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पुलिस भर्ती परीक्षा : जेल पुलिस में तैनात आरक्षी नीरज तैयार करता था अभ्यर्थी
Sun, 03 Mar 2024 10:43 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sun, 03 Mar 2024 10:43 PM IST
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सिद्धार्थनगर। पुलिस भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले की जांच में जुटी पुलिस के हाथ चौकाने वाले सच सामने आ रहे हैैं। सरकारी नौकरी करने वाला जेल का सिपाही भी इस मामले से जुड़ा होगा, पुलिस यह सोच भी नहीं रही थी। लेकिन कड़ी से कड़ी मिली तो जेल में तैनात आरक्षी भी गिरफ्त में आ गया है। जो पेपर पढ़ाने के साथ ही अभ्यर्थियों को तैयार करके सौदा करने का काम करता था। हालांकि यहीं विराम नहीं लगने वाला है। अभी और लोगों के पकड़े जाने के आसार हैं।
पुलिस विभाग में आरक्षी पद पर भर्ती के लिए 17 और 18 फरवरी को हुई पुलिस भर्ती की लिखित परीक्षा आयोजित हुई थी। इसमें इटवा पुलिस ने दूसरे के स्थान पर परीक्षा देते हुए दो अलग-अलग परीक्षा केंद्रों से साॅल्वर, सहयोगी और अभ्यर्थी सहित पांच लोगों को पकड़ा गया था। उनके खिलाफ परीक्षा अधिनियम और धोखाधड़ी सहित अन्य मामले में केस दर्ज करके मामले की जांच की जा रही है। जांच में साॅल्वरों के नेटवर्क पेपर लीक से जुड़ा हुआ पाया। मामले की जांच चल रही थी। इसी बीच पेपर लीक से जुड़े पांच आरोपी पहले पकड़े गए थे। उनकी धरपकड़ से मिले क्लू के आधार पर जांच का दायरा बढ़ा गया। इसी बीच इटवा पुलिस ने बढ़नी बाॅर्डर से रविवार को नेपाल भागने की कोशिश करते हुए पकड़ लिया।
पकड़े गए आरोपियों में अमित कुमार राय निवासी विशुनपुरा थाना मुफ्फसिल जिला छपरा राज्य बिहार, राहुल कुमार सिंह निवासी बबुरा थाना बरहरा जिला भोजपुर आरा, नीरज कुमार वर्मा निवासी झखरा थाना जगदीशपुर जिला पश्चिमी चंपारण राज्य बिहार हैं। यह सभी लोग पेपर लीक मामले से जुड़े हुए हैं। इसमें नीरज कुमार वर्मा बिहार के नौगछिया जिला कारागार में सिपाही पद कार्यरत है। पुलिस की पूछताछ में सामने आया है कि नीरज वर्मा परीक्षा देने के लिए साॅल्वर को तय करता था। पेपर पहले मिल जाता था, जिसे वह उन्हें तैयारी करने के लिए दे देता था। जिससे वह परीक्षा को पास कर सकें। इसमें साॅल्वर के साथ ही उसका भी हिस्सा होता था।
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पांच लाख में होता था सौदा
पुलिस की पूछताछ में अब तक जो बात निकलकर आई है। परीक्षा पास कराने के लिए एक अभ्यर्थी से पांच लाख रुपये में सौदा होता था। इसमें डील कराने वाले से लेकर साॅल्वर सहित सभी का हिस्सा तय होता था। जो परीक्षा का परिणाम आने के बाद भुगतान किया जाता था। परीक्षा के लिए जाने से पहले 20 से 50 हजार रुपये एडवांस के तौर पर देते थे।
बैंक खातों को खंगालेगी पुलिस
असल में कितने में सौदा हो रहा था और कितने की लेनदेन किया गया है। इसकी जानकारी के लिए पुलिस पकड़े गए आरोपियों के बैंक खातों के खंगालेगी। जिससे लेनदेन के बारे में सही जानकारी मिल सके कि कितने में सौदा हुआ था।
पकड़ने वाली टीम में यह लोग रहे शामिल
पकड़ने वाली टीम में प्रभारी निरीक्षक संतोष कुमार त्रिपाठी, एसआई सर्वेश चंद्र, रामाकांत सरोज, आरक्षी मनीष यादव, विनोद कुमार साव आदि शामिल रहे।
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पुलिस विभाग में आरक्षी पद पर भर्ती के लिए 17 और 18 फरवरी को हुई पुलिस भर्ती की लिखित परीक्षा आयोजित हुई थी। इसमें इटवा पुलिस ने दूसरे के स्थान पर परीक्षा देते हुए दो अलग-अलग परीक्षा केंद्रों से साॅल्वर, सहयोगी और अभ्यर्थी सहित पांच लोगों को पकड़ा गया था। उनके खिलाफ परीक्षा अधिनियम और धोखाधड़ी सहित अन्य मामले में केस दर्ज करके मामले की जांच की जा रही है। जांच में साॅल्वरों के नेटवर्क पेपर लीक से जुड़ा हुआ पाया। मामले की जांच चल रही थी। इसी बीच पेपर लीक से जुड़े पांच आरोपी पहले पकड़े गए थे। उनकी धरपकड़ से मिले क्लू के आधार पर जांच का दायरा बढ़ा गया। इसी बीच इटवा पुलिस ने बढ़नी बाॅर्डर से रविवार को नेपाल भागने की कोशिश करते हुए पकड़ लिया।
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पकड़े गए आरोपियों में अमित कुमार राय निवासी विशुनपुरा थाना मुफ्फसिल जिला छपरा राज्य बिहार, राहुल कुमार सिंह निवासी बबुरा थाना बरहरा जिला भोजपुर आरा, नीरज कुमार वर्मा निवासी झखरा थाना जगदीशपुर जिला पश्चिमी चंपारण राज्य बिहार हैं। यह सभी लोग पेपर लीक मामले से जुड़े हुए हैं। इसमें नीरज कुमार वर्मा बिहार के नौगछिया जिला कारागार में सिपाही पद कार्यरत है। पुलिस की पूछताछ में सामने आया है कि नीरज वर्मा परीक्षा देने के लिए साॅल्वर को तय करता था। पेपर पहले मिल जाता था, जिसे वह उन्हें तैयारी करने के लिए दे देता था। जिससे वह परीक्षा को पास कर सकें। इसमें साॅल्वर के साथ ही उसका भी हिस्सा होता था।
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पांच लाख में होता था सौदा
पुलिस की पूछताछ में अब तक जो बात निकलकर आई है। परीक्षा पास कराने के लिए एक अभ्यर्थी से पांच लाख रुपये में सौदा होता था। इसमें डील कराने वाले से लेकर साॅल्वर सहित सभी का हिस्सा तय होता था। जो परीक्षा का परिणाम आने के बाद भुगतान किया जाता था। परीक्षा के लिए जाने से पहले 20 से 50 हजार रुपये एडवांस के तौर पर देते थे।
बैंक खातों को खंगालेगी पुलिस
असल में कितने में सौदा हो रहा था और कितने की लेनदेन किया गया है। इसकी जानकारी के लिए पुलिस पकड़े गए आरोपियों के बैंक खातों के खंगालेगी। जिससे लेनदेन के बारे में सही जानकारी मिल सके कि कितने में सौदा हुआ था।
पकड़ने वाली टीम में यह लोग रहे शामिल
पकड़ने वाली टीम में प्रभारी निरीक्षक संतोष कुमार त्रिपाठी, एसआई सर्वेश चंद्र, रामाकांत सरोज, आरक्षी मनीष यादव, विनोद कुमार साव आदि शामिल रहे।