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ग्राम प्रधान से मंत्री पद तक पहुंचे थे मलिक कमाल यूसुफ

Tue, 06 Sep 2022 12:57 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 06 Sep 2022 12:57 AM IST
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political carrier of malik kamal yusuf waas struglr full
मलिक यूसुफ कमाल के जनाजे में शामिल लोग। - फोटो : SIDDHARTHNAGAR
ग्राम प्रधान से मंत्री पद तक पहुंचे थे मलिक कमाल यूसुफ
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डुमरियागंज। मलिक कमाल यूसुफ ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत वर्ष 1971 में ग्राम प्रधान के चुनाव से की थी। उन्होंने 1974 में पहली बार विधानसभा के लिए चुनाव लड़ा हालांकि उन्हें नाकामी हाथ लगी, लेकिन 1977 में विधानसभा चुनाव लड़कर पहली बार विधानसभा पहुंचे। जिसके बाद 1980 मे दूसरी बार तथा 1985 मे तीसरी तथा 2002 में चौथी बार और 2012 में पांचवीं और आखिरी बार विधायक बने।
डुमरियागंज के कादिराबाद में एक जुलाई 1947 में जन्मे मलिक कमाल का राजनीतिक सफर बेहद संघर्षपूर्ण रहा। वह समाजवादी पार्टी के संस्थापक सदस्य रहे, लेकिन पार्टी से टिकट नहीं मिलने पर दूसरे दलों से भी चुनाव लड़ने से गुरेज नहीं किया था। उन्होंने सपा से लोकसभा चुनाव भी लड़ा, लेकिन सफलता हासिल नहीं कर पाए।
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वह 2003 में मुख्यमंत्री मुलायम सिंह के नेतृत्व में सपा सरकार में राज्यमंत्री भूतत्व एवं खनिकर्म बनाए गए तथा 2004 से 2007 तक अध्यक्ष (राज्य मंत्री स्तर) उत्तर प्रदेश वक्फ विकास निगम लिमिटेड रहे। मलिक कमाल के चार पुत्र और चार पुत्रियां हैं। उनकी पत्नी इशरत जहां मलिक ब्लाक प्रमुख रह चुकी हैं। उनके बड़े बेटे इरफान मलिक पिता की सियासी विरासत को संभालने के लिए 2022 में एआईएमआईएम से विधानसभा का चुनाव भी लड़ा, लेकिन सफल नहीं हुए। दूसरे बेटे सलमान मलिक ब्लाक प्रमुख डुमरियागंज और दो बार क्षेत्र पंचायत सदस्य रह चुके हैं।
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डुमरियागंज की राजनीति की धुरी माने जाते थे कमाल
जमींदार घराने से संबंध रखने वाले पूर्व विधायक मलिक कमाल यूसुफ कुशल राजनीतिज्ञ थे। उनकी धर्मनिरपेक्ष छवि, सरल स्वभाव, हंसमुख व्यक्तित्व के कारण डुमरियागंज क्षेत्र, जिला और प्रदेश में उनकी अलग पहचान थी। डुमरियागंज विधानसभा क्षेत्र में सभी वर्ग के मतदाताओं में उनकी पकड़ बेहद मजबूत रही है। इसी का नतीजा रहा कि वह वर्ष 2012 में पीस पार्टी से भी विधायक बनने में सफल रहे। उन्होंने शिक्षा जगत में सराहनीय योगदान देते हुए सिरसिया स्थित राम मनोहर लोहिया कन्या इंटर कॉलेज, कादीराबाद में मौलाना आजाद इंटर कॉलेज और बायताल में मौलाना आजाद महाविद्यालय की स्थापना की थी।
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