहने वाले लोग तेज आवाज की डीजे से परेशान हैं।
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माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज के ईएनटी ओपीडी में कुछ दिन पहले एक वकील पहुंचे और उन्होंने बताया कि सड़क से गुजरते हुए उन्होंने डीजे की तेज आवाज सुनी और लगता है कि कान से कम सुनाई दे रहा है। जांच हुई तो उनकी सुनने की क्षमता कम हो गई थी और इलाज से आराम मिला। विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार, ध्वनि प्रदूषण का स्तर 50 डेसिबल से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। अगर इससे ज्यादा ध्वनि प्रदूषण है और लंबे समय तक ऐसी जगहों पर रहते हैं तो सुनने की क्षमता पर इसका सीधा असर होता है।
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माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज के मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. मोहम्मद अफजल ने बताया कि तेज आवाज से अचानक दिमाग को झटका लगता है। व्यक्ति खुद पर नियंत्रण नहीं रख पाता और आवेश में आकर झगड़े पर उतारू हो जाता है। ऐसा हम झगड़े की स्थिति में भी देखते हैं, जब एक व्यक्ति जोर से चिल्ला रहा होता है तो सामने वाला भी प्रतिक्रिया में उतनी ही उससे तेज आवाज में बोलता है। इसीलिए हमारे पुरानी परंपरा में हमेशा ही धीमा बोलने को कहा जाता था। धीमा बोलने पर सामने वाली प्रतिक्रिया भी धीमी हो जाती है।
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तेज हॉर्न कराता है झगड़ा
किसी चौराहे पर जाम लगा हो और बार-बार पीछे से कोई तेज आवाज वाला हॉर्न बजा रहा हो तो झगड़े हो जाते हैं। विदेश में इसे हांकिंग कहते हैं और ऐसा करना यातायात नियमों के विपरीत माना जाता है। इसका सीधा असर मानसिक स्थिति पर पड़ता है।
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पूरा परिवार बोलने लगा तेज आवाज में

मेरा घर चौराहे के पास सड़क के किनारे है। सड़क पर शोरगुल के चलते धीरे-धीरे घर के लोगों ने तेज आवाज में बोलना शुरू कर दिया था, क्योंकि धीमी आवाज में हमें बात स्पष्ट सुनाई नहीं देती थी। डॉक्टर से सलाह ली तो उन्होंने शोर की वजह से दिक्कत बताई। मेरा एक मकान व दुकान मुख्य सड़क से सामने है तो मुझे कान का इलाज कराना पड़ रहा है।
-शैलेंद्र जायसवाल, सिद्धार्थ तिराहा
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घर में भी भी तेज आवाज में बोलते हैं
हमारे इलाके में सुबह से लेकर देर रात तक शोर रहता है। लंबे समय से इसी में रहते-रहते अब तो ऐसी आदत हो गई है कि जिनके आमने-सामने घर हैं वे भी तेज आवाज में बोलते हैं। एक बार मुझे अनिद्रा की शिकायत हुई तो डॉक्टर ने जांच के बाद मानसिक तनाव बताया। फिर डॉक्टर ने ईएनटी डॉक्टर के पास भेजा तो सुनने की क्षमता कम मिली।
-भारत, गांधी नगर
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डीजे देखकर बदलता हूं रास्ता
लगन में तेज डीजे का प्रचलन ठीक नहीं है। इधर, कुछ सालों में डीजे की समस्या बढ़ी है। यहीं कारण है कि लोग शादी समारोह में जाने से परहेज करने लगे हैं। जहां तेज डीजे बजता है, उस रास्ते जाने से मैं परहेज करता हूं। इससे हार्ट अटैक में जान जा सकती है। इस मामले में जिलाधिकारी को ज्ञापन सौपूंगा।
-अनिल सिंह, कर्मचारी नेता
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यह है मानक
सुनने की सामान्य आवाज 0 से 25 डेसिबल है, 25 से 40 डेसिबल हो तो कम सुनने की समस्या है, इसे माइल्ड ग्रेड हियरिंग कहते हैं। 41 से 55 डेसिबल रेड ग्रेड, 56 से 70 माडरेट्री सीवियर एवं 71 से 90 सीवियर ग्रेड है।

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विशेषज्ञ की सलाह
हाई फ्रीक्वेंसी की आवाज से कान के अंदर हियरिंग सेल्स डैमेज हो जाती है तो सुनने की क्षमता कम हो जाती है। शुरुआती में मरीज आ जाता है तो इलाज से आवाज सुनने की क्षमता बढ़ जाती है। यदि 120 से 130 डेसीबल की आवाज हो तो उससे कान की आवाज हमेशा के लिए जा सकती है।
-डॉ. एसके शर्मा, ईएनटी विशेषज्ञ
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तेज आवाज से सुनने की क्षमता कम होने के मरीज ओपीडी में आते हैं। कुछ केस में हियरिंग सेल्स टंपरेरी डैमेज होती है, जबकि कुछ केस में परमानेंट डैमेज होता है। टंपरेरी डैमेज में इलाज के बाद आवाज सुनने की क्षमता बढ़ जाती है, जबकि परमानेंट डैमेज हो गया तो इलाज के बाद भी मरीज को सुनाई नहीं देता है, मशीन का सहारा लेना पड़ता है।
-डॉ. एके झा, ईएनटी विशेषज्ञ
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