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सिद्धार्थनगर: सैकड़ों गांवों में घुसा पानी, घर में कैद हुए लोग, बह गए कई मकान

Fri, 14 Oct 2022 04:06 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर।
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर। Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Fri, 14 Oct 2022 04:06 PM IST
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people closed in house due to water entered in villeges
बांसी क्षेत्र के भगवतापुर गांव में नागवा अशोगवा बांध कटने के बाद सुपा से चेतिया मार्ग पर जान जोखि - फोटो : SIDDHARTHNAGAR

सिद्धार्थनगर जिले में बूढ़ी राप्ती नदी ने बृहस्पतिवार को तबाही की नई इबारत लिख दी। पिछले एक सप्ताह से तांडव मचा रही नदी के सैलाब से भगवतापुर के पास अशोगवा-नगवा बांध टूट गया। पहले से हो रहे रिसाव के चलते, भोर मेें तीन बजे बांध टूट गया और देखते ही देखते पचास मीटर तक गैप हो गया। पानी के तेज बहाव में कटान स्थल से सटे भगवतापुर के आधा दर्जन पक्के व कच्चे मकान जमींदोज हो गए। गांव में भगदड़ मच गई और लोग चीखने-चिल्लाने लगे।

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लोगों ने पहले बच्चों और महिलाओं को घर से निकाला और जितना संभव हो सका जरूरी सामान लेकर बंधे पर पहुंच गए। लोग घर में रखा अनाज और सामान नहीं निकाल पाए, वह पूरी तरह से बर्बाद हो गया। सैलाब से भगवतापुर के पचास से अधिक घर घिर गए। तमाम लोग अब भी अपने घर के छत पर फंसे हुए हैं। सुरक्षित बाहर निकलने के लिए उन्हें प्रशासन से मदद की दरकार है। भगवतापुर के महेंद्र, गोमती, लालमन, बिंदेश्वरी आदि ने बताया कि उनका सारा सामान बर्बाद हो गया है और अब उन्हें अपने घर की चिंता सता रही है। उनके घर कभी भी गिर सकते हैं।
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गांव में मची मची भगदड़, सामान बर्बाद

बांध टूटने के बाद भगवतापुर में हाहाकार मच गया और लोग अपनी जान बचाने के लिए घर छोड़कर भागने लगे। गांव के लोग छोटे बच्चों और महिलाओं के साथ बांध पर शरण लिए हुए हैं। घर में रखा अधिकतर सामान बाढ़ की भेंट चढ़ गया। बाढ़पीड़ितों के पास न खाने को कुछ बचा है और न ही सिर ढकने के लिए छत। हालात से मजबूर बाढ़पीड़ितों का कहना है कि उन्हें प्रशासन की नाकामी की सजा भुगतनी पड़ रही है।

जिम्मेदारों की लापरवाही पड़ी भारी
लोगों का कहना है कि समय रहते अगर प्रशासनिक मशीनरी जाग जाती तो बांध को कटने से बचाया जा सकता था। भगवतापुर में बांध के पास कई दिनों से रिसाव हो रहा था, लेकिन जिम्मेदार नहीं चेते। बचाव के नाम पर खानापूरी करते नजर आए। गांव के लोगों ने बताया कि एक सप्ताह से वे लोग रात-दिन खतरे की आशंका में जी रहे थे। सरकारी महकमे के लोगों के साथ यहां के लोग भी बांध को बचाने की हर संभव कोशिश करते रहे, लेकिन नाकाम रहे। झीनक, राम अचल आदि ने बताया कि पिछले कई वर्षों से बांध की मरम्मत नहीं हुई। बाढ़ के समय अधिकारी खानापूरी करके चले जाते हैं। बुधवार की शाम से ही बांध में रिसाव हो रहा था, पूरी रात लोग गुहार लगाते रहे लेकिन बांध बचाने के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं किया गया।

सूपा-चेतिया मार्ग पर भरा पानी, आवाजाही बंद
सिद्धार्थनगर। पहले से ही खतरे कर निशान पार कर चुकी बूढ़ी राप्ती नदी का बांध कटने के कुछ ही पलों में सैकड़ों गांव जलमग्न हो गए। सूपा-चेतिया मार्ग पर तेज बहाव होने लगा और आवाजाही बंद हो गई। क्षेत्र के नगवां, बलुआ, पड़री, कोड़री, भड़ही, बियरा, मजिगवा, थुम्हवा, धरहरा, खिरिया, दसिया, चनगड़िया, गनवरिया, खंभहरिया, गुजरौलिया, मरचहवा, भड़हवाडीह आदि गांव तबाह हो हो गए। अचानक जल प्लावन से लोग घर ही में कैद होकर रह गए। जान बचाने की फिक्र में घर के निचले हिस्से में रखे सामान की चिंता छोड़ घर की छत की ओर भागे। अब भी हजारों की संख्या में लोग घर में फंसे हैं और जान-माल की सुरक्षा के लिए प्रशासन की बाट जोह रहे हैं।

सीएम के कार्यक्रम के दिन टूटा बांध, अधिकारियों को छूटा पसीना
सिद्धार्थनगर। भगौतापुर में बांध टूटने की खबर के बाद प्रशासनिक मशीनरी के हाथ-पांव फूल गए। जिले में मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के दिन हुई घटना के बाद बस्ती कमिश्नर आरके भारद्वाज, एडीजी अखिल कुमार और डीएम संजीव रंजन समेत पूरा प्रशासनिक अमला कटान स्थल तक पहुंचा और बचाव कार्य के लिए निर्देशित किया। सांसद जगदंबिका पाल ने भी कटान स्थल का दौरा किया। पीड़ितों से मिले और राहत कार्य के लिए अधिकारियों को निर्देशित किया। फिलहाल, बांध से होकर आने-जाने वालों को रोका जा रहा है। जगह-जगह पुलिस तैनात कर दी गई है।

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