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Siddharthnagar News: रिकॉर्ड में दर्ज रहेंगे बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के मरीज
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- शिविर में बुखार के रोगियों को किया जाएगा चिन्हित
- अचानक किसी के बीमार होने पर या गांव में कई लोगों के बीमार पड़ने पर तत्काल हो सके इलाज
- मरीजों की सही रहे हिस्ट्री इसलिए इस प्रकार से किया जा रहा काम
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। बारिश के बाद तेज धूप और गर्मी से लोग बीमार पड़ रहे हैं। बाढ़ प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य शिविर लगाकर इलाज किया जा रहा है। बुखार के रोगियों के संख्या अधिक है। ऐसे रोगियों की स्वास्थ्य विभाग सूची तैयार कर रही है। जिससे मरीज की हिस्ट्री के बारे में जानकारी इकट्ठा की जा सके और गांव में एकाएक कोई बीमार हो तो समय से इलाज किया जा सके।
नेपाल से सटा होने के कारण बारिश के बाद डुमरियागंज, शोहरतगढ़, इटवा, बांसी और नौगढ़ तहसील बाढ़ प्रभावित रहता है। जुलाई माह के प्रथम सप्ताह में भारी बारिश और नेपाल से पानी छोड़े जाने के बाद नदियां उफान पर आ गई। जिले में बाढ़ के हालात उत्पन्न हो गए। लगभग आठ दिन तक गांव और घरों में पानी रहा। बाढ़ हटी तो संक्रामक बीमारी जैसे बुखार जुकाम के रोगियों की संख्या में एकाएक वृद्धि हो गई। बाढ़ क्षेत्र के अस्पताल पर भीड़ बढ़ गई। वहीं, ग्रामीणों को तत्काल लाभ मिल सके। इसके लिए स्वास्थ्य टीम गांवों में जाकर शिविर लगाकर मरीजों के सेहत की जांच करने के साथ ही उन्हें दवा दे रही है। इन मरीजों का ध्यान रखा जा रहा है।
बाढ़ का पानी हटने के बाद लगभग एक माह तक उल्टी, दस्त बुखार सहित अन्य बीमारी के फैलने का खतरा रहता है, जो एक साथ पूरे परिवार को हो जाता है। ऐेसे में स्वास्थ्य विभाग की टीम ऐसे मरीजों और गांव की सूची तैयार कर रही है। टीम उस गांव के लोगों के संपर्क में रहेगी। अगर एक साथ कई लोग बीमार पड़ते हैं तो टीम जाएगी और जांच करेगी इसके बाद इलाज करेगी। जिससे अधिक लोग चपेट में न आएं। इस संबंध में सीएमओ डॉ. आरके चौरसिया ने बताया कि बाढ़ प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य शिविर लगाया जा रहा है। यहां इलाज करने के साथ मरीजों का डाटा एकत्र किया जा रहा है। इन गांवों पर स्वास्थ्य टीम की नजर रहेगी।
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- अचानक किसी के बीमार होने पर या गांव में कई लोगों के बीमार पड़ने पर तत्काल हो सके इलाज
- मरीजों की सही रहे हिस्ट्री इसलिए इस प्रकार से किया जा रहा काम
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। बारिश के बाद तेज धूप और गर्मी से लोग बीमार पड़ रहे हैं। बाढ़ प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य शिविर लगाकर इलाज किया जा रहा है। बुखार के रोगियों के संख्या अधिक है। ऐसे रोगियों की स्वास्थ्य विभाग सूची तैयार कर रही है। जिससे मरीज की हिस्ट्री के बारे में जानकारी इकट्ठा की जा सके और गांव में एकाएक कोई बीमार हो तो समय से इलाज किया जा सके।
नेपाल से सटा होने के कारण बारिश के बाद डुमरियागंज, शोहरतगढ़, इटवा, बांसी और नौगढ़ तहसील बाढ़ प्रभावित रहता है। जुलाई माह के प्रथम सप्ताह में भारी बारिश और नेपाल से पानी छोड़े जाने के बाद नदियां उफान पर आ गई। जिले में बाढ़ के हालात उत्पन्न हो गए। लगभग आठ दिन तक गांव और घरों में पानी रहा। बाढ़ हटी तो संक्रामक बीमारी जैसे बुखार जुकाम के रोगियों की संख्या में एकाएक वृद्धि हो गई। बाढ़ क्षेत्र के अस्पताल पर भीड़ बढ़ गई। वहीं, ग्रामीणों को तत्काल लाभ मिल सके। इसके लिए स्वास्थ्य टीम गांवों में जाकर शिविर लगाकर मरीजों के सेहत की जांच करने के साथ ही उन्हें दवा दे रही है। इन मरीजों का ध्यान रखा जा रहा है।
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बाढ़ का पानी हटने के बाद लगभग एक माह तक उल्टी, दस्त बुखार सहित अन्य बीमारी के फैलने का खतरा रहता है, जो एक साथ पूरे परिवार को हो जाता है। ऐेसे में स्वास्थ्य विभाग की टीम ऐसे मरीजों और गांव की सूची तैयार कर रही है। टीम उस गांव के लोगों के संपर्क में रहेगी। अगर एक साथ कई लोग बीमार पड़ते हैं तो टीम जाएगी और जांच करेगी इसके बाद इलाज करेगी। जिससे अधिक लोग चपेट में न आएं। इस संबंध में सीएमओ डॉ. आरके चौरसिया ने बताया कि बाढ़ प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य शिविर लगाया जा रहा है। यहां इलाज करने के साथ मरीजों का डाटा एकत्र किया जा रहा है। इन गांवों पर स्वास्थ्य टीम की नजर रहेगी।
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