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Siddharthnagar News: जमीन पर उतरी योजना...अस्तित्व में आएगा बीएससी नर्सिंग कॉलेज
Sat, 08 Jun 2024 04:53 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sat, 08 Jun 2024 04:53 AM IST
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जमीन नहीं मिलने के कारण अटक गया था नर्सिंग कॉलेज का निर्माण
एक बार मेडिकल कॉलेज परिसर में बनाने की चली बात तो जमीन पड़ गई थी कम
पांच एकड़ भूमि फायर स्टेशन के पास प्रशासन ने किया था चिह्नित बजट था आवंटित, अब शुरू हुआ निर्माण
चुनाव बाद अफसर की भी नजर, तेजी से चलेगा काम अस्तित्व में आएगा नर्सिंग कॉलेज
एक साल पहले ही 10 करोड़ से बनना है कॉलेज, दो करोड़ अवमुक्त शुरू हुआ काम
मिली होती तो अब तक शुरू हो पूरा हो गया होता निर्माण
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। स्वास्थ्य क्षेत्र की पढ़ाई करके करियर बनाने की इच्छा रखने वाले बच्चों के लिए अच्छी खबर है। बीएससी नर्सिंग कॉलेज बनने की सारी बाधा समाप्त होने के बाद शहर से सटे फायर स्टेशन के पास कॉलेज निर्माण शुरू हो गया है। जमीन की बाधा होने के कारण निर्माण अटका हुआ था। फायर स्टेशन के बगल जमीन का फाइनल हो गया और एक सप्ताह पहले ही निर्माण शुरू हो गया है। पहली किश्त धनराशि जारी हो गई है और दूसरी के लिए डिमांड चला गया है। उम्मीद है कि अगले सत्र में दाखिला शुरू हो जाएगा। इससे नर्सिंग की पढ़ाई करने वाले बच्चों को दूसरे शहर का रुख नहीं करना पड़ेगा।
जिले में माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज बनने के बाद एमबीबीएस की पढ़ाई करने वाले बच्चों के लिए बड़ी सौगात मिल गई। क्योंकि हर साल 100 सीटों पर दाखिल हो रहा है। लेकिन नर्सिंग की पढ़ाई के लिए जिले में कोई सरकारी कॉलेज नहीं था। सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ ने नर्सिंग कॉलेज की सौगात दी थी। जिससे यहां के बच्चे यहीं पर नर्सिंग की पढ़ाई कर सकें। जमीन की तलाश शुरू हुई, लेकिन नहीं मिल पा रहा था। इसके बाद माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज परिसर में बनाने पर विचार हुआ। लेकिन जमीन की कमी होने और मेडिकल कॉलेज में अन्य कार्यों के लिए जरूरत पर जमीन कहां से मिलेगी। इस देखते हुए प्रस्ताव अधर में पड़ गया। फिर शासन स्तर से जवाब मांगा गया था। इसके बाद तहसील प्रशासन ने शहर से सटे बर्डपुर नंबर 14 में फायर स्टेशन के पास सरकारी जमीन को चिह्नित की। जिसके प्रस्ताव को पास कर दिया।
एक सप्ताह पहले ही कॉलेज का निर्माण शुरू हो गया है। 10 करोड़ की लागत से बनने वाले कॉलेज के निर्माण की पहली किश्त दो करोड़ रुपये आ भी गया है। दूसरी किश्त के लिए डिमांड हो चुका है। उम्मीद है कि अगले साल नर्सिंग का शैक्षिक सत्र शुरू हो जाएगा। इस संबंध में माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज के नवागत प्राचार्य डॉ. राजेश मोहन ने बताया कि नर्सिंग कॉलेज का निर्माण शुरू हुआ है। काम चल रहा है, अभी वे जल्द ही आए हैं। प्रयास रहेगा कि निर्माण जल्द पूरा हो सके।
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तीन मंजिला रहेगा भवन
लगभग पांच एकड़ भूमि इसके लिए आरक्षित किया गया है। इसमें कॉलेज, हास्टल आदि की सुविधा अलग-अलग होगी। भवन तीन मंजिला रहेगा। जिससे अधिक एरिया कवर करना पड़े। इसमें हर साल 40 सीटों पर दाखिला होगा। काउंसलिंग प्रदेश स्तरीय परीक्षा के जरिए होगा।
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नर्सिंग कॉलेज में 160 छात्र करेंगे पढ़ाई
केंद्र सरकार की मदद से माधव प्रसाद त्रिपाठी चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध नर्सिंग कॉलेज के एक एकड़ में एकेडमिक भवन बनेगा। साथ ही छात्रावास, बाउंड्रीवाल एवं अन्य भवनों का निर्माण होगा। नर्सिंग कॉलेज में बीएसएसी नर्सिंग की 40 सीटें होंगी। चार वर्षीय बीएससी नर्सिंग के पाठ्यक्रम के तहत यहां कुल 160 विद्यार्थी पढ़ाई करेंगे। इसमें प्रदेश स्तरीय परीक्षा के आधार प्रवेश लिया जाएगा।
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बाहर जाने के लिए विवश होते थे छात्र
नर्सिंग की पढ़ाई अकसर छात्राएं ही करती हैं। इसके लिए उन्हें लखनऊ, गोरखपुर, कानपुर और दिल्ली जाना पड़ता है। बेटियों को इतनी दूर भेजने से परिवार के लोग कतराते हैं। इसलिए चाहते हुए बेटियां बाहर जाकर नहीं पढ़ पाती हैं। अब जिले में सरकारी नर्सिंग कॉलेज बनने से युवाओं से अधिक बेटियों को लाभ मिलेगा।
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एक बार मेडिकल कॉलेज परिसर में बनाने की चली बात तो जमीन पड़ गई थी कम
पांच एकड़ भूमि फायर स्टेशन के पास प्रशासन ने किया था चिह्नित बजट था आवंटित, अब शुरू हुआ निर्माण
चुनाव बाद अफसर की भी नजर, तेजी से चलेगा काम अस्तित्व में आएगा नर्सिंग कॉलेज
एक साल पहले ही 10 करोड़ से बनना है कॉलेज, दो करोड़ अवमुक्त शुरू हुआ काम
मिली होती तो अब तक शुरू हो पूरा हो गया होता निर्माण
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। स्वास्थ्य क्षेत्र की पढ़ाई करके करियर बनाने की इच्छा रखने वाले बच्चों के लिए अच्छी खबर है। बीएससी नर्सिंग कॉलेज बनने की सारी बाधा समाप्त होने के बाद शहर से सटे फायर स्टेशन के पास कॉलेज निर्माण शुरू हो गया है। जमीन की बाधा होने के कारण निर्माण अटका हुआ था। फायर स्टेशन के बगल जमीन का फाइनल हो गया और एक सप्ताह पहले ही निर्माण शुरू हो गया है। पहली किश्त धनराशि जारी हो गई है और दूसरी के लिए डिमांड चला गया है। उम्मीद है कि अगले सत्र में दाखिला शुरू हो जाएगा। इससे नर्सिंग की पढ़ाई करने वाले बच्चों को दूसरे शहर का रुख नहीं करना पड़ेगा।
जिले में माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज बनने के बाद एमबीबीएस की पढ़ाई करने वाले बच्चों के लिए बड़ी सौगात मिल गई। क्योंकि हर साल 100 सीटों पर दाखिल हो रहा है। लेकिन नर्सिंग की पढ़ाई के लिए जिले में कोई सरकारी कॉलेज नहीं था। सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ ने नर्सिंग कॉलेज की सौगात दी थी। जिससे यहां के बच्चे यहीं पर नर्सिंग की पढ़ाई कर सकें। जमीन की तलाश शुरू हुई, लेकिन नहीं मिल पा रहा था। इसके बाद माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज परिसर में बनाने पर विचार हुआ। लेकिन जमीन की कमी होने और मेडिकल कॉलेज में अन्य कार्यों के लिए जरूरत पर जमीन कहां से मिलेगी। इस देखते हुए प्रस्ताव अधर में पड़ गया। फिर शासन स्तर से जवाब मांगा गया था। इसके बाद तहसील प्रशासन ने शहर से सटे बर्डपुर नंबर 14 में फायर स्टेशन के पास सरकारी जमीन को चिह्नित की। जिसके प्रस्ताव को पास कर दिया।
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एक सप्ताह पहले ही कॉलेज का निर्माण शुरू हो गया है। 10 करोड़ की लागत से बनने वाले कॉलेज के निर्माण की पहली किश्त दो करोड़ रुपये आ भी गया है। दूसरी किश्त के लिए डिमांड हो चुका है। उम्मीद है कि अगले साल नर्सिंग का शैक्षिक सत्र शुरू हो जाएगा। इस संबंध में माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज के नवागत प्राचार्य डॉ. राजेश मोहन ने बताया कि नर्सिंग कॉलेज का निर्माण शुरू हुआ है। काम चल रहा है, अभी वे जल्द ही आए हैं। प्रयास रहेगा कि निर्माण जल्द पूरा हो सके।
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तीन मंजिला रहेगा भवन
लगभग पांच एकड़ भूमि इसके लिए आरक्षित किया गया है। इसमें कॉलेज, हास्टल आदि की सुविधा अलग-अलग होगी। भवन तीन मंजिला रहेगा। जिससे अधिक एरिया कवर करना पड़े। इसमें हर साल 40 सीटों पर दाखिला होगा। काउंसलिंग प्रदेश स्तरीय परीक्षा के जरिए होगा।
नर्सिंग कॉलेज में 160 छात्र करेंगे पढ़ाई
केंद्र सरकार की मदद से माधव प्रसाद त्रिपाठी चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध नर्सिंग कॉलेज के एक एकड़ में एकेडमिक भवन बनेगा। साथ ही छात्रावास, बाउंड्रीवाल एवं अन्य भवनों का निर्माण होगा। नर्सिंग कॉलेज में बीएसएसी नर्सिंग की 40 सीटें होंगी। चार वर्षीय बीएससी नर्सिंग के पाठ्यक्रम के तहत यहां कुल 160 विद्यार्थी पढ़ाई करेंगे। इसमें प्रदेश स्तरीय परीक्षा के आधार प्रवेश लिया जाएगा।
बाहर जाने के लिए विवश होते थे छात्र
नर्सिंग की पढ़ाई अकसर छात्राएं ही करती हैं। इसके लिए उन्हें लखनऊ, गोरखपुर, कानपुर और दिल्ली जाना पड़ता है। बेटियों को इतनी दूर भेजने से परिवार के लोग कतराते हैं। इसलिए चाहते हुए बेटियां बाहर जाकर नहीं पढ़ पाती हैं। अब जिले में सरकारी नर्सिंग कॉलेज बनने से युवाओं से अधिक बेटियों को लाभ मिलेगा।