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जिला अस्पताल आने के बाद भ्रमित हो जा रहे मरीज
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जिला अस्पताल आने के बाद भ्रमित हो जा रहे मरीज
रंग-रोगन के दौरान वर्षों से लिखे नाम को मिटा दिया गया है
सिद्धार्थनगर। जिला अस्पताल का नाम मिट जाने के कारण वहां पहुंचने वाले मरीज व उनके परिजन भ्रमित हो रहे हैं। दरअसल, रंग-रोगन के दौरान जिला अस्पताल की इमरजेंसी और मुख्य गेट पर लगे नाम को मिटा दिया गया है, जिसके कारण ऐसी स्थिति निर्मित हुई है।
दो सप्ताह पहले जिला अस्पताल के मुख्य गेट एवं प्रमुख स्थानों पर लिखे गए नाम को मिटा दिया गया है। दोबारा नाम लिखने में लापरवाही बरती जा रही है। जिला अस्पताल को माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज से संबद्ध किया गया है, इसलिए यहां की व्यवस्था बदल रही है। जिला अस्पताल के मुख्य गेट पर लिखा गया गांधी स्मारक संयुक्त जिला अस्पताल अब नजर नहीं आ रहा है।
उसका निवासी उपदेश कुमार ने कहा कि शुक्रवार की सुबह आठ बजे वे ओपीडी में दिखाने के लिए जिला अस्पताल पहुंचे थे, लेकिन कुछ लोग इमरजेंसी के सामने ही लोगों से पूछ रहे थे कि इमरजेंसी कहा है?
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ओमप्रकाश और अजीत यादव का कहना है कि अगर नाम किन्हीं कारणों से हटाया गया है तो तत्काल लिखवा देना चाहिए, जिससे आने वाले मरीज भ्रमित न हों।
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रंग-रोगन के दौरान वर्षों से लिखे नाम को मिटा दिया गया है
सिद्धार्थनगर। जिला अस्पताल का नाम मिट जाने के कारण वहां पहुंचने वाले मरीज व उनके परिजन भ्रमित हो रहे हैं। दरअसल, रंग-रोगन के दौरान जिला अस्पताल की इमरजेंसी और मुख्य गेट पर लगे नाम को मिटा दिया गया है, जिसके कारण ऐसी स्थिति निर्मित हुई है।
दो सप्ताह पहले जिला अस्पताल के मुख्य गेट एवं प्रमुख स्थानों पर लिखे गए नाम को मिटा दिया गया है। दोबारा नाम लिखने में लापरवाही बरती जा रही है। जिला अस्पताल को माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज से संबद्ध किया गया है, इसलिए यहां की व्यवस्था बदल रही है। जिला अस्पताल के मुख्य गेट पर लिखा गया गांधी स्मारक संयुक्त जिला अस्पताल अब नजर नहीं आ रहा है।
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उसका निवासी उपदेश कुमार ने कहा कि शुक्रवार की सुबह आठ बजे वे ओपीडी में दिखाने के लिए जिला अस्पताल पहुंचे थे, लेकिन कुछ लोग इमरजेंसी के सामने ही लोगों से पूछ रहे थे कि इमरजेंसी कहा है?
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ओमप्रकाश और अजीत यादव का कहना है कि अगर नाम किन्हीं कारणों से हटाया गया है तो तत्काल लिखवा देना चाहिए, जिससे आने वाले मरीज भ्रमित न हों।