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कोरोना के कारण अटकी है विश्वविद्यालय में बीएड की मान्यता

Fri, 11 Feb 2022 10:42 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 11 Feb 2022 10:42 PM IST
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panding recognition BAD in university
कोरोना के कारण अटकी है विश्वविद्यालय में बीएड की मान्यता
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-सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु में बीएड पाठ्यक्रम शुरू करने की तैयारी
-एनसीटीई के पैनल के निरीक्षण का इंतजार, अगले सत्र से प्रवेश शुरू करने का है प्रयास
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु में बीएड पाठ्यक्रम की मान्यता अटकी हुई है। नेशनल काउंसिल फॉर टीचर्स एजुकेशन जयपुर (एनसीटीई) की टीम के निरीक्षण के बाद बीएड कोर्स का संचालन शुरू होने की संभावना है। माना जा रहा है कि कोरोना संक्रमण की वापसी के कारण एनसीटीई के पैनल को निरीक्षण के लिए आने में देर हुई है, जबकि सिद्धार्थ विश्वविद्यालय प्रशासन का प्रयास है कि नए सत्र में विश्वविद्यालय में बीएड की कक्षाएं भी संचालित हों।
सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में बीएड की कक्षाएं नहीं चलती हैं, जबकि विश्वविद्यालय से संबद्ध छह जिलों के महाविद्यालयों की बीएड की परीक्षाएं विश्वविद्यालय ही कराता है। सिद्धार्थनगर, बस्ती, संतकबीरनगर, श्रावस्ती, बलरामपुर, महराजगंज के 80 महाविद्यालयों में बीएड की कक्षाएं संचालित की जाती हैं, जबकि चार महाविद्यालयों में एमएड की कक्षाएं संचालित होती हैं। एनसीटीई के पैनल के निरीक्षण में मानक पूरे होने पर विश्वविद्यालय को बीएड की मान्यता मिल जाएगी।
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मान्यता के बाद होगा फैकल्टी का चयन
सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में बीएड की मान्यता प्राप्त होने के बाद फैकल्टी का चयन होगा। विश्वविद्यालय में स्ववित्तपोषित बीएड पाठ्यक्रम संचालित करने की योजना है। जितनी सीट की मान्यता प्राप्त होगी, उसी अनुसार शिक्षकों का चयन किया जाएगा। अगले सत्र में प्रवेश शुरू करने की तैयारी है। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से एनसीटीई में लगातार पत्राचार किया जा रहा है।
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2020 में आया था एनसीटीई पैनल
विश्वविद्यालय में वर्ष 2020 में बीएड की मान्यता परखने के लिए एनसीटीई का पैनल आया था। उस दौरान विश्वविद्यालय में भवन निर्माणाधीन होने के कारण मान्यता अटक गई थी। अब भवन निर्माण का कार्य पूरा हो गया है। विश्वविद्यालय के अनुसार बीएड कोर्स संचालित करने के लिए मानक पूरे हो गए हैं।

विश्वविद्यालय में बीएड की मान्यता के लिए प्रयास जारी है। मानकों की जांच के लिए एनसीटीई को पत्र भेजे जा रहे हैं, संभवत: कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर के कारण एनसीटीई के निरीक्षण में देर हुई होगी। नए सत्र में विश्वविद्यालय में बीएड पाठ्यक्रम शुरू होने की पूरी संभावना है।
प्रो. दीपक मिश्रा, मुख्य नियंता सिद्धार्थ विश्वविद्यालय
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