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जैविक विधि से खेती करके बढ़ा सकते हैं उपज
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‘जैविक खेती कर घटा सकते हैं लागत’
पैकी और चंपापुर गांव में आयोजित हुई कृषक गोष्ठी
संवाद न्यूज एजेंसी
परसा। नेशनल मिशन फार सस्टेनेबल एग्रीकल्चर योजना (राष्ट्रीय टिकाऊ खेती अभियान) के तहत बढ़नी ब्लॉक क्षेत्र के पैकी और चंपापुर गांव में शनिवार को कृषक गोष्ठी आयोजित की गई। इस गोष्ठी में किसानों को जैविक खेती के बारे में जानकारी प्रदान की गई। गोष्ठी में कृषि विशेषज्ञों की ओर से जैविक खेती के गुर सिखाए गए।
कृषि को नया आयाम देने के लिए राष्ट्रीय टिकाऊ खेती अभियान के नाम से नई योजनाओं को लागू किया गया है। केंद्र की इस योजना के क्रियान्वयन के लिए कृषि एवं इससे जुड़े अधिकारियों ने इसके लिए योजनाबद्ध तरीके से काम करना शुरू कर दिया है। कृषि विभाग के जिला लैब प्रभारी रणवीर सिंह ने कहा कि वह सस्ती और टिकाऊ खेती के लिए जैविक खेती को अपनाएं। यह रासायनिक खेती के मुकाबले कम खर्चीली और टिकाऊ है। कृषि प्राविधिक सहायक रामसेवक यादव ने कहा कि रासायनिक खाद के रूप में गोबर खाद, मटका खाद, केंचुआ खाद आदि का इस्तेमाल किया जा सकता है। यह खाद खेतों की मिट्टी की उर्वरा शक्ति को बढ़ाती है। चंपापुर में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में कृषि प्राविधिक सहायक शिवम यादव ने बताया कि जिले में प्रतिदिन प्रत्येक विकास खंड के सात गांवों में जैविक खेती पर गोष्ठी आयोजित की जा रही है। मौके पर चंपापुर प्रधान हीरालाल यादव, पैकी प्रधान शब्बीर अहमद, ओमप्रकाश, बलिराम चौधरी, तौलेश्वर नाथ मिश्र, ओमप्रकाश मिश्र, रोशन यादव, हबीब अहमद, जियालाल, एहसान आदि मौजूद रहे।
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पैकी और चंपापुर गांव में आयोजित हुई कृषक गोष्ठी
संवाद न्यूज एजेंसी
परसा। नेशनल मिशन फार सस्टेनेबल एग्रीकल्चर योजना (राष्ट्रीय टिकाऊ खेती अभियान) के तहत बढ़नी ब्लॉक क्षेत्र के पैकी और चंपापुर गांव में शनिवार को कृषक गोष्ठी आयोजित की गई। इस गोष्ठी में किसानों को जैविक खेती के बारे में जानकारी प्रदान की गई। गोष्ठी में कृषि विशेषज्ञों की ओर से जैविक खेती के गुर सिखाए गए।
कृषि को नया आयाम देने के लिए राष्ट्रीय टिकाऊ खेती अभियान के नाम से नई योजनाओं को लागू किया गया है। केंद्र की इस योजना के क्रियान्वयन के लिए कृषि एवं इससे जुड़े अधिकारियों ने इसके लिए योजनाबद्ध तरीके से काम करना शुरू कर दिया है। कृषि विभाग के जिला लैब प्रभारी रणवीर सिंह ने कहा कि वह सस्ती और टिकाऊ खेती के लिए जैविक खेती को अपनाएं। यह रासायनिक खेती के मुकाबले कम खर्चीली और टिकाऊ है। कृषि प्राविधिक सहायक रामसेवक यादव ने कहा कि रासायनिक खाद के रूप में गोबर खाद, मटका खाद, केंचुआ खाद आदि का इस्तेमाल किया जा सकता है। यह खाद खेतों की मिट्टी की उर्वरा शक्ति को बढ़ाती है। चंपापुर में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में कृषि प्राविधिक सहायक शिवम यादव ने बताया कि जिले में प्रतिदिन प्रत्येक विकास खंड के सात गांवों में जैविक खेती पर गोष्ठी आयोजित की जा रही है। मौके पर चंपापुर प्रधान हीरालाल यादव, पैकी प्रधान शब्बीर अहमद, ओमप्रकाश, बलिराम चौधरी, तौलेश्वर नाथ मिश्र, ओमप्रकाश मिश्र, रोशन यादव, हबीब अहमद, जियालाल, एहसान आदि मौजूद रहे।
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