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धर्म व जाति की राजनीति में उलझी डुमरियागंज की सियासत

Mon, 28 Feb 2022 10:38 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 28 Feb 2022 10:38 PM IST
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Politics of Dumariaganj entangled in religion and caste politics
धर्म व जाति की राजनीति में उलझी डुमरियागंज की सियासत
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-डुमरियागंज में ध्रुवीकरण पर टिकी भाजपा और सपा की निगाहें
-बागी कर सकते हैं बड़ा उलटफेर, दे रहे हैं कड़ी टक्कर
सिद्धार्थनगर। डुमरियागंज विधानसभा की सियासत अब चुनाव प्रचार के आखिरी दौर में ध्रुवीकरण पर आकर टिक गई है। भाजपा जहां हिंदू मतों को सहेजने की कोशिश में लगी है, वहीं सपा का जोर मुस्लिम मतों को सहेजने पर है। भाजपा-सपा की इस रणनीति को बागी होकर चुनाव मैदान में उतरे प्रत्याशियों और भितरघात कर रहे नेताओं से कड़ी चुनौती मिल रही है। धर्म और जाति में यहां की सियासत इस कदर उलझी है कि पिछले चुनाव में जीत-हार, महज 171 वोटों से तय हुई थी। इस बार बसपा, कांग्रेस, एआईएमआईएम और शिवसेना ने अपने उम्मीदवारों के जरिए चुनावी समीकरण को और भी जटिल बना दिया है। विकास, सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य के मुद्दे मतदान की तारीख नजदीक आते-आते गायब होते नजर आ रहे हैं और सारे प्रत्याशी धर्म और जाति की राजनीति कर वोटों का ध्रुवीकरण करने में जुटे हैं।
भाजपा ने विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह को एक बार फिर मैदान में उतारा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के करीबी राघवेंद्र प्रताप की पहचान क्षेत्र में एक कट्टर हिंदूवादी नेता की है और वे अपने तीखे बयानों के लिए जाने जाते हैं। वर्ष 2012 में राघवेंद्र प्रताप चुनाव हार गए थे और मलिक कमाल युसुफ जीते थे। वर्ष 2017 के चुनाव में बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ चुकी सैय्यदा खातून इस बार सपा उम्मीदवार के रूप में चुनावी मैदान में हैं। दोनों प्रत्याशियों के बीच वर्ष 2017 में कांटे की टक्कर हुई थी। इस बार अन्य प्रत्याशियों की दखल बढ़ने से सियासी मुकाबला और रोमांचक हो गया है।
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बागी बदल रहे हैं सियासी समीकरण
भाजपा और सपा को बागियों से कड़ी टक्कर मिल रही है। बसपा के टिकट पर चुनावी मैदान में उतरे अशोक तिवारी पुराने भाजपा नेता जिप्पी तिवारी के भाई हैं। वे डुमरियागंज सीट से भाजपा के टिकट पर वर्ष 1989, 1991 और 1993 में विधायक भी रह चुके हैं। बसपा के वोट बैंक के साथ ब्राह्मण मतों के सहारे वे चुनाव में बड़ा उलटफेर करने की कोशिश में लगे हैं तो वहीं दूसरी ओर भाजपा के एक और बागी शैलेंद्र उर्फ राजू श्रीवास्तव भी शिवसेना के टिकट से चुनावी मैदान में दस्तक दे रहे हैं। इन दोंनों बागियों की बढ़त होने से सीधा नुकसान भाजपा को उठाना पड़ सकता है। वहीं दूसरी ओर सपा प्रत्याशी सैय्यदा की राह में भी कम रोड़े नहीं हैं।
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डुमरियागंज सीट से पांच बार विधायक रह चुके मलिक कमाल युसुफ के पुत्र इरफान मलिक एआईएमआईएम
के टिकट पर चुनावी मैदान में हैं। पूर्व विधायक मलिक कमाल युसुफ की मुस्लिम एवं सवर्ण समाज में अच्छी पैठ का प्रभाव पड़ा तो उलटफेर संभव है। कांग्रेस के टिकट से कांती पांडेय चुनावी मैदान में हैं, जबकि आदमी पार्टी के उम्मीदवार काजी इरफान लतीफ भी चुनावी मैदान में पूरे दमखम जुटे हैं। इतने सारे आयामों में बंटी डुमरियागंज की सियासत में जीत का सेहरा किसे सिर बंधेगा, इसका आंकलन करना बेहद ही कठिन है।
क्षेत्र की प्रमुख समस्याएं
-प्रमुख संपर्क मार्गों की बदहाली
- बाढ़ की तबाही
-उद्योग, रोजगार का अभाव
-गन्ना किसानों की समस्याएं
वर्ष 2017 की स्थित
राघवेंद्र प्रताप सिंह-भाजपा-67227
सैय्यदा खातून-बसपा-67056
रामकुमार उर्फ चिन्कू यादव-सपा-52222
अशोक कुमार सिंह-पीस पार्टी-10351
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